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उत्तराखंड : भारत-चीन सीमा में ग्लेशियर टूटा, 384 को बचाया, 10 की मौत, सेना ने अपने दो हेलीकॉप्टर लगाए 

Sat, 24 Apr 2021 08:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 24 Apr 2021 08:47 PM IST
सार

 मुख्यमंत्री ने आपदा ग्रस्त क्षेत्र का हवाई निरीक्षण किया। इस दौरान बताया गया कि आपदा ग्रस्त क्षेत्र में जगह-जगह भारी मात्रा में बर्फ है।

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Uttarakhand Weather Forecast Today News: four feet snow on badrinath and glacier broke in china border
नीति घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के चमोली जनपद से लगे भारत-चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र सुमना में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कैंप के समीप ग्लेशियर टूटकर मलारी-सुमना सड़क पर आ गया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कमांडर कर्नल मनीष कपिल ने इसकी पुष्टि की है।

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उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत ने कहा है कि नीति घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की घटना का गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत संज्ञान लिया है और मदद का आश्वासन दिया है तथा साथ ही आईटीबीपी को सतर्क रहने का आदेश दिया है। 
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मुख्यमंत्री आज शनिवार की सुबह आपदा ग्रस्त इलाके का मुआयना करने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने आपदा ग्रस्त क्षेत्र का हवाई निरीक्षण किया। इस दौरान बताया गया कि आपदा ग्रस्त क्षेत्र में जगह-जगह भारी मात्रा में बर्फ है। बीआरओ सड़क खोलने में जुटा है। मुख्यमंत्री की सेना के अधिकारियों के साथ बैठक की।



सेना के अधिकारियों से बातचीत के बाद मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि नीति के पास आई इस आपदा में शुक्रवार रात से ही सेना राहत बचाव कार्य में लगी है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी के जवान और जिला प्रशासन की टीम भी युद्ध स्तर पर जुटी हुई है। सेना से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक हिमस्खलन से बीआरओ के 10 मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि 7 मजदूर घायल हुए हैं।

अभी भी 8 मजदूर लापता बताए जा रहे हैं। घायलों को इलाज के लिए जोशीमठ में सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि 384 मजदूर सुरक्षित हैं। 

सेना ने अपने दो हेलीकॉप्टर लगाए 

आपदा प्रभावित सुमना से घायलों को सेना के हेलीकॉप्टर से जोशीमठ लाया गया, यहां से घायलों को सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सेना के ब्रिगेडियर कृशानु शाह ने बताया कि सेना ने अपने दो हेलीकॉप्टर आपदा प्रभावित क्षेत्र में लगाए हैं। जोशीमठ-मलारी हाईवे पर भारी बर्फ जमा होने के कारण हेलीकॉप्टर से ही जरुरी सामग्री लाने व ले जाने की सुविधा दी गई है।

 सेना अस्पताल में घायलों का उपचार 

बीआरओ के जो सात मजदूर घायल हुए हैं, उनमें रायबोंडाला (30), अनुज कुमार (18), फिलिप (21), कल्याण (40), मंगलदास (33), संजय (25) और महिंद्र मुंडा (41) शामिल हैं। सभी घायलों का जोशीमठ में सेना अस्पताल में इलाज भी शुरू कर दिया गया है।

इस आपदा से संबंधित जानकारी के लिए चमोली जिला प्रशासन ने हेल्प नंबर जारी किए हैं। जिला सूचना अधिकारी रविंद्र सिंह नेगी ने बताया कि दूरभाष नंबर 9068187120, 7579004644, 7055753124, 7830839443 और टोल फ्री नंबर 01372-251437 नंबर पर हादसे की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 

मजदूरों के लिए हिमदूत बनकर पहुंचे सेना के जवान 

सुमना-2 में बीआरओ के मजदूरों के कैंप के ऊपर हुए हिमस्खलन के बाद बच निकलने की उम्मीद छोड़ चुके बीआरओ के मजदूरों के सामने सेना के जवान हिमदूत बनकर पहुंचे। उन्होंने रात में ही हाथों में मशाल लेकर उसके उजाले में रेस्क्यू अभियान चलाया और कई मजदूरों को सुरक्षित निकालकर उन्हें अपने कैंप में शरण दी।

शुक्रवार को बर्फबारी के बीच सुमना क्षेत्र में बीआरओ के मजदूरों के कैंप पर दो बार हिमस्खलन हुआ। सबसे पहले शाम चार बजे हिमस्खलन हुआ, जिससे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। कैंप छोड़कर 48 मजदूर करीब एक किलोमीटर दूर सेना के कैंप में मदद के लिए पहुंचे। सेना के जवान मौके पर पहुंचे, लेकिन तब मौसम खराब होने के चलते रेस्क्यू शुरू नहीं किया जा सका।

इसके बाद फिर शाम छह बजे बीआरओ के दूसरे कैंप के ऊपर भी हिमस्खलन हो गया, जो पहले कैंप से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। मौसम साफ होने पर रात आठ बजे हाथों में मशाल लेकर उसके उजाले में सेना के जवानों ने रेस्क्यू शुरू किया। रात डेढ़ बजे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में 194 मजदूरों को सकुशल निकाल लिया गया। सेना के जवानों ने बचाए गए मजदूरों को अपने कैंपों में शरण दी। शनिवार सुबह सात बजे तक फिर से रेस्क्यू शुरू हुआ। 

वैज्ञानिकों ने जतायी स्नो एवलांच की संभावना

सुमना में बीआरओ के मजदूर सड़क निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। अत्यधिक बर्फबारी होने से सीमा क्षेत्र में वायरलेस टेस भी काम नहीं कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों से नीती घाटी में अत्यधिक बर्फबारी हो रही है। मलारी से आगे जोशीमठ-मलारी हाईवे भी बर्फ से ढक गया है, जिससे सेना और आईटीबीपी के वाहनों की आवाजाही भी बाधित हो गई है।

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ. कालाचाँद सांई का कहना है कि पिछले तीन दिनों से हो रही बर्फबारी से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बर्फ जमा हो गई है, जिसके चलते स्नो एवलांच की पूरी संभावना है। एवलांच की सबसे अधिक संभावना उन पहाड़ियों पर अधिक होती हैं जिनका ढलान बहुत अधिक होता है। 

सीएम ने जारी किया अलर्ट, परियोजनाओं में रात में काम रोकने के निर्देश

सीएम तीरथ सिंह रावत ने घटना का संज्ञान लेकर तत्काल अलर्ट जारी कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वे निरंतर बीआरओ और जिला प्रशासन के संपर्क में हैं।

बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घटना की जल्द पूरी जानकारी पता कर सूचित करें। साथ ही एनटीपीसी और अन्य परियोजनाओं में रात में काम करने पर रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

ग्लेशियर हादसे के मृतकों के प्रति शोक जताया

चमोली से लगे भारत-चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र सुमना में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कैंप के समीप ग्लेशियर टूटने की घटना में मारे गए लोगों के प्रति भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने गहरी संवेदना जताई है। भाजपा अध्यक्ष ने घटना के बाद जिलाधिकारी चमोली और शासन स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता कर स्थिति के बारे में जानकारी ली। 

कौशिक ने कहा कि घटना स्थल अति दुर्गम है और वहां पर बचाव कार्य आसान नहीं। लेकिन आपदा प्रबंधन के उपाय समय पर किए जाने से राहत की खबर है। मुख्यमंत्री भी क्षेत्र का हवाई सर्वे कर चुके हैं। अब तक 391 लोगों को आपदाग्रस्त क्षेत्र से रेस्क्यू कर लिया गया है। आपदा में कुछ लोगों के मरने की दुखद सूचना प्राप्त हुई है।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित लोगों को सरकार द्वारा पूर्ण रूप से सहायता प्रदान की जाएगी। आपदा स्थल में सेना राहत बचाव कार्य में लगी है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी के जवान और जिला प्रशासन की टीम युद्ध स्तर पर जुटी हुई है। उन्होंने जिलाध्यक्ष चमोली को भी किसी भी परिस्थिति में अलर्ट रहने को कहा और प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर सहयोग करने को कहा।

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