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उत्तराखंड: 'बीमार' कर्मियों को गुड बाय कहेगा परिवहन निगम

Thu, 13 Aug 2015 01:28 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 13 Aug 2015 01:28 PM IST
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uttarakhand roadways corporation say good bye to ill employee.

करोड़ों के घाटे में चल रहा उत्तराखंड परिवहन निगम मेडिकल ग्राउंड बनाकर ड्यूटी दिए बिना पदों पर जमे 186 कर्मचारियों से गोल्डन हैंड शेक कर गुड बाय कहेगा।

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गोल्डन हैंड शेक स्कीम स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना का बेहतर विकल्प है जिसमें तमाम रिटायरमेंट सुविधाओं के साथ कर्मचारी की सेवाएं समाप्त की जाती है। निगम के निदेशक मंडल ने शारीरिक तौर पर अक्षम होने के बावजूद सेवाओं पर बने हुए कर्मचारियों के लिए इसे लागू करने का निर्णय किया है।
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उत्तराखंड परिवहन निगम का वार्षिक खर्चा लगभग 470 करोड़ है जबकि बसों के संचालन व अन्य आय संसाधनों से 420 करोड़ की आय होती है। आय और खर्च के बीच लगातार फासला बढ़ रहा है तीन वर्ष पहले यह घाटा 25 करोड़ था जो अब दोगुना पहुंच गया है।
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जिसमें लगभग सात हजार कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर सर्वाधिक खर्चा है। अक्षम कर्मचारियों में कुछ एक ऐसे भी हैं जो नियमित ड्यूटी से बचने के लिए मेडिकल का सहारा ले रहे हैं। साथ ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) को अपनाने से बचते हैं।

मेडिकल आधार पर निदेशक मंडल का निर्णय

uttarakhand roadways corporation say good bye to ill employee.

निगम के निदेशक मंडल की पांच अगस्त को मुख्य सचिव व चेयरमैन राकेश शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में घाटे को कम करने पर चर्चा हुई थी। बैठक में निगम में अक्षम (मेडिकल आधार) पर चालक, परिचालक व अन्य स्टाफ के लगभग 186 कर्मचारियों की सेवाओं पर विचार हुआ।

निगम के सामने सबसे बड़ी दिक्कत इन कर्मचारियों के वीआरएस नहीं लेने की है। ऐसे में निदेशक मंडल ने गोल्डन हैंड शेक देकर सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया है।

नहीं गठित होगा मेडिकल बोर्ड
निदेशक मंडल ने दोबारा से मेडिकल बोर्ड गठित कर अक्षम कर्मचारियों का परीक्षण करवाने के पक्ष में नहीं है। विकलांगता और अन्य शारीरिक दिक्कतों को लेकर जिन कर्मचारियों ने मेडिकल सर्टिफिकेट दे रखे हैं उन्हीं को आधार बना उनकी सेवानिवृत्ति की जाएगी।

निगम के निदेशक मंडल ने गोल्डन हैंड शेक कर शारीरिक रूप से सेवाएं देने में असमर्थ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया है। निदेशक मंडल का मानना है कि इससे कर्मचारी और निगम को लाभ होगा। मंडल के निर्णय अनुसार निगम प्रबंधन प्रक्रिया को शुरू करेगा।
- ब्रिजेश संत, एमडी परिवहन निगम

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