बर्फबारी, ओलावृष्टि और बारिश से उत्तराखंड में गिरा पारा, धनौल्टी में हुआ सीजन का पहला हिमपात
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लगातार तीसरे दिन आज यानी गुरुवार को भी उत्तराखंड में मौसम खराब बना हुआ है। यहां बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि के कारण कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। चारधाम की वादियां बर्फ के आगोश में हैं। औली में भी भारी बर्फबारी हो रही है।
मौसम में आए इस बदलाव के कारण उत्तराखंड के सभी इलाके ठंड की चपेट में आ गए हैं। राजधानी देहरादून में आज तड़के से बारिश जारी है। लोगों को सर्दी से बचने के लिए अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। भारी बर्फबारी की वजह से गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध हो गया है। यमुनोत्री मार्ग सुचारू है। वहीं आज धनौल्टी में भी इस सीजन की पहली बर्फबारी हुई है।
केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब बर्फ से ढक गए हैं। वहीं पर्यटक नगरी मसूरी में बारिश होने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। नैनीताल में बारिश और ओलावृष्टि ने ठंड बढ़ा दी है। पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में भी भारी बर्फबारी होने की खबर है।
कर्णप्रयाग, गौचर, आदिबदरी, गैरसैंण, नारायणबगड़, थराली, देवाल में बुधवार रात 8.30 से लगातार बारिश जारी रहने से ठंड़ बढ़ गई है। वेदनी बुग्याल सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात हो रहा है। बारिश से बाजारों में भीड़भाड़ कम है।
किसानों के लिए वरदान साबित होगी यह बारिश
आज सुबह से घिरे मेघों ने लगभग एक घंटे बरसकर किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी है। इस बारिश ने जहां रबी, दलहन, तिलहन व सब्जियों की फसलों के लिए संजीवनी का काम किया है। वहीं फसल बोने के लिए तैयार किए जा रहे खेतों में आवश्यक नमी लाकर किसानों को सिंचाई में होने वाले खर्च से बचा लिया है।
जीबी पंत विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय वर्मा एवं मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि इस समय लगभग सभी फसलें कट चुकी हैं, तथा जो फसलें खेत में बोई जा चुकी हैं उनके लिए आज की बारिश लाभदायक है। यह बारिश मानसून आधारित पर्वतीय खेती के लिए भी लाभदायक है।
चार जिलों में आज भी भारी बर्फबारी का अलर्ट
मौसम विभाग ने आज भी प्रदेश के चार जिलों में भारी बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा देहरादून सहित पांच जिलों में ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है। बुधवार को दिनभर प्रदेशभर में बादल छाए रहे। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई तो दून में दिनभर ठंडी हवाओं ने पारा गिरा दिया।
मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि आज प्रदेश के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बर्फबारी का अलर्ट जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि देहरादून, नैनीताल, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार जिले में ओले पड़ सकते हैं। इसके अलावा अनेक स्थानों पर हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि की वजह से तापमान में और गिरावट आ सकती है।
चारों धामों में बिछी बर्फ की चादर
इससे पहले पहाड़ में बुधवार को भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। चारों धामों में बर्फ की चादर बिछ गई। अब तक केदारनाथ में करीब पांच फीट बर्फ जम चुकी है। अधिकतम तापमान माइनस 5 और न्यूनतम माइनस 9 डिग्री सेल्सियस रहा।
केदारनाथ में मंदिर परिसर समेत समूची केदारपुरी में पांच फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है, जबकि वासुकीताल, चौराबाड़ी ताल, दुग्ध गंगा की पहाड़ियां, भैरव मंदिर और गरुड़चट्टी के ऊपरी तरफ तीन से चार फीट तक बर्फ जम चुकी है।
पैदल मार्ग पर भी जंगलचट्टी तक बर्फ गिरी है। बर्फबारी के चलते केदारपुरी में शीतलहर चल रही है। उधर, द्वितीय केदार मद्महेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ समेत हरियाली डांडा, त्रियुगीनारायण, तोषी व गौंडार गांव के ऊपरी तरफ भी बर्फबारी हुई है।
बदरीनाथ में छह फिट तक बर्फ जमी
बदरीनाथ, हेमकुंड सहित अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में पिछले कई दिनों से बर्फबारी सिलसिला जारी है। बदरीनाथ में छह फीट तक बर्फ जम चुकी है। हेमकुंड साहिब में करीब तीन फीट तक बर्फ जम चुकी है। औली में बर्फ की चादर बिछ गई। जमकर हुई बर्फबारी के बाद जोशीमठ और आसपास के क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
गोपेश्वर के सामने चोपता घाटी की चोटियां भी बर्फ से सफेद हो चुकी थी। जोशीमठ सहित अन्य निचले इलाकों में सुबह से रुक रुककर बारिश होती रही। रुद्रनाथ, नीती व माणा घाटी, निजमुला घाटी सहित घाट व अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में भी जमकर बर्फबारी हुई है।
गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध, यमुनोत्री मार्ग सुचारू
भारी बर्फबारी की वजह से गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध हो गया है। यमुनोत्री मार्ग सुचारू है। गंगोत्री हाईवे हर्षिल और थराली से बंद पड़ा हुआ है। बड़कोट में यमुनोत्री सहित आसपास के करीबन आधा दर्जन गांवों में आज सुबह से बर्फबारी जारी है। वहीं निचले इलाकों में रिमझिम बारिश हो रही है।
गंगोत्री व यमुनोत्री धाम सहित जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बुधवार को भी जमकर बर्फबारी हुई। जिला मुख्यालय के साथ ही चिन्यालीसौड़, बड़कोट, नौगांव, पुरोला आदि निचली घाटियों में रुक-रुक कर रिमझिम बारिश होने से तापमान में जबर्दस्त गिरावट आ गई है।
बुधवार तड़के खरसाली गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में सीजन का पहला हिमपात हुआ है, जबकि यमुनोत्री धाम क्षेत्र में लगातार बर्फबारी के चलते यहां आधा फीट से अधिक बर्फ की चादर बिछ गई है। गंगोत्री धाम के साथ ही मुखबा, हर्षिल, बगोरी, सुक्की आदि गांवों में मंगलवार देर रात से ही बर्फबारी हो रही है, जिसके साथ ही तापमान शून्य से नीचे पहुंचने के कारण हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है।
जौनसार बावर की ऊंची चोटियों पर हुआ सीजन का पहला हिमपात
मौसम की बदली करवट के बीच जौनसार बावर की ऊंची चोटियों पर सीजन का पहला हिमपात हुआ। जिसके चलते ऊंची चोटियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है।
लोखंडी क्षेत्र में भी हल्की बर्फबारी हुई हालांकि, यह बर्फ कुछ ही समय में पिघल गई। दूर से ही बर्फ से लकदक ये चोटियां पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही हैं। वहीं बर्फबारी के चलते पूरा इलाका शीतलहर की चपेट में आ गया है। बुधवार को विकासनगर का अधिकतम तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम 12 डिग्री रहा। चकराता का अधिकतम तापमान 10 डिग्री और न्यूनतम 03 डिग्री रहा।
बुधवार को मौसम की बदली करवट के बीच देववन, खडंबा, व्यास शिखर और मोयला टॉप की ऊंची चोटियों पर मौसम का पहला हिमपात हुआ। बुधवार सुबह लोग सोकर उठे तो आसमान में काले बादल छाए हुए थे। कुछ देर बाद क्षेत्र में बारिश का दौर शुरू हो गया। बारिश थमने के बाद पहाड़ों पर छाए बादल छटे तो ऊंची चोटियां बर्फ से लकदक नजर आने लगी।
मुनस्यारी की ऊंची चोटियों में तीसरी बार हिमपात
उच्च हिमालयी क्षेत्र की चोटियों में बुधवार को सीजन का तीसरा हिमपात हुआ है। चोटियों पर बुधवार तड़के से ही हिमपात होने और निचले इलाकों में हल्की बूंदाबांदी होने से क्षेत्र में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है।
पंचाचूली, हंसलिंग, राजरंभा और छिपलाकेदार की चोटियों पर बुधवार तड़के से ही हिमपात शुरू हो गया था, जो दिनभर जारी रहा। निचले इलाकों में दोपहर में हल्की बूंदाबांदी के बाद क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। सुबह के समय पाला पड़ने से ठंड में और इजाफा हो रहा है।
लोगों ने खुद को ठंड से बचाने के लिए आग का सहारा लिया। इधर, जिला मुख्यालय में भी सुबह के समय आसमान बादलों से ढका रहा। हालांकि दोपहर में गुनगुनी धूप खिलने से लोगों ने राहत की सांस ली। बारिश नहीं होने से किसान मायूस हैं।