उत्तराखंड : सीएम से लेकर पूर्व सीएम तक की प्रतिष्ठा दांव पर
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उत्तराखंड में 15 फरवरी को हो रहे लोकतंत्र के महाकुंभ में सूबे के 628 प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, कुल 70 विधानसभा सीटों (कर्णप्रयाग समेत) के लिए 39,33564 पुरुष और 35,78,995 महिलाओं समेत कुल 75,12,559 वोटर बुधवार के अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
इसके लिए राज्यभर में 10854 मतदेय स्थल बनाए गए हैं। सबसे ज्यादा 1725 मतदेय स्थल देहरादून और सबसे कम 312 रुद्रप्रयाग जिले में बनाए गए हैं। चुनाव के लिए 10854 सीयू ईवीएम और 11240 बीयू ईवीएम लगाई गई है।
कुल 4,106 सीयू ईवीएम और 4235 बीयू ईवीएम रिजर्व रखी गई है। प्रदेश में 34 राजनीतिक दलों के कुल 628 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इसमें छह राष्ट्रीय दल, चार क्षेत्रीय दल और 24 गैर मान्यता प्राप्त दल हैं। 258 निर्दलीय प्रत्याशी भी ताल ठोक रहे हैं।
पार्टीवार प्रत्याशियों का ब्योरा (कर्णप्रयाग छोड़कर)
पार्टी - कुल प्रत्याशी - करोड़पति - आपराधिक मामले
भाजपा - 69 - 47 (69 फीसदी) - 19 (27 फीसदी)
कांग्रेस - 69 - 51 (74 फीसदी) - 17 (25 फीसदी)
बसपा - 67 - 19 (30 फीसदी) - 07 (10 फीसदी)
उक्रांद - 54 - 13 (24 फीसदी) - 04 (07 फीसदी)
सपा - 20 - 04 (20 फीसदी) - 02 (10 फीसदी)
सीपीआई (एम) 05 - 01 (20 फीसदी) - 01 (17 फीसदी)
आरएलडी - 06 - 01 (17 फीसदी) - 01 (17 फीसदी)
सीपीआई - 04 - - - 01 (25 फीसदी)
अन्य - 76 - 08 (09 फीसदी) - 07 (09 फीसदी)
निर्दलीय - 258 - 53 (21 फीसदी) - 32 (12 फीसदी)
इनकी प्रतिष्ठा लगी है दांव पर
सीएम हरीश रावत
सीएम हरीश खुद शाह मात के खेल में फंसे हैं। खुद को खांटी पहाड़ी कहने वाले हरीश रावत मैदानी क्षेत्र की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे है। हरीश रावत के राजनीतिक कौशल से कांग्रेस मुकाबले में तो है लेकिन सत्ता वापसी की चुनौती के अलावा अपने गढ़ कुमाऊं में खुद को साबित करने की परीक्षा में भी पासिंग मार्क्स से काम नहीं चलेगा।
इंदिरा हृदयेश
कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदेश कांग्रेस ही नहीं राज्य में अकेली महिला राजनीतिज्ञ है जो अपने दम पर सियासत करती है। चुनाव जीती और संख्याबल बहुमत की कसौटी पर खरा उतर तो वह मुख्यमंत्री के पद की दावेदार होंगी और चुनाव हार गयी तो यह उनका आखिरी चुनावी रण साबित होगा।
प्रीतम की परंपरागत सीट...
प्रीतम सिंह
जनजाति बाहुल्य सीट चकराता प्रीतम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। वह पिछले दो दशक से लगातार विधायक है। प्रीतम सिंह के सामने मधु चौहान भाजपा के टिकट पर मैदान में है। चकराता क्षेत्र में मंदिर में दलितों को प्रवेश करने से रोकने का मामला उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
विजय बहुगुणा
पूर्वसीएम विजय बहुगुणा के साथ भाजपा में आये नौ क्षत्रपों को जिताना उनकी जवाबदेही में शामिल हो गया है। बहुगुणा पर अपनी राजनीतिक विरासत को सितारगंज से बेटे सौरभ बहुगुणा की जीत दिलवा कर आगे बढ़ाने का दबाव भी है।
सीएम की रेस में माने जा रहे महाराज
सतपाल महाराज
केंद्र की राजनीति छोड़ प्रदेश की सियासत में कूदे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सतपाल महाराज की भूमिका इस चुनाव से तय होगी। सीएम की रेस में माने जा रहे महाराज को चौबट्टाखाल से जीतने का दबाव है।
यशपाल आर्य
कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए कैबिनेट मंत्री यशपाल के परिवार की साख इस चुनाव से जुड़ी है। उनके बेटे संजीव आर्य भी रानीखेत से प्रत्याशी हैं, अपने साथ बेटे को जीता कर आर्य अपना कद बढ़ा कर पाते हैं या नहीं, यह 11 मार्च को तय होगा।