उत्तराखंड स्टोन क्रशर नीति जारी: रुकेगा अवैध खनन, बढ़ेगी सरकार की इनकम
- नायब तहसीलदार से लेकर अनुसचिव तक कर सकेंगे अभिलेखों की जांच
- स्टोन क्रशर संचालकों को हरित पट्टी विकसित करनी होगी
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विस्तार
नई स्टोन क्रशर नीति से सरकार अवैध खनन पर अंकुश लगाने के साथ अपनी आय में बढ़ोतरी करना चाहती है। इस उद्देश्य से लाई गई इस नीति में पर्यावरणीय मानकों का भी खास ख्याल रखा गया है। वह नदी से स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट की दूरी का मानक हो या फिर संचालकों पर हरित पट्टी विकसित करने की शर्त हो, नीति में इन प्रावधानों पर खास जोर दिया गया है। प्लांट संचालकों को ध्वनि प्रदूषण के मानकों का ध्यान रखना होगा।
इसके अलावा खनन सामग्री के विक्रय और लेनदेन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। संचालकों को इलेक्ट्रानिक मीटर का इस्तेमाल करना होगा। हाट मिक्स प्लांट लगाने के लिए जिलाधिकारी दो वर्ष की अनुमति देंगे। प्लांट की स्थापना व भंडारण की अनुमति देने के लिए जिलाधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति संयुक्त निरीक्षण करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर शासन लाइसेंस जारी करेगा।
हरित पट्टी विकसित करनी होगी
प्लांट संचालक को धूल वाले कणों को रोकने वाली प्रजातियों के पेड़ों की सघन हरित पट्टी विकसित करनी होगी। ये कार्रवाई लाइसेंस मिलने के साथ शुरू करनी होगी और छह महीने में पूर्ण कर ली जाएगी।
नवीनीकरण के समय पूरे करने होंगे मानक
पहले से संचालित हो रहे स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट नई नीति से प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन नवीनीकरण के समय उन्हें नई नीति के हिसाब से सभी मानकों को पूरा करना होगा।
स्थानांतरित हो सकेंगे पुराने प्लांट
नीति में मानकों के अनुरूप प्लांट को स्थानांतरित करने का भी प्रावधान किया गया है। ऐसे प्रकरणों में प्लांट स्वामी नवीन स्थल नीति में निर्धारित क्षेत्रफल एवं दूरी के मानकों के अनुरूप अनुरोध पत्र जनपद स्तर पर गठित समिति के माध्यम से निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म को देगा और उसकी संस्तुति पर शासन अनुमति देगा। इसके लिए स्वामी को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
पंजीकृत परामर्शदाता तैयार करेंगे प्रोजेक्ट रिपोर्ट
स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट की स्थापना एवं संचालन के लिए अधिकृत परामर्शदाता द्वार प्रमाणित प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जाएगी। परामर्शदाता निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म इकाई सूचीबद्ध करेगी। प्रोजेक्ट रिपोर्ट गलत पाए जाने पर परामर्शदाता को काली सूची में डाल दिया जाएगा।
लाइसेंस शुल्क
स्टोन क्रशर : पर्वतीय क्षेत्रों में 10 लाख 100 टन प्रतिघंटा वहीं एक लाख प्रत्येक 100 अतिरिक्त टन जबकि मैदानी क्षेत्रों में 20 लाख 100 टन प्रति घंटा और दो लाख प्रत्येक 100 अतिरिक्त टन
स्क्रीनिंग प्लांट : पर्वतीय क्षेत्रों में दो लाख (100 टन/घंटा) वहीं 25 हजार(प्रत्येक अतिरिक्त टन/घंटा) जबकि मैदानी क्षेत्रों में चार लाख (100 टन/घंटा) और 50 हजार (प्रत्येक अतिरिक्त टन/घंटा)
मोबाइल क्रशर/प्लांट: 25 हजार रुपये (10 टन/घंटा क्षमता उससे कम), 50 हजार रुपये (10 टन/घंटा से अधिक व 25 टन/घंटा से कम), एक लाख रुपये (25 से 50 टन/घंटा), दो लाख रुपये (50 टन/घंटा से अधिक)
हाट मिक्स/रेडिमिक्स : 25,000 रुपये
ये होगी दूरी
स्थान - स्टोन क्रशर - स्क्रीनिंग प्लांट
सरकारी वन - 100 मीटर - 100 मीटर
नदी के किनारे से - तीन किमी - तीन किमी
धार्मिक स्थल - 300 मीटर - 300 मीटर
शिक्षण संस्थान अस्पताल नर्सिंग होम आदि - 300 मीटर - 300 मीटर
आबादी से दूरी - 300 मीटर - 300 मीटर
नोट- पर्वतीय क्षेत्र में नदी से न्यूनतम दूरी 250 मीटर और शेष दूरी के मानक मैदानी दूरी के मानकों के आधे होंगे।
नायब तहसीलदार से अनुसचिव तक करेंगे अभिलेखों की जांच
स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट व अन्य प्लांट संचालकों को डबल एंट्री अकाउंटिंग सिस्टम बनाना होगा। नकद लेनदेन नहीं करेंगे। आटीजीएस, एनआरटीजीएस, चेक व ड्राफ्ट का प्रयोग करेंगे। अब जिलाधिकारी के अलावा तहसीलदार, नायब तहसीलदार से लेकर शासन में अनुसचिव स्तर के अधिकारी को भी प्लांट के अभिलेखों की जांच का अधिकार होगा।
महंगी हुई स्टोन क्रशर लाइसेंस फीस, मैदान में नदी से होगी तीन किमी दूरी
प्रदेश में स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट व रेडीमिक्स प्लांट की लाइसेंस फीस महंगी हो गई है। नई नीति में स्टोन क्रशर के लाइसेंस शुल्क को दोगुना कर दिया है। मैदान में 100 टन प्रति घंटा क्षमता का प्लांट लगाने के लिए 10 लाख के स्थान पर 20 लाख रुपये और पर्वतीय क्षेत्र में दोगुना यानी 10 लाख रुपये लाइसेंस फीस देनी होगी।
इसके साथ ही संयंत्रों के नवीनीकरण की अवधि को पांच साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया है। उन्हें भंडारण की भी अनुमति होगी। स्टोन क्रशर का लाइसेंस सरकार उसी को देगी जिसके पास स्वयं का पट्टा होगा या जिसके पक्ष में निगमों या निजी पट्टाधारकों से आपूर्ति के लिए विधिवत पंजीकृत अनुबंध किया गया होगा।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के आधार पर मैदानी क्षेत्रों में स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट की नदी से दूरी तीन किमी की गई है। पर्वतीय क्षेत्र में ये दूरी 250 मीटर होगी। नीति के अनुसार, पूर्व में स्थापित व संचालित जिन स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट का नियमितीकरण नहीं हुआ है, उन्हें दो माह के भीतर क्षमता टन प्रति घंटा के अनुसार जिलाधिकारी व निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म की संस्तुति से शासन से स्वीकृत कराना होगा। नीति में पर्यावरणीय मानकों को शामिल किया गया है।