शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनना अभी बाकी
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दो सितंबर, 1994 मसूरी गोलीकांड की 19वीं बरसी पर सोमवार को शहीद स्थल झूलाघर में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। सभी आम और खास लोगों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान आंदोलनकारियों का कहना था कि राज्य बने भले ही 13 साल हो गए, मगर शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनना अभी बाकी है। आज के ही दिन 19 साल पहले राज्य निर्माण की लड़ाई लड़ते हुए छह आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहूति दी थी।
जिनमें राय सिंह बंगारी, हंसा धनाई, बेलमती चौहान, धनपत सिंह, बलवीर सिंह नेगी, धनपत सिंह और मदनमोहन ममर्गाइं शामिल थे। पुलिस उपाधीक्षक उमाकांत त्रिपाठी को भी जान गंवानी पड़ी। हर साल शहीदों की याद में शहीद स्थल में मेले जैसा माहौल बना रहता है।
शहीद स्थल की ओर बढ़ रहा था हर कदम
सोमवार तड़के से ही हर कदम शहीद स्थल की ओर बढ़ रहा था, उन योद्धाओं को नमन करने। जिनकी शहादत पर राज्य बना है। सुबह शहीद स्थल में सर्वधर्म प्रार्थना सभा की गई। जिसमें सभी धर्मों के पुजारियों ने अरदास की। तिब्बतन महिला संगठन ने मोमबत्तियां जलाई।
श्रद्धांजलि देने वालों में शहीदों के परिजनों के अलावा कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह पंवार, दिनेश अग्रवाल, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, विधायक गणेश जोशी, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, पूर्व अध्यक्ष ओपी उनियाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, यूकेडी (पी) अध्यक्ष त्रिवेंद्र पंवार, कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत, सुशीला बलूनी, रविंद्र जुगरान, जबर सिंह पावेल, महिला आंदोलनकारी प्रमिला रावत, सुभाषिनी बर्त्वाल, भगवान सिंह धनाई, रूप सिंह कठैत, भगवती प्रसाद सकलानी, बीरेंद्र सिंह कैंतुरा, रजत अग्रवाल, बीडी रतूड़ी, डीपी भंडारी, संदीप साहनी समेत विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल थे।