उत्तराखंड की बेटियों ने छुआ आसमान, बनीं फ्लाइंग ऑफिसर
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उत्तराखंड की तीन होनहार बेटियों ने भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर अपनी कामयाबी का परचम लहराया है। इनमें चमोली जिले के गौचर की मेधावी छात्रा सुरुचि चौहान, हल्द्वानी की श्वेता मेहर और देहरादून की आकांक्षा रावत शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश के तीन नौजवानों रुद्रप्रयाग के परंकडी गांव के राहुल सेमवाल, ऋषिकेश के नागेंद्र गवानी और हरिद्वार के सक्षम शर्मा ने भी वायुसेना में फ्लाइंग आफिसर बनकर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।
गौचर की मेधावी बालिका सुरुचि चौहान के इरादों को घर परिवार का हौसला मिला तो उन्होंने वायु सेना को अपना कैरियर चुना। मूल रूप से पोखरी के सरमोला गांव और वर्तमान में गौचर में रह रहे महावीर सिंह चौहान के तीन बेटे-बेटियों में सुरुचि सबसे बड़ी है।
सुरुचि के परिवार की पृष्ठभूमि सेना से जुड़ी है। उसके पिता महावीर सिंह चौहान सूबेदार मेजर पद से सेवानिवृत्त हैं और माता सुषमा चौहान गृहणी हैं। सुरुचि के दादाजी शूरवीर सिंह चौहान आर्डिनरी कैप्टन बनकर सेना से सेवानिवृत्त हुए।
सेना के परिवार से ही ताल्लुक रखती हैं सुरुचि
सुरुचि के चाचा बृजमोहन चौहान ने बताया कि विरासत में मिले आर्मी के अनुभवों का लाभ भी सुरुचि के कैरियर को बनाने में सहायक सिद्ध हुआ। शुक्रवार को टेक्निकल कॉलेज बंगलूरू में पासिंग आउट परेड हुई जिसमें 127 कैडेट शामिल थे। सुरुचि के फ्लाइंग अफसर बनने पर डिप्टी स्पीकर डॉ. अनुसूया प्रसाद मैखुरी, नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश नेगी, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष विजय प्रसाद डिमरी, सभासद इंदु पंवार आदि ने बधाई दी।
उत्तराखंड की बेटी होने पर नाज
उत्तराखंड की बेटी होने पर मुझे नाज है। लेखन, पेंटिंग, गीत, स्केटिंग, वॉलीबाल मेरे शौक हैं। बचपन से ही सेना में आने की ठानी थी।
-सुरुचि चौहान, फ्लाइंग अफसर।
सुरुचि का एकेडमिक कैरियर
हाईस्कूल- वेस्ट बंगाल से- 89 प्रतिशत
इंटरमीडिएट - देहरादून से- 78 प्रतिशत
बी-टैक-जयपुर राजस्थान से- 83 प्रतिशत
एयर फोर्स कॉमन एप्टीट्यूट टेस्ट और सर्विस सलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) वर्ष- 2014
फ्लाइंग अफसर पास आउट वर्ष- 2015