उत्तराखंड: बर्फ से ढकीं हिमालय की चोटियां, यमुनोत्री में तीर्थयात्रा बहाल, बदरी-केदार और गंगोत्री की यात्रा रास्ता बंद होने से रुकी
गढ़वाल में करीब 44 घंटे तक लगातार हुई बारिश से चमोली जिले में अफरातफरी का माहौल रहा। रविवार रात करीब आठ बजे से मंगलवार अपराह्न तीन बजे तक बारिश का दौर जारी रहा।
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विस्तार
मंगलवार को दोपहर बाद बारिश थमने के बाद मौसम साफ हुआ तो बदरीनाथ धाम की बर्फ से ढकी चोटियां साफ नजर आईं। यह नजारा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। जोशीमठ में भी मौसम सुहावना हो गया है। यहां धूप खिलने के बाद इंद्रधनुष का मनमोहक दृश्य देखने को मिला। वहीं, वहीं, आदि कैलाश, ज्योलिंकांग, कालापानी और लिपुलेख में दो फुट से ज्यादा बर्फबारी हुई है।
वहीं, भारी बारिश के बीच रुकी हुई चारधाम यात्रा में से यमुनोत्री की यात्रा मंगलवार से दोबारा शुरू कर दी गई। जबकि केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री की तीर्थयात्रा सड़क बंद होने की वजह से बहाल नहीं हो पाई है। एनएच खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।
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उत्तरकाशी के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि यमुनोत्री धाम की यात्रा मंगलवार सुबह से बहाल हो गई। मंगलवार को रिकॉर्ड 2381 तीर्थयात्री यमुनोत्री धाम के दर्शन को पहुंचे हैं। यमुनोत्री में मौसम सामान्य होने लगा है। तीर्थयात्री जो 17 अक्तूबर से बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री में मौजूद हैं, उनमें से कई यात्री यहां पहुंचे। वहीं, ऋषिकेश बस टर्मिनल से भी तीर्थयात्री यमुनोत्री धाम पहुंचे। उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
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आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ.धन सिंह रावत और मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधू भी लगातार नजर बनाकर रखे हुए हैं। सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारी वहां रुके हुए तीर्थयात्रियों को लेकर लगातार सरकार को अपडेट देने के साथ ही व्यवस्थाएं भी दुरुस्त कर रहे हैं। देवस्थानम बोर्ड के मुताबिक, अभी यात्रा पर कोई रोक नहीं लगी है। केवल मौसम की चेतावनी के मद्देनजर यात्रा रोकी गई थी जो कि धीरे-धीरे बहाल की जा रही है। आपको बता दें कि अब तक चारों धामों की यात्रा के लिए एक लाख 91 हजार 48 तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं।
बदरीनाथ - पहले से रुके हुए तीर्थयात्री ही दर्शन को पहुंचे। नए यात्री नहीं पहुंच पाए।
केदारनाथ - पहले से रुके हुए तीर्थयात्री ही मंदिर दर्शन को पहुंचे।
गंगोत्री - कोई यात्री नहीं पहुंच पाया।
यमुनोत्री - 2381 तीर्थयात्री दर्शन को पहुंचे।
बदरीनाथ हाईवे कहीं खुला कहीं बंद
चमोली जनपद में दो दिनों से लगातार हो रही बारिश मंगलवार दोपहर थम गई है। बारिश का दौर थमने से जिला प्रशासन के साथ ही जगह-जगह फंसे तीर्थयात्रियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, कई जगह बदरीनाथ हाईवे बाधित होने के कारण तीर्थयात्रियों की आवाजाही अभी शुरू नहीं हो पाई है। बारिश से हेलंग में दो दुकानें और बड़ागांव में तीन गौशालाएं मलबे में दब गईं। वहीं, ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग तक यातायात के लिए खोल दिया गया है। श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच चमधार में मलबे की वजह से राजमार्ग अवरुद्ध था।
इससे गाड-गदेरे भी उफान पर आ गए हैं। घाट विकास खंड में नंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों में दहशत रही। अलकनंदा और पिंडर नदी का जल स्तर भी बढ़ गया था, लेकिन दोपहर बाद बारिश थमने से नदियों का जलस्तर भी कम हो गया। मंगलवार को सुबह छह बजे भारी बारिश के दौरान बदरीनाथ हाईवे पर हेलंग में पहाड़ी से बरसाती पानी के साथ आया मलबा दुकानों में घुस गया। यहां दो दुकानें मलबे में दब गई हैं। दुकान स्वामी किसी तरह दुकान का सामान सुरक्षित स्थानों पर ले गए। सड़क किनारे खड़ा बीआरओ का ट्रक और एक अन्य वाहन भी मलबे और पत्थरों की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गए।
इधर, जोशीमठ की ग्राम पंचायत बड़ागांव के खरोड़ी तोक में मंगलवार सुबह छह बजे भारी बारिश के कारण तीन गोशालाएं मलबे में दब गईं। इस दौरान विनोद सिंह के बैल ने दम तोड़ दिया और एक गाय घायल हो गई। बारिश से नत्था सिंह और अब्बल सिंह की गोशाला भी टूट गई है। बारिश से जनपद में 48 संपर्क मोटर मार्ग बाधित हैं। जबकि बदरीनाथ हाईवे, जोशीमठ-मलारी हाईवे और कर्णप्रयाग-ग्वालदम हाईवे भी बंद पड़ा है। हाईवे को सुचारु करने के लिए जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। बदरीनाथ हाईवे जोशीमठ से कंचनगंगा तक तीन जगहों पर अवरुद्ध है। जबकि गौचर से जोशीमठ तक हाईवे को सुचारु कर दिया गया है। जोशीमठ से लामबगड़ तक हाईवे को खोलने का काम जारी है।
तीर्थयात्री करते रहे हाईवे खुलने का इंतजार
मंगलवार अपराह्न तीन बजे बारिश का दौर थमा, लेकिन बदरीनाथ हाईवे के न खुलने से तीर्थयात्री परेशान रहे। जोशीमठ में लगभग 400, गोविंदघाट में 300 और बदरीनाथ धाम में करीब 2500 तीर्थयात्री हाईवे खुलने का इंतजार कर रहे हैं। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने बताया कि गौचर से जोशीमठ तक बदरीनाथ हाईवे को सुचारू कर दिया गया है, लेकिन हाथी पर्वत से लामबगड़ तक कई जगहों पर हाईवे अवरुद्ध है। हाईवे खुलने पर आवाजाही शुरू करा दी जाएगी।
तीर्थयात्रियों को बांटी चाय, पानी
नगर पंचायत पीपलकोटी और ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य में जुटी एनकेजी कंपनी प्रबंधन ने बिरही से लेकर पीपलकोटी तक जगह-जगह रुके तीर्थयात्रियों के लिए चाय और पानी की व्यवस्था की। नगर पंचायत अध्यक्ष रमेश बंडवाल और अधिशासी अधिकारी बीना नेगी ने बताया कि नगर पंचायत की ओर से तीर्थयात्रियों के लिए गडोरा व पीपलकोटी में नाश्ते की व्यवस्था भी की गई। उन्होंने बताया कि बदरीनाथ धाम जा रहे तीर्थयात्रियों के लिए रात्रि भोजन की व्यवस्था भी की गई।
सोनप्रयाग, गौरीकुंड से 258 यात्री केदारनाथ रवाना
मौसम में मंगलवार को सुधार के बीच प्रशासन ने सूक्ष्म स्तर पर केदारनाथ यात्रा का संचालन दोबारा शुरू किया। इस दौरान गौरीकुंड व सोनप्रयाग से 258 यात्रियों को धाम के लिए रवाना किया गया। वहीं, धाम से भी सैकड़ों यात्री दर्शन कर लौट आए हैं। सुबह 9 बजे से मौसम में सुधार होने पर सोनप्रयाग व गौरीकुंड में पुलिस व प्रशासन ने यात्रियों के आग्रह पर उन्हें धाम जाने की अनुमति दी। पहले जत्थे में 258 यात्रियों को केदारनाथ भेजा गया। दोपहर बाद 1 बजे ये सभी यात्री चीरबासा, जंगलचट्टी तक पहुंच गए थे। इसके बाद मौसम में बदलाव के चलते सोनप्रयाग व गौरीकुंड से अन्य यात्रियों को नहीं भेजा गया। डीएम मनुज गोयल ने बताया कि मौसम में सुधार होने पर सीमित संख्या में यात्री धाम भेजे गए हैं। केदारनाथ से भी अधिकांश यात्री लौट आए हैं।
18 हजार यात्रियों को पहाड़ों में मौसम साफ होने का इंतजार
चारधाम यात्रा के लिए हरिद्वार में ठहरे 18 हजार यात्रियों को पहाड़ों में मौसम साफ होने का इंतजार है। यात्री हरिद्वार के होटलों और धर्मशालाओं में ठहरे हैं। जबकि दस हजार यात्री मंगलवार को वापस हो गए हैं। यात्रियों को होटल और धर्मशालाओं में ठहरने के लिए बीस फीसदी तक छूट दी गई है। हरिद्वार चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार है। ट्रेवल एजेंसियों में एडवांस बुकिंग करवाने वाले हजारों यात्री शनिवार शाम को हरिद्वार पहुंच गए थे। मौसम विभाग के पूर्वानुमान से रविवार से बारिश शुरू हो गई। लगातार बारिश से चारधाम यात्रा के कई मार्गों पर मलबा आ गया। यात्रियों को यात्रा पर नहीं जाने की सलाह दी गई। हरिद्वार से निकलने वाले यात्री मौसम खराब होने से यहीं रुक गए। जिला पर्यटन अधिकारी सीमा नौटियाल के मुताबिक सोमवार को हरिद्वार में 28 हजार यात्री ठहरे थे। मंगलवार को 10 हजार यात्री वापस हो गए। 18 हजार यात्रियों को अभी भी मौसम खुलने का इंतजार है। मंगलवार को हरिद्वार में बारिश नहीं हुई। लेकिन पहाड़ों में बारिश के आसार बने हैं। धूप खिलने पर भी अब पहाड़ों के दरकने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में बुधवार सुबह तक कई यात्री वापस हो जाएंगे। हरिद्वार में फंसे यात्री ऋषिकेश और मसूरी के लिए रवाना होने लगे हैं। हरकी पैड़ी का जलस्तर कम होने से यात्री ऋषिकेश जा रहे हैं। 21 अक्तूबर तक यात्रियों के लिए होटल और धर्मशालाओं में बीस फीसदी तक छूट है।
यात्रियों को न हो कोई परेशानी : डीएम
जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय ने पर्वतीय इलाकों में बारिश से हरिद्वार में बाढ़ की आशंका और हरिद्वार में ठहरे यात्रियों की सुविधाओं को लेकर बैठक की। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विभागों के अधिकारी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहेंगे। इसके लिए आपसी समन्वय जरूरी है। जिला पर्यटन अधिकारी सीमा नौटियाल से हरिद्वार में फंसे चारधाम यात्रियों की जानकारी ली। कहा कि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न होने दी जाए
गौचर में हाईवे के 40 मीटर हिस्से में हो रहा भू-धंसाव
गौचर में लगातार हो रहे भू-धंसाव से बदरीनाथ हाईवे की हालत बेहद खराब हो गई है। इससे ऑलवेदर रोड परियोजना काम भी प्रभावित हो गया है। यहां जाम की स्थिति को देखते हुए एक-एक कर वाहनों की आवाजाही कराई जा रही है। गौचर में सेना छावनी के समीप बदरीनाथ हाईवे पर करीब पांच सालों से भू-धंसाव हो रहा है। भारी बारिश से भू-धंसाव और तेज हो गया है। हाईवे का करीब 40 मीटर हिस्सा इसकी चपेट में आ गया है। यहां पर वाहनों की आवाजाही मुश्किल से हो पा रही है। हाईवे पर पहाड़ और नदी की तरफ से जमीन धंस रही है। एनएच की ओर से यहां मिट्टी का भरान किया गया। इसके बावजूद भू-धंसाव नहीं रुक रहा है। ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत यहां मोटर पुल का निर्माण भी किया गया। पेट्रोल पंप से पुल तक हाईवे जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। जिससे यहां ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य भी नहीं हो पा रहा है।
रुद्रनाथ ट्रेक पर फंसे तीर्थयात्रियों को वन कर्मियों ने किया रेस्क्यू
भारी बारिश के कारण चतुर्थ केदार रुद्रनाथ ट्रेक पर फंसे दस तीर्थयात्रियों को केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के कर्मियों ने रेस्क्यू कर सकुशल सड़क तक पहुंचाया। सोमवार को भारी बारिश के कारण रुद्रनाथ ट्रेक पर कलचांथ नाला उफान पर आ गया, जिससे तीर्थयात्री ट्रेक के दूसरे छोर तक नहीं पहुंच सके। ट्रेक पर तीर्थयात्रियों के फंसे होने की सूचना स्थानीय लोगों ने वन विभाग को दी तो देर शाम वन आरक्षी चंद्रमोहन रावत, धीरज और संदीप मौके पर पहुंचे। उन्होंने रेस्क्यू कर तीर्थयात्रियों को सकुशल सगर गांव तक पहुंचाया। यहां से तीर्थयात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। मंगलवार को मौलीखर्क और ल्वींठीखर्क में फंसे 10 यात्रियों को भी वन विभाग की टीम ने करीब आठ किलोमीटर पैदल रेस्क्यू कर सड़क तक पहुंचाया। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि सभी तीर्थयात्रियों को सकुशल रेस्क्यू कर गंतव्य तक भेज दिया है।
जोज में चार मकान क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों ने छोड़े मकान
तपोवन क्षेत्र में ग्राम पंचायत करछों के जोज तोक में चार मकान क्षतिग्रस्त हो गए। अनहोनी की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने मकान छोड़कर प्राथमिक विद्यालय जोन और अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। जोज तोक में 13 परिवार रहते हैं। दो दिनों तक लगातार हुई भारी बारिश के कारण गांव भू-धंसाव की चपेट में आ गया है। ऐसे में नरेंद्र सिंह रावत, देव सिंह, नत्थी देवी और तेज सिंह के मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि अन्य मकानों में भी दरारें आ गई हैं। ग्रामीणों के मकानों के आंगन भी धंस गए हैं। प्रभावित ग्रामीणों ने जोशीमठ तहसील प्रशासन से शीघ्र गांव का निरीक्षण करने की मांग की। चेता देवी, कुंती देवी, हरकी देवी, नत्थी देवी और हेमा देवी ने बताया कि उनके मकानों को भी भू-धंसाव से खतरा बना है। बारिश होने पर ग्रामीण घरों में रहने से भी डर रहे हैं। उन्होंने सभी 13 परिवारों के पुनर्वास की मांग उठाई।
गौचर हवाई पट्टी पर तैनात रहा वायुसेना का हेलीकॉप्टर
मौसम के अलर्ट को देखते हुए राहत और बचाव कार्यों की जरूरत के लिए मंगलवार को वायुसेना का हेलीकॉप्टर गौचर हवाई पट्टी पर तैनात रहा। हालांकि जिले में कोई आकस्मिक घटना न होने से दोपहर बाद हंलीकॉप्टर ने वापसी के लिए उड़ान भरी। पिछले दो दिनों से जारी अतिवृष्टि के कारण शासन स्तर से सतर्कता के सभी इंतजाम किए गए। प्रशासन, आपदा प्रबंधन तंत्र, एसडीआरएफ और सेना को भी अलर्ट मोड पर रखा गया इसी के तहत सहारनपुर के सरसावा एयरपोर्ट से वायुसेना के हेलीकॉप्टर को यहां तैनात किया गया था। राजस्व उप निरीक्षक जगदीश चंद्र औलिया ने बताया कि जिले में कोई आकस्मिक घटना न होने पर मंगलवार दोपहर बाद हेलीकॉप्टर सरसावा के लिए लौट गया।