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ट्रांसफार्मर घोटालाः तब सच बोलने पर तब नाप दिए थे अफसर

Sun, 02 Apr 2017 06:11 PM IST
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 02 Apr 2017 06:11 PM IST
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छात्रवृत्ति - फोटो : demo pic

आईएमपी कंपनी से ट्रांसफार्मर खरीद पर सवाल उठाने वाले एक अफसर को तब इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा था। पिटकुल के तत्कालीन एमडी एसएस यादव ने ईई बीएस पांगती को सस्पेंड कर दिया था। हालांकि तब पांगती पर कुछ और आरोप लगाकर निलंबन का आधार बनाया गया था।

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श्रीनगर गढ़वाल में तैनात पिटकुल के अधिशासी अभियंता (ईई) बीएस पांगती कोट्रांसफार्मर की गुणवत्ता जांचने के लिए नियुक्त किया गया था। ईई पांगती ने निरीक्षण में ट्रांसफार्मर निर्धारित मानकों और तकनीकी गुणवत्ता के रूप में निमभन स्तरीय पाए थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में भी ट्रांसफार्मरों की गुणवत्ता और मानकों पर सवाल उठाते हुए खरीद न करने का सुझाव दिया। जांच में यह पाया गया था कि रिकार्ड यह दर्शा रहे हैं कि एग्रीमेंट के बाद कंपनी ने कुछ ही दिन में ट्रांसफार्मर तैयार किए हैं। ईई की रिपोर्ट को किनारे फेंक पिटकुल ने फिर भी इसी कंपनी से ट्रांसफार्मरों की खरीद की। यही नहीं ईई पांगती को निलंबित भी कर दिया।
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हालांकि पांगती पर निलंबन के लिए कुछ दूसरे आरोपों को आधार बनाया। लेकिन सूत्र इस पूरे प्रकरण को आईएमपी कंपनी से ट्रांसफार्मर खरीद पर सवाल उठाने के मामले से जोड़ते रहे हैं। तब पीएस पांगती ने भी स्वयं मीडिया में अपना पक्ष रखा था। पांगती ने बिना उनका पक्ष सुने एकतरफा कार्रवाई और मानसिक रूप से भी उत्पीड़न करने के भी आरोप लगाए थे। पिटकुल प्रबंधन ने सेवा नियमावली का डर दिखाकर तब उन्हें चुप रहने की सलाह दी थी। तब ऊर्जा निगमों के कर्मचारी संगठनों ने भी पिटकुल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। सूत्रों का कहना था कि ईई पांगती पर हुई कार्रवाई के बाद कोई भी अफसर इस प्रकरण में सवाल उठने से बच रहे थे। अब मामले की पर्तें खुलने पर यह चर्चा आम हो गई है कि क्या इस घपले में संलिप्त बड़े आकाओं पर भी कार्रवाई हो पाएगी? या फिर वे अपनी राजनीतिक पहुंच के बल पर कार्रवाई से बच जाएंगे।
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ट्रांसफार्मर मिला नहीं बैंक गारंटी वापस कर दी
अफसरों ने ट्रांसफार्मर आपूर्ति कंपनी को बैंक गारंटी लौटाने में खूब दरियादिली दिखाई। पिटकुल में ट्रांसफार्मर आए बिना ही अफसरों ने बैंक गारंटी लौटा दी। इससे कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया में दिक्कत आ रही है। ट्रांसफार्मर खरीद घोटाले में पिटकुल के अफसरों, इंजीनियरों ने कई स्तर पर घपलेबाजी की है। इस मामले में तब भी बहुत सवाल उठे थे, लेकिन न तो पिटकुल और न ही ऊर्जा मंत्रालय ने इसकी जांच बिठाई। नई सरकार में हो रही जांच से इन अनियमितताओं से अब धीरे धीरे पर्दा उठने लगा है।

झाझरा सब स्टेशन में लगे 80 एमवीए के ट्रांसफार्मर के दो बार खराब हो जाने से पूरी खरीद प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है। तत्कालीन एमडी एसएस यादव के कार्यकाल में खरीदे गए 24 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर खरीद की जांच चल भी रही है। जांच में यह बात सामने आई है कि ट्रांसफार्मर को हैंड ओवर लेने से पहले पिटकुल के इंजीनियरों, अफसरों ने विभागीय कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया। इसी तरह, बैंक गारंटी लौटाने में भी अफसरों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। दरअसल, पहली बार मई 2016 में जब ट्रांसफार्मर खराब हुआ तो इसे मेंटेनेंस के लिए कंपनी को भेजा गया।

तब इसके एवज में पिटकुल ने कंपनी से ट्रांसफार्मर के मूल्य के बराबर लगभग पांच करोड़ रुपये की बैंक गारंटी पिटकुल ने ली। इस बीच, सितंबर में पिटकुल अफसरों ने गुपचुप तरीके से कंपनी को बैंक गारंटी वापस लौटा दी। जबकि ट्रांसफार्मर पिटकुल के हैंड ओवर हुआ ही नहीं था। ट्रांसफार्मर दोबारा खराब होने पर मेंटेनेंस के लिए जा चुका है, लेकिन पिटकुल के पास गारंटी के रूप में कुछ नहीं है। ऐसे में अगर पूरे प्रकरण की जांच निष्पक्ष तरीके से हो तो कई और अफसरों का इसमें नपना तय है। उधर, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि पिटकुल से नियमानुसार ही बैंक गारंटी प्राप्त की गई है।
 

भाजपा ने उठाए थे सवाल

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हरीश रावत - फोटो : ANI

ट्रांसफार्मर खरीद में घपले की आशंका जताते हुए तब भाजपा ने भी पूरे मामले की जांच की मांग की थी। तब इस पर न तो सरकार ने ध्यान दिया और न ही प्रबंधन ने जांच बैठाने तक की जहमत उठाई। इस प्रकरण को उठाने वाले भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल का कहना है कि अभी तो यह शुरूआत है। ऊर्जा निगमों में जितने घपले घोटाले हुए हैं, उनके दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध छेड़ चुके हैं। घोटाले में जो भी संलिप्त होगा वह चाहे कितना बड़ा व्यक्ति क्यों न हो उसे बख्शा नहीं जाएगा। गोयल ने कहा कि कंपनी से खरीदा गया ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत करते ही खराब हो गया था। ट्रांसफार्मर तय क्षमता का लोड भी सहन नहीं कर पाया। हम तब घोटाले की जांच की मांग करते रहे, लेकिन इसे दबाने की कोशिश की गई। यहां तक कि तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी मामले की जांच नहीं कराई।

नौटियाल ने की थी सीबीआई जांच की मांग
हमारा उत्तराखंड जन मंच के संयोजक अनूप नौटियाल ने ट्रांसफार्मर खरीद समेत ऊर्जा निगम में विभिन्न घोटालों का आरोप लगाते हुए सीबीआई से जांच की मांग की थी। तब पिटकुल में तैनात एक अफसर ने अपने राजनीतिक संबंधों के जरिए नौटियाल पर दबाव बनाने की कोशिश भी की थी। शनिवार को नौटियाल ने फोन पर बताया कि वह शुरूआत से ही घोटाले की आशंका जाहिर कर रहे थे। पीएमओ और सीबीआई से भी जांच की मांग की थी। पीएमओ ने भी राज्य सरकार को जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। नौटियाल ने कहा कि वे अब भी ऊर्जा निगम के घोटालों की सीबीआई जांच की मांग पर अडिग हैं। अब तो दोनों जगह भाजपा की सरकार है, इसलिए जांच में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

ऊर्जा कामगार संगठन ने भी दी थी आंदोलन की चेतावनी
ऊर्जा कामगार संगठन ने भी कुछ दिन पहले इस मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई शुरू हुई है, इसका स्वागत है। शर्मा ने कहा कि वे ऊर्जा के तीनों निगमों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अन्य सभी घोटालों की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। अगर जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई न हुई तो संगठन आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

मीडिया पर भी दबाव बनाने की कोशिश
तब कंपनी को सामने कर मीडिया पर भी दबाव बनाने की कोशिश की गई थी। भाजपा द्वारा उठाए गए सवालों को प्रकाशित करने पर कंपनी के माध्यम से खुद को पाक साबित दिखाने के लिए मीडिया को नोटिस भी भेजे गए थे।

कंपनी ने रखा अपना पक्ष
आईएमपी कंपनी के जनरल मैनेजर (मार्केटिंग) डीपी सिंह ने कहा कि सभी ट्रांसफार्मरों की सप्लाई ओपन टेंडर प्रक्रिया के तहत हुई है। उन्होंने कहा कि हमारी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। पिटकुल में क्रियान्वित सभी 30 ट्रांसफार्मरों में से एक ट्रांसफार्मर खराब हो जाना संभावित है। कंपनी ने ट्रांसफार्मर खराब होने के तुरंत बाद उसी दिन ट्रांसफार्मर वापस लेने के लिए पत्र दिया था। जिसकी अनुमति 10 दिन बाद आज तक नहीं दी गई है। पिटकुल की सप्लाई सुचारु रखने के लिए कंपनी ने 40 एमवीए ट्रांसफार्मर बिना किसी अतिरिक्त लागत फ्री आफ कास्ट लगाने का भी प्रस्ताव पिटकुल को दिया है।

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