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GST पर उत्तराखंड पहले ही दे चुका है हरी झंडी

Sat, 20 Dec 2014 02:01 PM IST
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 20 Dec 2014 02:01 PM IST
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uttarakhand support GST from 2012

उत्तराखंड में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को प्रदेश के लिए फायदेमंद ही माना जा रहा है। प्रदेश जीएसटी को लागू करने के लिए 2012 में ही सहमति दे चुका है। अब 26 दिसंबर को केंद्र में प्रस्तावित बैठक में राज्य जीएसटी को लागू करने से पहले राज्यों के अधिकार को सुनिश्चित करने का मुद्दा जरूर उठा सकता है।

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प्रदेश सरकार का मानना है कि उपभोक्ता राज्य होने के कारण राज्य को जीएसटी में राजस्व का नुकसान नहीं होगा। इतना जरूर है कि जीएसटी के तहत राज्य के कर लगाने के अधिकार पर स्थिति स्पष्ट न होने की बात की जा रही है।
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26 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली बैठक में राज्य इस मामले को उठा सकता है। दूसरी चिंता आरएनआर(रेवेन्यू न्यूट्रल रेट) को लेकर है। वैट में यह कर की यह दर करीब 12.5 प्रतिशत थी जो अब 13.5 प्रतिशत हो चुकी है।
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इस दर को बहुत अधिक रखा गया तो राज्य को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। उत्तराखंड को उपभोक्ता राज्य माना जाता है। ऐसे में आरएनआर अगर 16 प्रतिशत से अधिक होगा तो राज्य में वस्तुओं की कीमत में इजाफा हो सकता है।

राज्य के नुकसान का सवाल ही नहीं

uttarakhand support GST from 2012

वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश के मुताबिक केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई की जाएगी। ऐसे में राज्य के नुकसान का सवाल ही नहीं है।

वैट की विशेष अनुसूची में पेट्रोल, डीजल शामिल हैं। प्रदेश को इन्हीं वस्तुओं से सबसे अधिक कर मिलता है। इस पर अभी स्थिति स्पष्ट होनी है कि कितने समय में इस नुकसान की भरपाई होगी। प्रदेश में इस समय वैट का राजस्व करीब 4200 करोड़ है जिसका अधिकांश हिस्सा डीजल, पेट्रोल का है।

यह भी कहा जा रहा है कि डीजल और पेट्रोल में राज्य का हिस्सा शुरुआती दौर में बरकरार रहेगा। 26 दिसंबर को दिल्ली में बैठक है। बैठक में ही तस्वीर पूरी तरह से साफ होगी। पहले जीएसटी को एक अप्रैल 2012 से लागू किया जाना था। उसी समय प्रदेश सरकार ने जीएसटी के लिए हामी भर दी थी। पर राज्यों के अधिकार का मुद्दा है जो जीएसटी में अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है।

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