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‘धर्मकांटों’ का धर्मसंकट, कंडक्टरों की ‘पौ बारह’

Wed, 02 Mar 2016 02:38 PM IST
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 02 Mar 2016 02:38 PM IST
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uttarakhand roadways remove Weigh Station.

यूपीएसआरटी के समय ये धर्मकांटे चलते थे। उत्तराखंड गठन से पहले 66 गांधी रोड ग्रामीण डिपो, हरिद्वार डिपो, हल्द्वानी और टनकपुर में धर्मकांटे लगे थे। लेकिन वर्ष 2003 में गठित उत्तराखंड परिवहन निगम ने यह व्यवस्था ही बदल डाली।

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वैसे तो बस में सामान ले जाना खतरे से खाली नहीं है लेकिन राज्य में अगर बसों से सामान ढोना ही है तो यूपी की तर्ज पर निजी कंपनियों को इसका काम देना चाहिए। इससे एक ओर जहां निगम को साफ-सुथरी आय होगी वहीं कंडक्टरों की काली कमाई पर भी ब्रेक लगेगा।
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बता दें उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) ने बसों में माल ढोने का काम निजी हाथों में सौंप रखा है। इसके हर साल टेंडर किए जाते हैं। सामान जाता तो बस से ही है लेकिन कंडक्टरों का इसमें हस्तक्षेप नहीं रहता। धर्मकांटे हटने से ड्राइवर-कंडक्टर रास्ते में कुछ भी बस में भर लें और अधिकारी ने पकड़ लिया और टिकट न बना हो तो डब्लूटी की कार्रवाई होती है और न भरा तो कंडक्टर की जेब भारी और निगम को सीधे-सीधे चपत।
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अक्सर परिवहन निगम की बसों में ऐसे बेटिकट माल व सवारी ढोने के मामले सामने आते रहे हैं। कई मामलों में यूनियनबाजी के चलते कंडक्टर को एटीआई सुविधा शुल्क लेकर छोड़ देते हैं। ऐसे में अगर यूपी की तर्ज पर यहां भी माल ढोने का काम निजी हाथों में सौंपा गया तो अनिवार्य रूप से निगम में पनप रहे भ्रष्टाचार पर सीधी नकेल लगेगी।

यूपीएसआरटीसी के समय परिवहन निगम के ट्रक चलते थे। उनमें जो सामान ढोया जाता था। बहुत पहले सामान तुलकर जाता था। परिवहन निगम के कांटे थे। उल्टा सवाल किया कि उन्हें बस तोलने के संबंध में जानकारी नहीं है। यूपी की तर्ज पर उत्तराखंड परिवहन निगम भी निश्चित तौर पर ऐसी ही नीति लागू करेगा अगर इससे फायदा हुआ।

- दीपक जैन, जीएम संचालन, उत्तराखंड परिवहन निगम

यूपी के समय जब मैं साल 1980-89 तक कंडक्टर रहा हूं। साल 1980 से 89 तक यूपीएसआरटी में तोलकर व्यावसायिक सामान को गाड़ियों में भरा जाता था। यूपी की तर्ज यहां भी व्यावसायिक सामान ढोने की व्यवस्था निजी हाथों में सौंप देनी चाहिए। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और चेकिंग अथॉरिटी और चालक-परिचालकों को जो परेशानी का सामना करना पड़ता है उससे भी छुटकारा मिलेगा।
- रवि पचौरी, महामंत्री, उत्तराखंड रोडवेज इंपलाइज यूनियन

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