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उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाला: एसआईटी ने छह संस्थानों पर दर्ज किया मुकदमा

Thu, 06 Feb 2020 11:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 06 Feb 2020 11:33 PM IST
सार

  • सहारनपुर जिले के चार, दून और मेरठ का एक-एक संस्थान शामिल
  • मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने पकड़ा फर्जीवाड़ा

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Uttarakhand scholarship scam: SIT has file case on six institutes
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति हड़पने के आरोप में एसआईटी ने छह प्राइवेट शिक्षण संस्थानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इनमें सहारनपुर जिले के चार, देहरादून और मेरठ का एक-एक संस्थान शामिल है। आरोप है कि इन संस्थानों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन को हड़पा है। 

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देहरादून और हरिद्वार में आईपीएस मंजूनाथ की अगुवाई में गठित एसआईटी ने जांच के बाद मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। पहला मुकदमा वसंत विहार थाने में लैंड मार्क फाउंडेशन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट वसंत विहार के खिलाफ दर्ज हुआ है।
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दूसरा मुकदमा सहारनपुर जिले के कमालपुर स्थित कृष्णा आईटीआई के खिलाफ दर्ज हुआ है। एसआईटी ने जांच में पाया कि जिला समाज कल्याण कल्याण अधिकारी कार्यालय से संस्थान को करीब एक करोड़ 23 लाख 94 हजार 800 रुपये की छात्रवृत्ति दी गई।
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शासनादेश के अनुसार 2014 तक छात्रवृत्ति छात्राें के बैंक खातों में दिए जाने का प्रावधान था, लेकिन यह संस्थान के बैंक खाते में भेजी गई। 2014-15 में आनलाइन छात्रवृत्ति वितरण में अधिकांश छात्रों के बैंक खातों में एक समान मोबाइल नंबर पाया गया।
 

ये तमाम खाते एक ही बैंक में थे। इसी से जुड़े कमलेश पैरा मेडिकल कमालपुर को भी छात्रवृत्ति के रूप में 91 लाख 68 हजार रुपये प्रदान किए गए। दस्तावेजों की जांच में कई तरह की अनियमिताएं पकड़ी गईं। दोनों संस्थानों के संचालकाें के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने एसआई रोहित कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया है।

इसके अलावा एसआईटी जांच में श्रीराम इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी दिल्ली-रुड़की रोड जटौली मेरठ भी फंस गया है। संस्थान को को एक करोड़ 45 लाख 80 हजार 700 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। जांच में पाया कि अधिकांश छात्रों को संस्थान में प्रवेश की जानकारी तक नहीं थी। जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि संस्थान संचालक ने छात्रों के फर्जी प्रवेश दर्शाकर सरकारी धन का गबन किया है। एसआई सुखपाल सिंह ने संस्थान संचालक के खिलाफ जालसाजी और सरकारी धन के गबन का मुकदमा दर्ज कराया है।

शाकुंबरी पैरा मैडिकल कालेज रिसर्च सेंटर बादशाही बाग सहारनपुर में भी छात्रवृत्ति वितरण में गड़बड़झाला हुआ है। एसआई दयाल सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि रिचर्स सेंटर को जिला समाज कल्याण विभाग की तरफ से 77 लाख 25 हजार 60 रुपये की धनराशि प्रदान की गई। एसआईटी ने संस्थान में अध्ययनरत दर्शाएं गए 21 छात्रों के बयान दर्ज किए। इनमें से 19 ने सेंटर में प्रवेश से किया इंकार किया। दो ने प्रवेश लेने की बात स्वीकारी, लेकिन कभी संस्थान में पढ़ाई करने से इंकार कर दिया।

इसी तरह मिलिनियम इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, देहरादून रोड, बिहारीगढ़ को 2012-13 से लेकर 2014-15 के बीच एक करोड़ 59 लाख 54 हजार 325 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। छात्रों के बयानों में आया कि कुछ लोगों ने निशुल्क प्रवेश और छात्रवृत्ति दिलाने का लालच देकर उनके  शैक्षिक प्रमाण पत्र लिए थे। वे कभी ना संस्थान गए और ना ही कोई परीक्षा दी। जांच में आए तथ्यों के आधार पर दरोगा की तरफ से संस्थान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।  

छात्रवृत्ति घोटाले में सहारनपुर के कमालपुर स्थित यूपी कालेज आफ पॉलिटेक्निक के खिलाफ भी डालनवाला कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। समाज कल्याण विभाग ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के नाम पर 68 लाख 70 हजार रुपये की धनराशि दी गई। शैक्षिक संस्थानों की सूची में अंकित छात्रों के मूल पतों पर जाकर सत्यापन किया गया। 12 ग्राम पंचायतों की तरफ इन छात्रों के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कही गई। 

एसआईटी ने जांच में आए तथ्यों के आधार पर छह प्राइवेट संस्थानों के खिलाफ छात्रवृत्ति हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया गया है। जांच में आया है कि प्राइवेट संस्थानाें ने फर्जी एडमिशन के आधार पर सरकारी धन का गबन किया है। विवेचना में आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधित विवेचक द्वारा कार्रवाई की जाएगी। 
- मंजूनाथ टीसी, एसआईटी प्रभारी

छात्रवृत्ति घोटाले में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई कर रही पुलिस

कांग्रेेस ने छात्रवृत्ति घोटाले में पुलिस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। इसे लेकर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनिल रतूड़ी को पत्र लिखकर एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

धस्माना ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिन घोटालेबाजों के खिलाफ  एसआईटी ने मुकदमा कायम किया। जो अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय गए। जिन्हें उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली उनके विरुद्ध एसआईटी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। धस्माना ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के दबाव में एसआईटी प्रभावशाली लोगों के खिलाफ  कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण भाजपा के विधायक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर के पुत्र का मामला है। जिनके विरुद्ध उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई अब तक नहीं हुई। इस मामले उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी पर रोक से इनकार कर दिया है और अग्रिम जमानत भी नहीं दी है। धस्माना ने पुलिस महानिदेशक से मांग की कि वे छात्रवृत्ति घोटाले में जांच कर रही एसआईटी को निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के आदेश दें।

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