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उत्तराखंडः आज भेजी जाएगी बसों की अंतिम खेप, दोबारा तकनीकी जांच के बाद ली जाएंगी नई बसें

Mon, 23 Dec 2019 11:18 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 23 Dec 2019 11:18 AM IST
सार

  • टाटा कंपनी के पंतनगर प्लांट में गियर लीवर का नया डिजाइन तैयार करने में जुटी विशेषज्ञों की टीम

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uttarakhand roadways bus Gear lever problem in tata company buses
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

सीआईआरटी विशेषज्ञों की तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद परिवहन निगम प्रबंधन की ओर से टाटा कंपनी से खरीदी गई सभी नई बसों को कंपनी के पंतनगर प्लांट भेज दिया है। परिवहन निगम अधिकारियों के मुताबिक बसों की अंतिम खेप सोमवार को पंतनगर भेजी जाएगी। टाटा कंपनी की ओर से सभी बसों के गियर लीवर के डिजाइन में बदलाव करने व विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट दोबारा मिलने के बाद ही इन बसों को लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।  

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कुछ माह पहले परिवहन निगम प्रबंधन ने टाटा कंपनी से 150 बसें खरीदी थी। कंपनी की ओर से दो माह पूर्व बसों की आपूर्ति भी कर दी गई। परिवहन विभाग में पंजीकरण कराने के साथ ही बसों को सड़कों पर भी उतार दिया गया लेकिन तमाम बसें उस समय विवादों के घेरे में आ गई जब चलती बसों के गियर लीवर टूटने लगे। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने बसों के संचालन पर रोक लगा दी थी।
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साथ ही कंपनी को दिए जाने वाले किसी भी प्रकार के वित्तीय भुगतान पर भी रोक लगा दी थी। इसके बाद गियर लीवर की तकनीकी जांच करने की जिम्मेदारी सीआईआरटी पुणे के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंप दी। सीआईआरटी के विशेषज्ञों की टीम ने बसों की जांच की और पाया कि गियर लीवर के डिजाइन में खामी है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने गुणवत्ता पर भी तमाम सवाल उठाए। जांच के बाद सीआईआरटी की टीम ने 16 बिंदुओं पर अपनी जांच रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी। जिसमें सिफारिश की गई कि बसों को टाटा कंपनी को भेजकर गियर लीवर के डिजाइन में बदलाव कराया जाए।  
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आखिरकार तकनीकी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही प्रबंध निदेशक ने सभी बसों को टाटा कंपनी को लौटाने का आदेश जारी कर दिया। निदेशक के आदेश पर ही सभी बसों को टाटा कंपनी को लौटा दिया गया है। अब टाटा कंपनी के तकनीकी विशेष बसों के नए डिजाइन तैयार करने की कवायद में जुट गए हैं। महाप्रबंधक दीपक जैन का कहना है कि गियर लीवर के डिजाइन में बदलाव करने के बाद तकनीकी टीम द्वारा नए सिरे से जांच किए जाने के बाद ही बसों को लिया जाएगा।

अशोक लेलैंड की बसों की जांच को जाएगी तकनीकी टीम

परिवहन निगम की ओर से गठित तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जल्द ही अशोक लेलैंड बसों की जांच के लिए जाएगी। तकनीकी टीम के साथ कुछ विशेषज्ञ चालकों को भेजा जा रहा है, जो यह जांच करेंगे कि बसें निर्धारित मानकों अनुरूप हैं या नहीं? तकनीकी टीम की जांच रिपोर्ट के बाद बस खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

‘बूढ़ी बसों’ से हादसों का खतरा

राज्य परिवहन निगम के बेड़े में 300 से अधिक ऐसी बसें शामिल हैं, जिनकी अवधि पूरी हो चुकी हैं। इस कारण आए दिन इनमें तकनीकी खराबी होती रहती है। इन पुरानी बसों के संचालन होने से आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है। 

परिवहन निगम के बेड़े में 1364 बसें शामिल हैं, जिनमें से 300 से अधिक बसों की निर्धारित मानकों के मुताबिक अवधि पूरी हो चुकी है। निगम के ही प्रावधानों के अनुसार छह लाख किलोमीटर चलने के बाद पहाड़ों पर बसों का संचालन नहीं किया जा सकता है।

जबकि आठ लाख किलोमीटर दूरी तय करने के बाद मैदानी क्षेत्र में किसी बस को संचालित नहीं किया जा सकता है लेकिन निगम में 300 से अधिक ऐसी बसे हैं, जो इससे अधिक दूरी तय कर चुकी हैं। परिवहन निगम के आंकड़ों पर नजर डालें तो दो दिन में औसतन एक बस को बेड़े से बाहर कर दिया जाता है। इस हिसाब से एक साल में 180 बसें बेड़े से बाहर हो रही हैं लेकिन इन बसों की जगह नई बसें नहीं आने की वजह से निगम में बसों की भारी कमी बनी हुई है। 

उधर परिवहन निगम कर्मचारी कर्मचारी संगठन मांग उठा रहे हैं कि निगम में कम से कम 2000 बस हों। निगम ने टाटा और अशोक लेलैंड कंपनी से 300 बसें खरीदी हैं। टाटा कंपनी की ओर से बसों की आपूर्ति कर दी गई, लेकिन गियर लीवर में खराबी होने के चलते तमाम बसों को कंपनी को लौटा दिया गया है।

यूपी में 14500 तो उत्तराखंड में महज 1364 बसें 

राज्य गठन के समय उत्तराखंड के हिस्से में 857 बसें आईं थी, जबकि उस समय उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के पास 7000 बसें थी। वर्तमान में यूपी परिवहन निगम में बेड़े में 14500 बसें शामिल हैं जबकि उत्तराखंड परिवहन निगम 857 से बढ़ाकर अभी तक 1364 बसें ही संचालित कर पाया है।

बसों की कमी के चलते कुछ पुरानी बसों का संचालन किया जा रहा है लेकिन पर्वतीय इलाकों में ऐसी एक भी बस नहीं संचालित की जा रही है। प्रबंधन की ओर से 300 नई बसें खरीदी गई हैं। इनकी आपूर्ति सुनिश्चित होने के बाद बसों की संख्या बढ़कर 1600 के आसपास पहुंच जाएगी।
- दीपक जैन, महाप्रबंधक 

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