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उत्तराखंड: रविवार को मौसम साफ, बछेलीखाल के पास आठ घंटे बंद रहा ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे

Sun, 22 Aug 2021 08:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 22 Aug 2021 08:33 PM IST
सार

ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे बछेलीखाल के पास रविवार को करीब आठ घंटे बंद रहा। रात 3 बजे चट्टान टूटने से मार्ग के करीब 50 मीटर भाग पर भारी मलबा और बोल्डर गिर गए।

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Uttarakhand Weather Forecast Update Today: weather is clear, chardham yatra route open
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रविवार को फिलहाल मौसम साफ बना हुआ है। दून सहित लगभग सभी इलाकों में सुबह से ही चटख धूप खिली हुई है। चारधाम यात्रा मार्ग भी सुचारू हैं। 

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ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे बछेलीखाल के पास रविवार को करीब आठ घंटे बंद रहा। रात 3 बजे चट्टान टूटने से मार्ग के करीब 50 मीटर भाग पर भारी मलबा और बोल्डर गिर गए। इस कारण मार्ग पर वाहनों और राहगीरों की आवाजाही ठप हो गई। इस दौरान दूध, अखबार व सब्जी आदि आवश्यक सेवाओं के वाहन भी करीब आठ घंटे तक फंसे रहे।

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इस दौरान विभाग की ओर से मार्ग से मलबा हटाने के लिए दोनों ओर से मशीनें लगाई गईं। करीब 11 बजे मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया। 

चीन सीमा से नौवें दिन भी कटा रहा संपर्क

भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी हाईवे नौवें दिन भी बंद रहा। हाईवे के भूस्खलन जोन में लगातार मलबा गिर रहा है। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दो दिन के भीतर क्षेत्र में बिजली, राशन और स्वास्थ्य सेवा सहित अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं कराने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। 

जोशीमठ-मलारी हाईवे 14 अगस्त की शाम को सुराईथोटा और तमक के बीच भारी भूस्खलन होने से बंद हो गया था। तब से हाईवे को खोला नहीं जा सका है। जिससे सेना, आईटीबीपी और क्षेत्रीय लोगों की आवाजाही ठप पड़ी हुई है। वहीं एसडीआरएफ का हेलीकॉप्टर भी मलारी क्षेत्र के लिए उड़ान नहीं भर पाया। 

वहीं, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी के नेतृत्व में जोशीमठ के लोगों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने दो दिन में सीमांत क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा, रसद सप्लाई, बिजली और संचार सेवा शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इस दौरान कोषा के ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह रावत, भलगांव के प्रधान लक्ष्मण सिंह बुटोला, सोबन सिंह राणा, नारायण सिंह, प्रेम सिंह, नरेंद्र सिंह, हयात सिंह, मान सिंह आदि मौजूद थे। 

मलारी हाईवे बंद होने से सीमांत क्षेत्र के लोगों ने अब धौली गंगा के किनारे से आवाजाही शुरू कर दी है। पहाड़ी से गिरते पत्थरों के बीच लोग जोखिम उठाकर नदी किनारे से आवाजाही कर रहे हैं। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) ने भूस्खलन क्षेत्र के ऊपरी भाग पर चट्टान को विस्फोट से उड़ाने की योजना बनाई थी। लेकिन बीआरओ के विशेषज्ञों ने इसे खारिज कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि विस्फोट के बाद मलबे से धौली गंगा का प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। 

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