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उत्तराखंड के सात जिलों के दो हजार किसान करेंगे रेशम की खेती
Tue, 12 Feb 2019 11:34 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
हरीश चंद्र पांडे, अमर उजाला, भीमताल (नैनीताल)
हरीश चंद्र पांडे, अमर उजाला, भीमताल (नैनीताल)
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 12 Feb 2019 11:34 AM IST
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रेशम फार्म
- फोटो : डेमो
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केंद्र सरकार प्रदेश के सात जिलों में जनजाति के दो हजार किसानों को रेशम की खेती के लिए प्रेरित करेगी। इसके लिए 28.89 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। राजकीय ओक तसर रेशम विकास परियोजना के तहत 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र और 10 प्रतिशत की धनराशि राज्य सरकार देगी।
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क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र के निदेशक सोमेश पालीवाल ने बताया कि इसके तहत नैनीताल, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, चकराता (देहरादून) और बागेश्वर के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले जनजाति के दो हजार किसान लाभान्वित होंगे। योजना का मकसद जनजाति किसानों को रेशम खेती से जोड़कर उनकी आमदनी को दोगुना करना है। इस प्रोजेक्ट में हल्द्वानी, श्रीनगर, देहरादून और पिथौरागढ़ के चार एनजीओ भी काम करेंगे।
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उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में 7 से 9 हजार की फीट की ऊंचाई में खरशु, मोरु व तिलौज की, जबकि 3 से 5 हजार वाले ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मणिपुरी बांज और लोकल बांज का उत्पादन किया जाएगा। चयनित सभी कीट पालकों को कीट पालन गृह और बीजागार दिए जाएंगे।
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