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Uttarakhand: बिजली परियोजनाओं में खर्च, लेबर सेस की गड़बड़ी रोकने को UPCL सख्त, कहा-लापरवाही बर्दाश्त नहीं

Tue, 26 May 2026 02:47 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Tue, 26 May 2026 02:47 PM IST
सार

बिजली परियोजनाओं में खर्च, लेबर सेस की गड़बड़ी रोकने के लिए यूपीसीएल ने सख्त कर दी है। कहा कि खर्चों की बुकिंग, तकनीकी क्लोजर, लेबर सेस खातों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

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Uttarakhand UPCL Tightens Measures to Prevent Irregularities in Expenditure and Labor Cess for Power Projects
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने राज्य में चल रही बिजली परियोजनाओं के खर्चों की बुकिंग, लेबर सेस (श्रम उपकर) के अनुपालन और संपत्तियों के पूंजीकरण में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। यूपीसीएल के निदेशक (वितरण एवं परियोजना) एमआर आर्य ने सभी आहरण-वितरण अधिकारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं।

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यूपीसीएल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि खर्चों की बुकिंग, तकनीकी क्लोजर या लेबर सेस के खातों में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी पाए जाने पर गंभीर ऑडिट आपत्तियां, विनियामक मुद्दे और गलत वित्तीय रिपोर्टिंग जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिसके लिए अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे। जारी पत्र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ईआरपी (सैप) सिस्टम में बनाई जाने वाली परियोजनाओं में लेबर सेस के सही अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं।

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इस महीने 19 मई तक तैयार किए गए आकलनों के लिए बिजली निरीक्षक शुल्क, सड़क कटाई शुल्क, वन मंजूरी शुल्क, आकस्मिक शुल्क और सेंटेज शुल्क की कुल लागत का एक प्रतिशत लेबर सेस के रूप में पोस्ट किया जाएगा। डिपॉजिट कार्यों के मामले में उपरोक्त लागतों के अलावा, यूपीसीएल की ओर से लाए गए (ठेकेदारों का नहीं) सेंट्रलाइज्ड या डिसेंट्रलाइज्ड मैटेरियल पर भी एक प्रतिशत की दर से लेबर सेस लागू होगा।

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लागत में भारी अंतर मिलने पर होगी जांच

यूपीसीएल ने आदेश दिया है कि जिन परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है, उनका अनिवार्य रूप से तकनीकी क्लोजर किया जाए। ईआरपी सिस्टम में संपत्ति का पूरा विवरण जैसे विवरण, मात्रा (संख्या, लंबाई, वजन आदि), मूल्य, मेक और लोकेशन दर्ज करना अनिवार्य होगा क्योंकि यह डेटा उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग को भी भेजा जाना है। इसके साथ ही यदि किसी परियोजना की अनुमानित लागत और वास्तविक खर्च में कोई असामान्य अंतर पाया जाता है, तो उसका विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। हाई टेंशन से जुड़े कार्यों के लिए नियमों को और कड़ा किया गया है।
 

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