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उत्तराखंड: हर्षिल-छितकुल लम्खागा पास पर सेना का बचाव अभियान बंद, दो ट्रेकर अब भी लापता
Sat, 23 Oct 2021 10:29 PM IST
अलका त्यागी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
Published by: अलका त्यागी
Updated Sat, 23 Oct 2021 10:29 PM IST
सार
हर्षिल से 14 अक्तूबर को 17 सदस्यीय दल किन्नौर के छितकुल के लिए निकला था। इसमें 11 ट्रेकर और छह पोर्टर शामिल थे। 17 और 18 अक्तूबर को भारी बर्फबारी में 11 पर्यटक फंस गए थे।
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विस्तार
हर्षिल से लम्खागा दर्रा होते हुए छितकुल की ट्रेकिंग के दौरान लापता हुए दो ट्रेकरों की तलाश के लिए जारी सेना ने बचाव अभियान बंद कर दिया गया है। सर्च ऑपरेशन के तहत सात ट्रेकरों के शव बरामद किए गए हैं। दो घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। दो ट्रेकर अब भी लापता हैं। वहीं, हिमाचल के छितकुल में तैनात आईटीबीपी की टीम का सर्च अभियान अब भी जारी है।
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हर्षिल से 14 अक्तूबर को 17 सदस्यीय दल किन्नौर के छितकुल के लिए निकला था। इसमें 11 ट्रेकर और छह पोर्टर शामिल थे। 17 और 18 अक्तूबर को भारी बर्फबारी में 11 पर्यटक फंस गए थे। नेपाल मूल के छह पोर्टर पैदल ही सांगला के लिए बर्फ में निकल गए। पोर्टरों की सूचना पर ट्रेक पर फंसे ट्रेकरों के लिए सेना, आईटीबीपी, वायु सेना और एसडीआरएफ की ओर से सर्च एंड रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। इस दौरान सात ट्रेकरों के शव बरामद किए गए।
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पांच शव हर्षिल पुलिस को सौंपे गए थे। दो शव हिमाचल आईटीबीपी को मिले थे। दो ट्रेकर अब भी लापता हैं। मौसम खराब होने के कारण अब सर्च अभियान रोक दिया गया है। नौंवी बिहार रेजीमेंट के कर्नल राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मौसम खराब होने के चलते सर्च ऑपरेशन जारी रखना संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने एसडीआरएफ के फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू करने के लिए अनुरोध पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने की बात कही। वहीं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल का कहना है कि हिमाचल छितकुल में तैनात आईटीबीपी की ओर से लापता पर्यटकों की खोजबीन की जा रही है।
बंगाली पर्यटकों ने की थी छितुकल-नेलांग ट्रेक की खोज
छितकुल किन्नौर-नेलांग ट्रेक को पश्चिम बंगाल के बुजुर्ग दंपती ने अपने साथियों के साथ वर्ष 2009 में खोजा था। तब बुजुर्ग दंपती ने इस ट्रेक को आईटीबीपी की पेट्रोलिंग के लिए एक आदर्श ट्रेक बताया था। अब तक इस ट्रेक पर सैकड़ों ट्रेकर्स जा चुके हैं। पश्चिम बंगाल के बुजुर्ग दंपती तपन पंडित और ऊषा पंडित ने अपने साथियों शंकर मंडल व सुबर्तो कुंती के साथ 10 जून 2019 को हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के छितकुल से उत्तराखंड के नेलांग के लिए यात्रा शुरू की थी। दल नागोस्ती, रानी कंडा, डुंथी, आईटीबीपी के पड़ाव वाले निदाल तक की यात्रा दो दिन में पूरी करने के बाद क्यारकोट, आंरसूमांग ग्लेशियर से चोरगाड उत्तरी बामक, चोर गाड स्राउट और ढुमकू होते हुए 18 जून को नेलांग पहुंचे थे। इसी ट्रेक पर हुए हादसे में सात बंगाली ट्रेकर्स ने जान गंवाई है।