उत्तराखंड: राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बीच अब 100 किलोमीटर की रफ्तार से गुजरेंगी ट्रेनें
- उत्तर रेलवे के संरक्षा आयुक्त ने दी अनुमति, हरिद्वार-देहरादून और रायवाला-ऋषिकेश के बीच है राजाजी टाइगर रिजर्व का क्षेत्र
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हरिद्वार से देहरादून और रायवाला से ऋषिकेश के बीच अब ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ती नजर आएंगी। उत्तर रेलवे के संरक्षा आयुक्त ने हरिद्वार-देहरादून और रायवाला-ऋषिकेश के बीच ट्रेनों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से संचालित करने की अनुमति दी है। इससे पूर्व इन दोनों रेलखंडों पर ट्रेनों की अधिकतम गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित की गई थी। दूसरी ओर रेल प्रबंधन के इस फैसले पर राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
बता दें, रेलवे की ओर से हरिद्वार-देहरादून और रायवाला-ऋषिकेश के बीच ट्रेनों की अधिकतम गति को 50 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित किया गया था। ट्रेनों की गति बेहद कम होने की वजह से हरिद्वार से देहरादून पहुंचने में यात्रियों को डेढ़ घंटे का समय लगता है। अब रेलवे ने फैसला किया है कि इस रेलखंड के बीच ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटे होगी।
रेलवे के इस फैसले पर राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक डीके सिंह का कहना है कि पूर्व में यह तय किया गया था कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों की अधिकतम गति 35 किमी प्रति घंटा रहेगी। यह पूर्व में किए गए फैसलों का उल्लंघन है। यदि ट्रेनों की गति 100 किमी प्रति घंटे की गई तो हाथी, बाघ, तेंदुआ, हिरण जैसे वन्यजीवों के ट्रेन की चपेट में आने का खतरा और बढ़ जाएगा। इस संबंध में रेलवे के आला अधिकारियों से लिखापढ़ी की जा रही है।
दो दशक में 17 हाथियों की जा चुकी है जान
वन विभाग के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो हरिद्वार-देहरादून रेलखंड पर तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में आकर पिछले दो दशक में 17 हाथी अपनी जान गवां चुके हैं। अभी पिछले साल ही ट्रेन की चपेट में आकर हाथी के बच्चे की मौत हो गई थी।
इसके बाद वन विभाग की ओर से दोनों ट्रेन चालकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा भी दर्ज किया गया था। पिछले साल हरिद्वार के ज्वालापुर के पास रेलवे लाइन पार करते समय ट्रेन की चपेट में आकर दो हाथियों की मौत हो गई थी।
राजाजी टाइगर रिजर्व के हाथी समेत तमाम वन्यजीव रेलवे लाइनों की तरफ ना जाएं इसे लेकर टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद हाथी रेलवे ट्रैक की तरफ चले जाते हैं और ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गवां देते हैं।
विशेषज्ञों ने किया राजाजी टाइगर रिजर्व का दौरा
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए ) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के विशेषज्ञों ने बुधवार को राजाजी टाइगर रिजर्व का दौरा किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से लाए जा रहे बाघ और बाघिन के ट्रांसलोकेशन के बारे में जानकारी जुटाई और टाइगर बाड़े का भी निरीक्षण किया।
राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में दो और पूर्वी क्षेत्र 38 बाघ है। ऐसे में एनटीसीसीए ने जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी के पश्चिमी क्षेत्र में पांच बाघ और बाघिन को लाने की अनुमति दी है। एक बाघिन को लाया भी जा चुका है।
चार बाघ और बाघिन को 2022 तक लाया जाना है। टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह ने बताया कि एनटीसीए के आईजी सुरेंद्र मेहरा और भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. धनंजय मोहन की अगुवाई में संयुक्त टीम ने टाइगर रिजर्व का दौरा किया। एनटीसीए के आईजी सुरेंद्र मेहरा की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को समीक्षा बैठक होगी।
राजाजी पार्क भेजी गई बाघिन की हो रही निगरानी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को पकड़कर राजाजी पार्क के वेस्टर्न सर्किल में कॉलर आईडी लगाकर छोड़ा गया है, ताकि उस पर नजर रखी जा सके। अब राजाजी पार्क प्रशासन रोजाना बाघिन की रिपोर्ट सीटीआर प्रशासन को दे रहा है, ताकि उसके विचरण की रिपोर्ट तैयार की जा सके।
23 दिसंबर को बिजरानी रेंज से एक बाघिन को राजाजी टाइगर रिजर्व, भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून व सीटीआर के पशु चिकित्सकों की टीम ने पकड़ा था। बाघिन को 24 दिसंबर सुबह राजाजी पार्क के मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में छोड़ा गया था।कॉलर आईडी को जीपीसीएस से रोजाना ट्रेस किया जा रहा है।
सीटीआर के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बताया कि बाघिन स्वस्थ है और कैमरा ट्रैप से उसकी तस्वीरें भी ली गईं हैं। बताया कि बाघिन को विचरण में कोई परेशानी नहीं हो रही है। जल्द ही एक बाघ को ट्रेस कर राजाजी पार्क में छोड़ा जाएगा, ताकि राजाजी पार्क में बाघों का कुनबा बढ़ सके।
राजाजी पार्क में बाघों का बढ़ेगा कुनबा
हरिद्वार के राजाजी नेशनल पार्क में 550 वर्ग किलोमीटर में मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में पिछले सात साल से दो ही बाघिन हैं। पार्क क्षेत्र के बीच में रेल लाइन और हाइवे होने से दूसरे क्षेत्र से बाघ वहां तक नहीं आ पाते। ऐसे में मोतीचूर में बाघों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। 2016 में मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए बाघ शिफ्ट करने की योजना बनी थी। 2017 में इसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से स्वीकृति मिली थी। हरिद्वार टाइगर रिजर्व एवं भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से एक टीम के साथ कॉर्बेट पार्क की टीम भी काम कर रही है।