उत्तराखंड मौसम अपडेट : चार दिनों तक पहाड़ी इलाकों में बारिश-बर्फबारी के आसार, यमुनोत्री हाईवे खुला
मौसम विभाग ने पर्वतीय इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ ओले पड़ने की संभावना जताई है। उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों पर हल्की बर्फबारी की भविष्यवाणी भी की है।
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उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी का सिलसिला छह जून तक बना रहेगा। बुधवार को राजधानी देहरादून समेत कई स्थानों पर तेज अंधड़ के साथ फुहारें पड़ीं। यमुनोत्री हाईवे खरादी के पास मलबा-बोल्डर आने से बुधवार देर रात से बंद था। जिसके बाद गुरुवार की सुबह मलबा हटाकर मार्ग खोल दिया गया।
बदरीनाथ हाईवे: पहाड़ी से लगातार मलबे के साथ गिर रहे पत्थर, केवल ढाई मीटर चौड़ी बची सड़क, रास्ता बंद, तस्वीरें...
भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने तीन से छह जून के बीच मौसम का मिजाज एक जैसा बने रहने की भविष्यवाणी की है। मौसम विभाग ने पर्वतीय इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ ओले पड़ने की संभावना जताई है।
उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों पर हल्की बर्फबारी की भविष्यवाणी भी की गई है। मैदानी क्षेत्रों मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहेगा। उधर, कृषि पंडितों का मानना है कि इस वक्त की बारिश और बर्फबारी फसलों के लिए काफी लाभदायक है। खरीफ की फसलों के लिए इस बारिश को अमृततुल्य बताया गया है।
ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग हल्के वाहनों के लिए खोल दिया
नरकोटा गांव के पास ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को बुधवार शाम 5 बजे हल्के वाहनों के लिए खोल दिया, लेकिन अब भी हालात नाजुक हैं। समस्या के पूर्ण निदान के लिए एनएच व कार्यदायी संस्था अब तक ठोस कार्ययोजना नहीं बना पाई है।
जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से आठ किमी दूर नरकोटा के पास पहाड़ी से बुधवार को लगातार भूस्खलन होता रहा। जिस कारण एनएच व कार्यदायी संस्था को टनों मलबा साफ करने में दिक्कत होती रही। अपराह्न तीन बजे से पहाड़ी से पत्थर व मलबा गिरना बंद होने के बाद एनएच व कार्यदायी संस्था ने दो तरफा पोकलैंड व जेसीबी से मलबा सफाई का कार्य तेजी से किया।
दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शाम 5 बजे हाईवे पर छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। बड़े वाहनों के लिए के संचालन में अब भी दो से तीन दिन का समय लग सकता है। गौरतलब है कि रविवार रात पहाड़ी से गिरे मलबे और पत्थरों से हाईवे का 40 मीटर हिस्सा ढह गया था। यहां पर सड़क की चौड़ाई बमुश्किल दो मीटर रह गई है।
...तो इस साल भी जलभराव की समस्या से जूझेंगे दूनवासी
राजधानी के दर्जनभर इलाकों में रहने वाले लोग पिछले साल की तरह इस साल भी मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से जूझ सकते हैं। कारण यह कि सिंचाई विभाग और नगर निगम प्रशासन की ओर से इन इलाकों में नए नालों का निर्माण नहीं कराया गया है और न ही अब तक पुराने नालों की सफाई कराई गई है।
पिछले साल किशन नगर समेत दर्जनभर इलाकों में जलभराव से काफी नुकसान हुआ था। तब निर्णय लिया गया था कि इन इलाकों में नए नालों की निर्माण करने के साथ ही पुराने नालों की सफाई कराई जाएगी। साथ ही छोटी बिंदाल जैसी नदियों को भी साफ किया जाएगा, लेकिन सिंचाई विभाग और नगर निगम के अधिकारी नालों का निर्माण करने की बात तो छोड़ें, पुराने नालों की सफाई तक नहीं करा पाए हैं।
ऐसे में यमुना कॉलोनी, खुदबुड़ा मोहल्ला, गोविंदगढ़, इंदिरा कॉलोनी, चुक्खुवाला, किशनगढ़ समेत दो दर्जन से अधिक इलाकों में इस साल भी जलभराव की समस्या होना तय है। पिछले साल जलभराव की समस्या झेल चुके लोगों को मानसून आने से पहले ही चिंता सताने लगी है।
जिलाधिकारी की बैठक में भी उठा था मुद्दा
पिछले दिनों जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव की मौजूदगी में हुई बैठक में मानसून के दौरान जलभराव से होने वाले नुकसान का मुद्दा उठा था। इस पर जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग और नगर निगम अधिकारियों को हिदायत दी थी कि मानसून आने से पहले ही नालों के साथ ही छोटी बिंदाल जैसी नदियों को सफाई करा ली जाए, लेकिन इस दिशा में दोनों विभागों की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।
सिंचाई विभाग ने नगर निगम को लिखा पत्र
छोटी बिंदाल जैसी नदियों में जमा कूड़ा मानसून से पहले निकालने को लेकर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश लांबा ने नगर निगम को पत्र लिखा है। इसमें इस बात का अनुरोध किया गया है कि नदियों में बड़े पैमाने पर कूड़ा करकट जमा है, जो मानसून के दौरान न सिर्फ जल बहाव में बाधा बनेगा, वरन जलभराव के लिए भी जिम्मेदार होगा।
मानसून से पहले नालों की सफाई का प्रयास किया जा रहा है। छोटी बिंदाल जैसी नदियों की सफाई को लेकर नगर निगम को पत्र लिखा गया है। कुछ नए नालों का भी निर्माण कराया जा रहा है। प्रयास है कि मानसून आने से पहले नालों की सफाई कर ली जाए। हालांकि, बजट की कमी के चलते भी कुछ दिक्कतें आ रही हैं। इस संबंध में आला अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
- राजेश लांबा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग अवस्थापना खंड