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रिटायर्ड आईएफएस ने उठाया बच्चों को शिक्षित और रोगियों को स्वस्थ करने का बीड़ा, रह चुके हैं चार देशों के राजदूत

Tue, 27 Oct 2020 12:07 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 27 Oct 2020 12:07 AM IST
सार

  • गरीब बच्चों के लिए खोला जूनियर हाईस्कूल, ढाई सौ बच्चों को पढ़ा रहे निशुल्क
  • चार देशों के दूतावास में राजदूत की सेवा दे चुके हैं रानीखेत के भंडारी
  • पांच देशों में विभिन्न राजनयिक पदों पर भी रह चुके हैं 

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Uttarakhand: Retired Ifs Officer Chandra Mohan Bhandari Doing Good Job for Poor Children and Patients
चंद्रमोहन भंडारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईएफएस अधिकारी की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद जहां अधिकारी पूरी तरह से अपने घर परिवार को समय देते हैं या किसी संगठन से जुड़कर कोई अन्य तरह का कार्य करते हैं, वहीं उत्तराखंड में रानीखेत के एक आईएफएस अधिकारी ने सेवानिवृत्त होने के बाद गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा और रोगियों को स्वास्थ्य लाभ देने का बीड़ा उठाया है। वह आईएफएस रहने के दौरान आठ देशों के दूतावास में बतौर राजदूत अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 

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मूल रूप से रानीखेत केमवड़ा गांव के रहने वाले चंद्र मोहन भंडारी (72) जून 2009 में आईएफएस की सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवा के दौरान वह  कंबोडिया, संयुक्त अरब अमीरात, लिथोआानिया और पोलैंड के दूतावास में राजदूत रहे। टोरंटो, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, नाइजीरिया और नार्वे के दूतावास में विभिन्न राजनयिक पदों पर रहे।
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सेवाकाल के दौरान भंडारी ने विभिन्न देशों की संस्कृति को समझा लेकिन भारत के वेदों के समान ज्ञान उन्हें किसी देश की संस्कृति में नहीं मिला। इस दौरान उन्होंने योग में महारत हासिल की। साथ ही मर्म चिकित्सा, आयुर्वेद और पंचकर्म का भी ज्ञान लिया।
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सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने 2016 में काशीपुर गढ़ीगंज में स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त अपने बड़े भाई हरीश चंद्र भंडारी के साथ मिलकर देवांबर वेद विज्ञान एवं आरोग्य धाम के नाम से एक आश्रम की स्थापना की।

250 बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे

यहां गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए उनकी ओर से जूनियर हाईस्कूल खोला गया है जिसमें वर्तमान में 250 बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सोमवार को अपने आश्रम में आयोजित पत्रकार वार्ता में भंडारी ने बताया कि उनके आश्रम में मर्म चिकित्सा और पंचकर्म से असाध्य रोगों का भी इलाज किया जा रहा है। लोगों को योग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। भंडारी का परिवार विदेश में रहता है और बच्चे ही उन्हें आश्रम चलाने में मदद करते हैं। 

भंडारी ने बताया कि आश्रम खोलने की प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता के संस्कारों और पहाड़ के सामाजिक परिवेश से मिली। रानीखेत के मवड़ा गांव में भी उनकी ओर से योग शिविर आयोजित किए जाते हैं। छह से 11 नवंबर तक आश्रम में एक आवासीय शिविर का आयोजन किया जाएगा जिसमें योग और मर्म चिकित्सा का अभ्यास कराया जाएगा। इसके लिए आश्रम में पंजीकरण कराया जा सकता है। 

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