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खंडहर में तब्दील कॉलेज के नाम पर कैसे लूटा गया सरकारी धन, पढ़िए 'महाघोटाले' का सच

Wed, 06 Mar 2019 10:49 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 06 Mar 2019 10:49 AM IST
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uttarakhand scholarship scam government money was looted in the name of college
scholarship - फोटो : अमर उजाला

छात्रवृत्ति हड़पने वाले टेक वर्ड ग्रामोद्योग विकास संस्थान कालेज का अस्तित्व न होते हुए भी विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर करीब ढाई करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए। 2010 में ही कालेज की मान्यता ही खत्म हो गई थी, लेकिन बावजूद छात्रवृत्ति के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट का खेल चलता। टेक वर्ड ग्रामोद्योग विकास संस्थान के पदाधिकारियाें ने कालेज का अस्तित्व न होने के बावजूद बादस्तूर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के नाम पर छात्रवृत्ति हड़पी है।

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एसआईटी ने कालेज का इतिहास खंगाला तो पूरा सच उजागर होता चला गया। एसआईटी टीम कालेज के भौतिक सत्यापन को मौके पर पहुंची तब उनकी आंखें फटी की फटी रह गई। मौके पर किसी तरह का कालेज नहीं था, बस कालेज के नाम पर एक खंडहर अवश्य खड़ा था। यानि खंडहर को ही कालेज दर्शाकर छात्रवृत्ति हड़पने का खेल चलता रहा। एसआईटी ने छात्रवृत्ति सूची में शामिल छात्र-छात्राओं से संपर्क साधा, तो उन्होंने भी कालेज में दाखिला लेने से इंकार किया है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियाें से मिलीभगत कर यह घोटाला किया गया है। कालेज की मान्यता खत्म होने के बाद छात्रवृति की रकम कैसे जारी की गई, यह बड़ा सवाल है। 

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स्वरोजगार योजना घोटाले की जांच धीमी

छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी तो एक्शन में है, लेकिन वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना की जांच कर रही पुलिस अभी सक्रिय नहीं हो पाई है। इस मामले की जांच एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय कर रही है। सूत्राें का कहना है कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना में हुए घोटाले में कई अधिकारियों और राजनीतिज्ञाें के नाम भी सामने आ रहे है। लोगों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच में कई बड़े चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद है। 

तीन संस्थानों में साढे़ 24 करोड़ का घोटाला
छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी की तरफ से देहरादून और हरिद्वार में तीन अभियोग पंजीकृत कराए गए हैं। हरिद्वार के तीन निजी शिक्षण संस्थानाें में अब तक करीब 24 करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला सामने आ चुका है। एसआईटी इन संस्थानाें के पांच पदाधिकारियाें को गिरफ्तार कर चुकी है। अमृत लाल कालेज में करीब 14 करोड़ 85 लाख रुपये, इंस्टीट्यूट आफ प्रोफेशनल स्टीज वेदपुर रुड़की में छह करोड़ 28 लाख और टेक वर्ड ग्रामोद्योग विकास संस्थान में करीब ढाई करोड़ का फर्जीवाड़ा सामने आया है। 

एक विवि भी छात्रवृत्ति घोटाले की जद में

छात्रवृत्ति घोटाले में जल्द ही एक विवि के प्रबंधन से जुड़े अन्य शिक्षण संस्थान के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की तैयारी है। करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल संस्थानों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। रुड़की तहसील में शासन स्तर से आदेश होने बाद करीब सात माह पूर्व स्थानीय अधिकारियों ने 50 से अधिक संस्थानों की जांच की थी। इसमें छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों का सत्यापन किया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि क्षेत्र के ही आधा दर्जन से अधिक संस्थानों में छात्रवृत्ति की बात सामने आई थी।

अपर तहसीलदार सुशीला कोठियाल की ओर से एक शिक्षण संस्थान की जांच रिपोर्ट में 27 ऐसे छात्रों का ब्यौरा दिया गया है, जिनमें या तो कॉलेज प्रबंधन की ओर से अभिलेख तक नहीं प्रस्तुत किए जा सके या फिर जो अभिलेख मिले, उनमें फर्जीवाड़ा किया था। जबकि एक विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट में कई छात्रों के बाबत ऐसी ही रिपोर्ट दी गई है। जबकि एक छात्र का नाम दोबारा पंजीकृत करने की रिपोर्ट भी दी गई है। अब एसआईटी जांच ने फिर से इन संस्थानों के कच्चे चिट्ठे खोलने शुरू कर दिए हैं। वहीं सूत्रों की माने तो जिले के एक विश्वविद्यालय व उससे जुड़े एक संस्थान के खिलाफ भी घोटाले की पुष्टि हो चुकी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इनके खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

जांच में घिरे कुछ लोग विदेश यात्रा पर निकले
जांच में घिरे कई शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों के भूमिगत होने की सूचना है। वहीं चर्चाएं हैं कि इनमें से कुछ लोग विदेश यात्रा पर निकल गए हैं। खुफिया विभाग को ऐसे लोगों पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। बताया गया है कि इनमें से कुछ की जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है। एसआईटी की ओर से की जा रही कार्रवाई के बाद से छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मचा है।

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छात्रवृत्ति घोटाला: ये तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है

छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी की कार्रवाई अभी तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर बाकी है। हरिद्वार के तीन निजी शिक्षण संस्थानों की जांच में 24 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद यही संकेत मिल रहे हैं। देहरादून के शिक्षण संस्थानाें की जांच के नतीजाें का अभी इंतजार है। घोटाले को लेकर अभी कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

  छात्रवृत्ति घोटाले का सच अब बाहर आने लगा है। घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश किसी से छिपी नहीं है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर छात्रवृत्ति घोटाले को बनाई गई एसआईटी को बरगलाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी गई। नैनीताल हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एसआईटी हरकत में आई तो नतीजे भी आने शुरू हो गए हैं। इस मामले में एसआईटी की तरफ  से देहरादून और हरिद्वार में तीन अभियोग पंजीकृत कराए गए हैं। एसआईटी हरिद्वार के तीन निजी शिक्षण संस्थानों की जांच में ही अब तक करीब 24 करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला पकड़ चुकी है। घोटाले में इन संस्थानों के पांच पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अमृत लाल कालेज में करीब 14.85 करोड़ रुपये, इंस्टीट्यूट ऑफ  प्रोफेशनल स्टडीज, वेदपुर रुड़की में 6.28 करोड़ और टेकवर्ड्स ग्रामोद्योग विकास संस्थान में करीब ढाई करोड़ का फ र्जीवाड़ा सामने आया है। 

लंबे समय से छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को लेकर लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती का कहना है कि अभी तो यह महज ट्रेलर है। इस प्रकरण की पूरी पिक्चर आना बाकी है। समाज कल्याण विभाग के उन अधिकारियों के भी चेहरे बेनकाब होने हैं, जिन्हाेंने कथित तौर पर शिक्षण संस्थानों से सांठगांठ कर यह घोटाला कराया है। 

सवाल: विभागीय अधिकारियों की बारी कब?
छात्रवृत्ति घोटाले की परतें खुलने के साथ अब यह सवाल भी उठने लगे हैं कि घोटाले के जिम्मेदार समाज कल्याण अधिकारियों के  खिलाफ कार्रवाई कब होगी। निसंदेह यदि विभागीय अधिकारी सही ढंग से अपने दायित्व का निर्वहन करते तो सरकारी धन की बंदरबांट नहीं होती। छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले रविंद्र जुगरान का कहना है कि शासन में बैठे कुछ विभागीय अधिकारियों और बैंक के लोगों के संरक्षण में यह घोटाला हुआ है। शिक्षण संस्थान संचालकाें के साथ दोषी अधिकारियाें के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार को इन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर जीरो टॉलरेंस का संदेश देना चाहिए। उन्होंने जांच में आई तेजी का श्रेय नैनीताल हाईकोर्ट को दिया है।

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