दोस्त को बचाने के लिए जान की लगाई बाजी, अब PM मोदी करेंगे सम्मान
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देश के 68वें गणतंत्र दिवस के मौके पर देश भर से 25 बच्चों को निडरता, साहस और अपने प्राणों की परवाह किए बगैर दूसरों की जान बचाने का हौसला रखने पर राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इनमें चार को यह सर्वोच्च सम्मान मरणोपरांत दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले इन बच्चों में 12 लड़कियां और 13 लड़के शामिल हैं। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के तहत भारत अवार्ड अरुणाचल प्रदेश की तार पीजू (आठ वर्षीय) को मरणोपरांत अपनी दो सहेलियों को नदी में बहने से बचाने के चलते दिया जा रहा है। इन बहादुर बच्चों में उत्तराखंड के सुमित भी शामिल हैं।
इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने बताया कि देश भर के विभिन्न राज्यों के बच्चों को अपार साहस, निडरता के साथ दूसरों का जीवन बचाने के लिए राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया जाता है।
गणतंत्र दिवस समारोह से पहले 23 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन बहादुर बच्चों से मिलने के साथ ही उन्हें राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार देकर सम्मानित करेंगे। सम्मान के रूप में इन बच्चों को मेडल, सर्टिफिकेट और कैश दिया जाएगा।
दोस्त को बचाने के लिए तेंदुए से जीती जंग
उत्तराखंड के छोटे से गांव फुलित में सुमित अपने चचेरे भाई व दोस्त रितेश के साथ आठ नवंबर 2015 की सुबह पशुओं के लिए चारा लेने खेत जा रहा था। इसी बीच रितेश पर झाड़ियों में छिपकर बैठे तेंदुए ने हमला कर दिया था।
सुमित ने बताया कि तेंदुए के एकदम हमले से पहले मैं भी डर गया लेकिन फिर मैंने पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। यह देखकर तेंदुए ने रितेश को छोड़ दिया और मेरी तरफ बढ़ने लगा। मैंने एक पाठ में पढ़ा था कि यदि कोई जानवर हमला कर दे तो उसकी पूंछ पकड़ लो।
बस यही याद करते हुए मैंने तेंदुए की पूंछ पकड़ ली और घास काटने वाली दरांती से उसपर वार कर दिया। पूंछ पर हमले से तेंदुआ हमें छोड़कर भाग गया। सुमित के पिता सुरेश दत्त ममगाई ने बताया कि स्कूल में पढ़ने के चलते सुमित ने अपने पाठ को याद करते हुए तेंदुए के हमले से खुद को और अपने भाई को बचाया।
जबकि तेंदुए के हमले से तो बड़े-बड़े भी डरकर बेहोश हो जाते हैं। सुमित का कहना है कि डर के आगे जीत है। बस इसी सोच के साथ मैं बड़ा होकर भारतीय सेना में जाना चाहता हूं, ताकि देश की सेवा करते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकूं।