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उत्तराखंड: बुग्यालों का होगा वैज्ञानिक अध्ययन, पहले चरण में चोपता, तुंगनाथ पर रहेगा फोकस
Mon, 13 Jul 2020 07:56 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Mon, 13 Jul 2020 07:56 PM IST
सार
- पर्यटकों की भारी आवाजाही से हो रहे दुष्प्रभावों का लगाया जाएगा पता
- पहले चरण में वन अनुसंधान शाखा का चोपता, तुंगनाथ पर रहेगा फोकस
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उत्तराखंड में बुग्याल
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
पर्यटकों की भारी आवाजाही से बुग्यालों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। वन अनुसंधान शाखा के विशेषज्ञ राज्य के सभी बुग्यालों का अध्ययन करेंगे। योजना के पहले चरण में चोपता और तुंगनाथ क्षेत्र के बुग्याल पर फोकस रहेगा।
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वन अनुसंधान शाखा के निदेशक एवं मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी के मुताबिक बुग्यालों की बदहाल स्थिति पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी जताते हुए कई गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद बुग्यालों की स्थिति बेहद खराब है ऐसे में अब बुग्यालों का नए सिरे से अध्ययन किया जाएगा।
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प्रदेश में बेदनी, औली, चैनशील, चेनाप, चोपता, दयारा, देवबंद, देवक्यारा, गिडारा, रोहिणी बुग्याल काफी ऊंचाई पर हैं। मुख्य वन संरक्षक संजय चतुर्वेदी के मुताबिक बुग्याल उच्च हिमालयी क्षेत्र में 3000 से 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले घास के हरे भरे मैदान हैं। मानसून के दौरान उच्च हिमालई क्षेत्र में ढलान वाले इलाकों में घास की एक चादर बिछ जाती है। यह देखने में बेहद खूबसूरत लगती है।
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