उत्तराखंड: छात्र घट रहे और घोषणाओं में खुल रहे स्कूल, दो वर्षों में 350 से अधिक स्कूलों में पड़ चुके ताले
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या के चलते बीते दो वर्षों में 350 से अधिक स्कूलों में ताले पड़ चुके हैं। ढाई हजार स्कूल बंदी की कगार पर हैं, जिनमें छात्र संख्या 10 या इससे भी कम रह गई है। दूसरी ओर राज्य में सत्ता में आई सरकारें लगातार घोषणाओं में स्कूल खोल रही है।
उत्तराखंड में शिक्षा भी पलायन की एक बड़ी वजह रही है। सरकारों की ओर से स्कूलों की घोषणाओं के साथ ही दावा भी किया जाता रहा है कि इन स्कूलों में सभी सुविधाएं होंगी। बच्चों को अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, जिससे अभिभावकों को अपने बच्चों को बड़े शहरों में भेजने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
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इससे पलायन रुकेगा, लेकिन शिक्षक संगठनों और राजनीतिक दलों का कहना है कि सरकारों की यह घोषणाएं धरातल पर नहीं उतरी हैं। सभी घोषणाओं पर अमल होता तो अब तक हर ब्लॉक में 18-18 मॉडल और इंग्लिश मीडियम स्कूल खुल चुके होते।
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स्कूलों को लेकर की गई कुछ घोषणाएं
15 नवंबर 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश के हर ब्लाक में पांच मॉडल विद्यालय खोले जाने की घोषणा की थी। तब दावा किया गया था कि इन स्कूलों में सभी सुविधाएं होंगी। इसके बाद 16 दिसंबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से हर ब्लॉक में 10 मॉडल विद्यालय खोले जाने की घोषणा की गई, जबकि 17 सितंबर 2015 को हर ब्लाक में नवोदय की तर्ज पर स्कूल खोले जाने की घोषणा की गई।
उस दौरान कहा गया था कि हर ब्लाक में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय की तर्ज पर स्कूल खुलेंगे, लेकिन इन स्कूलों का आज तक कोई अता-पता नहीं है। जिन प्राथमिक स्कूलों को मॉडल विद्यालय के रूप में चिह्नित किया गया, उनकी स्थिति यह है कि वहां पर्याप्त शिक्षक और सुविधाएं तक नहीं हैं।
केंद्रीय विद्यालय के लिए नहीं मिली जमीन
सितंबर 2019 में हर ब्लाक में केंद्रीय विद्यालय खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा गया था कि राज्य सरकार इन स्कूलों के लिए नि:शुल्क भूमि और छात्र संख्या उपलब्ध कराएगी, लेकिन अब तक एक भी विद्यालय के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। अब शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का कहना है कि हर ब्लाक में एक इंग्लिश मीडियम स्कूल खुलेगा।
एक तरफ सरकारी स्कूलों की स्थिति नहीं सुधर रही है, इसके विपरीत सरकार की ओर से नए स्कूल खोलने की घोषणा की जा रही है। पूर्व में कहा गया था कि हर जूनियर हाईस्कूल को एक अंग्रेजी का शिक्षक मिलेगा, लेकिन अब तक इन शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई। सवाल यह है कि अलग से इंग्लिश मीडियम स्कूल खुलने से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का क्या होगा।
- राजेंद्र बहुगुणा, प्रांतीय महामंत्री, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ