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उत्तराखंडः शिक्षकों के तबादलों में खेल, चहेतों के सुगम में तबादले, दिव्यांगों की सुध नहीं
Sun, 05 Jan 2020 10:25 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 05 Jan 2020 10:25 AM IST
सार
- अनुरोध के बावजूद विभाग ने न तबादला किया न मुख्य सचिव की कमेटी में भेजा प्रस्ताव
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
शिक्षा विभाग में हुए शिक्षकों के तबादलों में जमकर खेल हुआ है। पर्वतीय जनपदों में 70 फीसदी शिक्षकों के पद भरे बगैर ही विभाग ने चार जनपदों के मैदानी क्षेत्रों में चहेते शिक्षकों के तबादले कर दिए। वहीं 40 से 55 फीसदी दिव्यांग शिक्षिकाओं की विभाग ने सुध नहीं ली।
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हैरानी की बात यह है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति में भी इनके तबादलों का प्रस्ताव नहीं भेजा गया। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के मुताबिक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने शिक्षकों के तबादले किए हैं। शिक्षकों के तबादलों को लेकर हाईकोर्ट का जो आदेश है विभाग में उसका पालन किया जाएगा।
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केस नंबर एक
राजकीय इंटर कालेज रानीचौरी जनपद टिहरी गढ़वाल में रसायन विज्ञान की प्रवक्ता अंजू सैनी के मुताबिक वह 55 फीसदी दिव्यांग है। पांव खराब होने से वह ठीक से पहाड़ में चल नहीं पातीं। उनके पास दिव्यांगता का प्रमाण पत्र है। शासनादेश में भी यह स्पष्ट है कि दिव्यांगों को गृह जनपद में तैनाती दी जाएगी या फिर उनसे विकल्प लेकर उनकी तैनाती होगी। तबादले के लिए उन्होंने विभाग को आठ विकल्प दिए, लेकिन विभाग ने उनका तबादला नहीं किया। जबकि अनुरोध के आधार पर कुछ अन्य शिक्षकों के तबादले किए गए हैं।
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केस नंबर दो
जीआईसी कठुली खिर्सू पौड़ी गढ़वाल में कार्यरत आरती सेमवाल के मुताबिक वह 40 फीसदी दिव्यांग हैं। दिव्यांगता के आधार पर ही उनकी विभाग में नियुक्ति हुई है। उसने बताया कि वह पिछले 13 वर्षों से दुर्गम विद्यालय में कार्यरत हैं। विभाग में तबादले के लिए अनुरोध किया था, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए तबादले से इनकार कर दिया गया कि हाईकोर्ट के एक आदेश के चलते चार मैदानी जनपदों के सुगम स्कूलों में शिक्षकों के तबादले नहीं किए जा सकते, जबकि इसी शिक्षा सत्र में कई शिक्षकों के इन जनपदों में तबादले किए गए।