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उत्तराखंड: सड़क निर्माण में अब पेड़ों की बलि अंतिम विकल्प, एनएच के निर्माण में लागू होगी ट्री ट्रांसप्लांट पॉलिसी

Thu, 17 Feb 2022 04:08 PM IST
रेनू सकलानी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 17 Feb 2022 04:08 PM IST
सार

चारधाम आलवेदर रोड परियोजना के निर्माण में हजारों पेड़ों का कटान हो चुका है। पर्यावरण आंदोलनकारी पेड़ों के कटान के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। उनकी आवाज ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय पर असर दिखाया है।

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Uttarakhand: Sacrifice of trees is now the last option in road construction, tree transplant policy will be implemented in the construction of NH
Nitin Gadkari - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)

विस्तार

राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में अब पेड़ों का कटान अंतिम विकल्प होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय वृक्षों के पर्यावरणीय महत्व को समझते हुए अब राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में ट्री ट्रांसप्लांट पॉलिसी लागू करने जा रहा है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (वन) आनंद बर्द्धन से वन विभाग, राज्य वन विकास निगम और वन व पर्यावरण से संबंधित संस्थानों के विशेषज्ञों का सहयोग और विचार लेने का अनुरोध किया गया है।

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चारधाम आलवेदर रोड परियोजना के निर्माण में हजारों पेड़ों का कटान हो चुका
लगभग 71 प्रतिशत वन क्षेत्र वाले उत्तराखंड में सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के कार्यों में हर साल हजारों पेड़ विकास की भेंट चढ़ जाते हैं। चारधाम आलवेदर रोड परियोजना के निर्माण में हजारों पेड़ों का कटान हो चुका है। पर्यावरण आंदोलनकारी पेड़ों के कटान के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। उनकी आवाज ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय पर असर दिखाया है। मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को इस संबंध में पत्र भेजा है।
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पत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में 31 जनवरी 2020 की बैठक का जिक्र किया गया है, जिसमें तय हुआ था कि राजमार्गों के निर्माण कार्यों में पेड़ों का कटान अंतिम विकल्प होगा। इसके स्थान पर सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में पेड़ों को ट्रांसप्लांट किए जाएंगे।
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इतना ही नहीं जिन राष्ट्रीय राजमार्गों पर वन प्रशासन की ओर से पेड़ों के कटान की अनुमति दे दी गई है, वहां भी पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने पर ध्यान दिया जाएगा। इससे घास के वनों, मैदानों, ग्लेशियरों के संरक्षण एवं संवर्द्धन तथा उत्तराखंड के बहुमूल्य  पारिस्थितिकीय तंत्र की रक्षा करने में मदद मिलेगी। 

प्रदेश सरकार से मंत्रालय ने राज्य वन विभाग, वन विकास निगम व वन व पर्यावरण से जुड़े अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों के सहयोग से सड़क निर्माण में वृक्षों की कटाई के मुद्दे पर विचार करने का अनुरोध किया है। सरकार से कहा गया है कि वह वन विभाग के डिविजन स्तर के  उन सभी अधिकारियों को भी ट्री ट्रांसप्लांटेशन का कार्य करने के लिए कहे, जहां वाणिज्यक दृष्टि से पेड़ों का कटान हो रहा है।

गडकरी भी भी कर गए थे संकेत

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी यह संकेत दे गए थे कि मंत्रालय जल्द ही पेड़ों के कटान के स्थान पर उन्हें ट्रांसप्लांट करने की नीति लागू करेगा। वह कुछ दिन पूर्व उत्तराखंड विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का घोषणापत्र करने के लिए देहरादून पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने चारधाम आलवेदर रोड परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण के शेष कार्य में एक भी पेड़ न काटे जाने की बात कही थी। 
 
राज्य में होना है हजारों करोड़ की सड़क परियोजनाओं का निर्माण
उत्तराखंड में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के स्तर पर फोर लेन और सड़कों और पुलों के निर्माण की हजारों करोड़ की परियोजनाओं के शिलान्यास हो चुके हैं। इनमें दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस हाईवे, दून पांवटासाहिब मार्ग, मुरादाबाद काशीपुर  फोर लेन, हरिद्वार रिंग रोड, चारधाम आलवेदर रोड परियोजना के तहत 153 किमी सड़क का निर्माण कार्य हो रहा है। 
 
मंत्रालय का पत्र हमें प्राप्त हुआ है। पेड़ों के कटान के स्थान पर ट्रांसप्लांट करने से निश्चिततौर पर वन एवं पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकीय तंत्र को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। मंत्रालय के पत्र के आधार पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।  - आनंद बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव, (वन)

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