उत्तराखंड: ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे का 40 मीटर हिस्सा ध्वस्त, रुद्रप्रयाग और चमोली में जरूरी चीजों की आपूर्ति ठप
ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पहाड़ी से हुए भारी भूस्खलन के कारण दिनभर बंद रहा। सड़क का 40 मीटर हिस्सा भी पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।
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ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे बंद होने से रुद्रप्रयाग व चमोली जिले में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई भी ठप रही। साथ ही नौकरीपेशा लोग भी कार्यालयों तक नहीं पहुंच पाए, जिस कारण उन्हें आधे रास्ते से अपने घरों को लौटना पड़ा। एनएच द्वारा मलबा सफाई कार्य दिनभर चलता रहा है।
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जिला मुख्यालय से लगभग आठ किमी दूर रविवार रात्रि को हुई मूसलाधार बारिश के बाद पहाड़ी से लगे दो सौ मीटर क्षेत्र में हुए भारी भूस्खलन के कारण बंद हो गया था। समस्या के चलते हाईवे पर दो तरफा यातायात बंद हो गया था। ऑल वेदर रोड़ परियोजना में निर्माणाधीन होने के कारण इस क्षेत्र में हाईवे पहले से संवेदनशील बना है। लगभग एक सौ मीटर हिस्से में पहाड़ी से भारी मलबा व बोल्डर हाईवे पर गिरे हुए हैं।
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भारी मलबे से 40 मीटर में पुश्ते ध्वस्त हो गए हैं। सोमवार सुबह से 6 बजे से एनएच व ऑलवेदर रोड परियोजना में कार्य कर रही कार्यदायी संस्था द्वारा मलबा सफाई का कार्य शुरू किया गया, लेकिन देर शाम तक हाईवे पर यातायात बहाल नहीं हो पाया है। दूसरी तरफ हाईवे के अवरुद्ध होने से रुद्रप्रयाग व चमोली जिले में आवश्यक सेवाओं की पूर्ति भी ठप हो गई है। ऐसे में बाजारों में अखबार, दूध, ब्रेड, सब्जी की सप्लाई नहीं होने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। साथ ही नौकरीपेशा लोग अपने कार्यालयों तक नहीं पहुंच पाए। वहीं, चमोली से श्रीनगर, देहरादून जाने वाले लोग भी घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन सड़ककी स्थिति देखते हुए उन्हें मजबूरन लौटना पड़ा।
खांकरा से दो किमी आगे सम्राट होटल के समीप हाईवे भूस्खलन हुआ है। जिस कारण सड़क का 40 मीटर हिस्सा भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। मलबा सफाई के बाद ध्वस्त हुए क्षेत्र में ऊपरी तरफ नई कटिंग कर सड़क बनाकर वाहनों की आवाजाही कराई जाएगी। उन्होंने मंगलवार सुबह तक यातायात सुचारु होने की उम्मीद जताई है।
- ईई बलराम मिश्रा, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड लोनिवि
ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद, किसानों ने चलाया ट्रैक्टर
पर्वतीय क्षेत्रों के किसान कोरोना महामारी के साथ ओलावृष्टि और बारिश की मार झेलने को मजबूर हैं। ओलावृष्टि और बारिश से फसलों के बर्बाद होने से किसानों को अब रोजीरोटी की चिंता सताने लगी है।
भीमताल ब्लॉक की ग्राम पंचायत अलचौना सब्जी के उत्पादन के लिए जानी जाती है। ओलावृष्टि से परेशान अलचौना के किसान खेतों में लगी टमाटर और शिमला मिर्च के बर्बाद होने से अब उन फसलों में ट्रैक्टर चलाकर मक्का, चरी और बाजरा बोने को मजबूर हैं।
प्रगतिशील किसान आनंदमणि भट्ट ने बताया कि इस साल कोरोना के चलते किसान पहले ही परेशान थे, लेकिन बीते दिनों हुई ओलावृष्टि और बारिश से खेतों में लगे शिमला मिर्च और टमाटर के पौधे नष्ट हो गए। इसके चलते किसान बेहद परेशान हैं और मजबूर होकर उन्हें खराब फसलों में ट्रैक्टर चलाकर मक्का, चरी और बाजरा बोने को मजबूर होना पड़ रहा है।
भट्ट ने बताया कि किसानों को आजीविका और रोजी रोटी की चिंता सता रही है। उन्होंने बताया कि 95 प्रतिशत फसलें बर्बाद हो गई है। क्षेत्र के किसान शिवराज सिंह अलचौनी, ललित कुमार, जर्नादन भट्ट, चंद्र बल्लभ, अंबा दत्त तिवारी, गिरीश उप्रेती, गिरीश तिवारी, गोपाल तिवारी, मोहन जोशी, राकेश शर्मा, शिवदत्त भट्ट, हरीनंदन भट्ट ने सर्व कराकर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग जिला उद्यान अधिकारी से की है।