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लोगों को नहीं भायी सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी

अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 21 May 2017 10:32 AM IST
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trivendra singh rawat
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उत्तराखंड सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी लोगों को रास नहीं आई है। यही कारण है कि लाखों की जनसंख्या वाले शहर में केवल तीन लोगों ने इस पॉलिसी के तहत सरकार को अपनी जमीन देने में दिलचस्पी दिखाई है।
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पॉलिसी में आर्थिक क्षतिपूर्ति का प्रावधान जोड़े जाने के बावजूद योजना के लिए बेहद कम आवेदन आने से अधिकारी भी परेशान हैं। वह पॉलिसी का प्रचार-प्रसार न होने को इसका कारण बता रहे हैं।


लैंड बैंक की कमी के कारण केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पाई है। विशेषकर आवासीय परियोजनाओं के लिए जमीन नहीं मिल पाई। इसलिए सरकार ने जमीन की व्यवस्था करने के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी तैयार की। लेकिन लोगों को सरकार की यह पॉलिसी पसंद नही आई है।

एमडीडीए ने 29 अप्रैल 2017 को विज्ञापन जारी कर जमीन उपलब्ध कराने के लिए आवेदन मांगे। लोगों को 15 दिनों के भीतर पॉलिसी के तहत अपनी जमीन देने के लिए आवेदन करना था लेकिन इस अवधि में केवल तीन लोगों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने कुल 160 बीघा जमीन पॉलिसी के तहत सरकार को देने की पेशकश की है। 

कमेटी करेगी जांच
पॉलिसी के तहत मिलने वाले आवेदनों की जांच प्राधिकरण की कमेटी करेगी। यह जमीनों की उपयुक्तता के आधार पर उसे पॉलिसी में शामिल करने या न करने पर निर्णय लेगी। पॉलिसी के तहत कम से कम एक एकड़ भूमि के लिए आवेदन किया जा सकता है। 

लैंड पूलिंग पॉलिसी के मुख्य लाभ
- पॉलिसी के तहत कृषि लैंड यूज वाली भूमि देने पर प्राधिकरण उसक ा अपने खर्च पर डेवलपमेंट करेगा। साथ ही उसका लैंड यूज बदलकर आवासीय या व्यावसायिक कराएगा। जमीन का एक निर्धारित हिस्सा प्राधिकरण अपने पास रखेगा जबकि शेष विकसित की हुई भूमि बदले हुए लैंड यूज के साथ भू स्वामी को लौटा दी जाएगी। 
- विकसित भूमि के बदले आर्थिक क्षतिपूर्ति लेने का विकल्प भी उपलब्ध है। इसके तहत भू स्वामी को भू अधिग्रहण में दिए जाने वाले अधिकतम मुआवजे के बराबर धनराशि दी जाएगी। यह सर्किल रेट का ढाई से लेकर चार गुना तक हो सकता है। 
- पहले जमीन के बदले आर्थिक क्षतिपूर्ति (कैपिटल गेन) लेने पर 30 फीसदी तक टैक्स अदा करना पड़ता था। इस वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार ने कैपिटल गेन में टैक्स समाप्त कर दिया है। ऐसे में जमीन के बदले आर्थिक क्षतिपूर्ति लेने वालों को टैक्स नहीं देना पड़ेगा। 

पॉलिसी अच्छी है लेकिन इसका प्रचार-प्रसार ढंग से नहीं हुआ है। लोगों को योजना के संबंध में जानकारी नहीं है। हम पॉलिसी का प्रचार-प्रसार करने के बाद दोबारा लोगों से आवेदन मांगेंगे। 
- डा. वी षणमुगम, उपाध्यक्ष, एमडीडीए

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