उत्तराखंड: सरकारी अस्पतालों में 1020 नर्सिंग स्टाफ की भर्ती को मंजूरी, मानकों के अनुरूप होगी तैनाती
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प्रदेश में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) के मानकों के तहत सरकारी अस्पतालों में चार हजार से अधिक स्टाफ नर्सों की जरूरत है। इसके लिए कैबिनेट ने 1020 नर्सों की नियुक्ति करने के लिए मंजूरी दे दी है। भर्ती से चयनित नर्सों को प्रदेश के अलग-अलग अस्पतालों में मानकों के अनुरूप तैनात किया जाएगा।
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए प्रदेश सरकार ने आईपीएचएस मानकों के तहत सभी सरकारी अस्पतालों की श्रेणी तय की है। आईपीएचएस के मानकों को पूरा करने के लिए अस्पतालों में लगभग चार हजार से अधिक स्टाफ नर्सों की कमी है।
बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुए कैबिनेट बैठक में स्टाफ नर्सों की नियुक्ति करने की मंजूरी दे दी है। नर्सों की कमी होने के कारण अस्पतालों में मरीजों के इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग ने आईपीएच मानकों के अनुसार डॉक्टरों की तैनाती कर दी है। दूसरे चरण में नर्सों की तैनाती करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अस्पतालों की श्रेणी
सरकार ने आईपीएचएस मानकों को लागू करने के लिए संयुक्त चिकित्सालय, बेस अस्पताल, जिला व महिला अस्पतालों का समायोजन किया है। अब प्रदेश में पीएचसी टाइप ए 525, पीएचसी टाइप बी 52, उप जिला अस्पताल 21, जिला अस्पताल 16 बनाए गए हैं।
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शुरू होगी एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना, 15 करोड़ का रिवाल्विंग फंड बनेगा
प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना को लागू करने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। पहले चरण में योजना के तहत प्रत्येक ब्लाक में 10 हेक्टेयर भूमि पर क्लस्टर बना कर एक आदर्श गांव विकसित किया जाएगा। जहां पर कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य, पोल्ट्री, शहद, मशरूम, डेरी समेत अन्य कार्य किए जाएंगे।
प्रदेश में लगभग सात लाख हेक्टेयर पर खेती किसानी का काम होता है। जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 12 प्रतिशत है। जबकि प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। प्रदेश में खाली हो रहे गांव और बंजर हो रही कृषि भूमि को देखते हुए सरकार ने एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना लागू करने की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पहले चरण में प्रत्येक ब्लाक में एक गांव का चयन किया जाएगा। जहां पर 100 किसानों का समूह बना कर कृषि कार्य किए जाएंगे। वित्तीय 2020-21 में योजना के संचालन को 14.25 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
15 करोड़ का रिवाल्विंग फंड बनेगा
योजना को लागू करने के लिए सरकार की ओर से 15 करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड बनाया जाएगा। इस फंड से प्रत्येक समूह को 15 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। क्लस्टर से सालाना प्राप्त होने वाली आय का 60 प्रतिशत समूह के सदस्यों में बांटा जाएगा। 35 प्रतिशत हिस्सा समूह के खाते में जमा किया जाएगा। पांच प्रतिशत राशि प्रशासनिक कार्यों के लिए खर्च की जाएगी।