उत्तराखंडः प्रदेश के चार महाविद्यालयों में गूंजेगी वेदों की ऋचाएं, स्थापित होंगे वेद केंद्र
- रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, उत्तरकाशी और ऋषिकेश में स्थापित होंगे वेद केंद्र
- उत्तराखंड संस्कृत विवि की पहल पर शासन ने समिति का गठन किया
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रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, उत्तरकाशी और ऋषिकेश में स्थित महाविद्यालयों में अब वेदों की ऋचाएं गूंजेगी। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की पहल पर शासन के संस्कृत शिक्षा अनुभाग ने केदानाथ, बद्रीनाथ, यमनोत्री के पास और ऋषिकेश स्थित संस्कृत महाविद्यालय में वेद केंद्रों की स्थापना करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन वेद केंद्रों पर वेदों की ऋचाओं का गहनता से अध्ययन किया जाएगा।
शासन स्तर पर वेद केंद्रों की स्थापना को लेकर अध्यक्ष सहित सात सदस्यों की एक समिति का गठन कर दिया है। यह समिति केदारनाथ सनातन धर्म उपाधि संस्कृत महाविद्यालय उखीमठ रुद्रप्रयाग, श्री बद्रीनाथ वेद-वेदांग स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय जोशीमठ, श्री विश्वनाथ स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय उत्तरकाशी और दैवी सम्पद् अध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय परमार्थ निकेतन ऋषिकेश में वेद केंद्रों की स्थापना के लिए कार्य योजना तैयार करेंगी।
इस समिति में उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव को अध्यक्ष, शासन के वित्त विभाग के अपर सचिव, शासन के शिक्षा सचिव, शासन के न्याय अपर सचिव, संस्कृत विवि के कुल सचिव, संस्कृत शिक्षा निदेशक को सदस्य और शासन के संस्कृत शिक्षा के अपर सचिव को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इस समिति ने चारों संस्कृत महाविद्यालयों में वेद केंद्रों की स्थापना को लेकर कार्य योजना को तैयारी शुरू कर दी है।
संस्कृत शिक्षा मंत्री ने दिखाई थी रुचि
चारों महाविद्यालयों में वेद केंद्रों की स्थापना को लेकर प्रदेश के संस्कृत शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने भी रुचि दिखाई थी। इसे देखते हुए उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कदम आगे बढ़ाया और इस संबंध में शासन को पत्र जारी किया। वेद केंद्रों की स्थापना में गंभीरता दिखाते हुए शासन के संस्कृत शिक्षा अनुभाग ने जल्द ही सात अधिकारियों की एक समिति का गठन कर दिया।
प्रदेश के चार संस्कृत महाविद्यालयों में वेद केंद्रों की स्थापना को लेकर संस्कृत शिक्षा के प्रभारी सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी का पत्र प्राप्त हुआ है। इस क्रम में वेद केंद्रों की स्थापना को लेकर विवि कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी के नेतृत्व में सुझाव और कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।
- गिरीश कुमार अवस्थी, कुल सचिव, उत्तराखंड संस्कृत विवि