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पुलिसकर्मियों की 'आग' बुझाने आए CS, बोले नहीं है पैसा

Thu, 20 Aug 2015 01:55 PM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 20 Aug 2015 01:55 PM IST
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uttarakhand police protest for salary.

उत्तराखंड के मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस कांस्टेबल को रिवाइज ग्रेड-पे के आधार पर एरियर देना संभव नहीं है।

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पुराने ग्रेड-पे के आधार पर छठवें वेतन आयोग का लाभ जनवरी 2016 से दिया जा चुका है। उन्होंने एरियर नहीं देने की बात तो कही, लेकिन पिछले डेढ़ साल में दी गई 19 सुविधाओं की सूची भी सामने रखी।

पिछले दिनों पुलिस कांस्टेबलों द्वारा काली पट्टी बांधकर विरोध-प्रदर्शन करने से हुई बदनामी का हैंग-ओवर बना हुआ है। परिस्थितियां पीएचक्यू के नियंत्रण से बाहर होती देख मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने स्वयं कमान संभाल ली।
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अचानक बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव ने कहा कि हर पुलिसकर्मी की समस्या सरकार की प्राथमिकताओं में है, लेकिन राज्य में ऐसे कई कैडर हैं, जिन्हें सेटलमेंट की डेट से ही एरियर मिला। पुलिस कांस्टेबल की मांग पूरी करने के लिए ही 110 करोड़ रुपए चाहिए।
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बाकी नौ कैडर भी जोड़ लो तो सभी की मांग पूरी करने के लिए 2200 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। राजकोष की स्थिति ऐसी नहीं है कि यह मांग पूरी की जा सके। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश इसी महीने ऑनलाइन होने वाली है, ऐसे में वेतन या एरियर से जुड़े मामले में निर्णय लेना सैद्धांतिक रूप से ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कांस्टेबल को सबसे ज्यादा वेतन देने वाले तीन प्रदेशों में उत्तराखंड भी शामिल है। इसके अलावा दिल्ली और यूपी ने ही इतना वेतन दिया है। सरकार ने भत्ते बढ़ाने जैसी 19 सुविधाएं भी दी हैं, उन्हें भी देखा जाना चाहिए। यदि कोई दिक्कत है तो किसी भी कांस्टेबल के लिए विभाग और सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं।

फिलहाल कार्रवाई का कोई इरादा नहीं

uttarakhand police protest for salary.

मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने एक सवाल के जवाब में यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई का फिलहाल कोई इरादा नहीं है, बातचीत के रास्ते खुले हैं। कभी कभार गलती हो जाती है, लेकिन हम आगे की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।

यह है पूरा मामला
सिपाहियों समेत सभी को 2008 में छठवें वेतन मान का लाभ दिया गया था। 2011 में कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल का ग्रेड-पे बढ़ा तो उन्होंने मांग उठाई कि जो रिवाइज ग्रेड-पे है उसी के आधार पर जनवरी 2016 से एरियर दिया जाए।

2008 में जब छठा वेतन मान मिला तब कांस्टेबल का ग्रेड-पे 1900 था लेकिन 2011 में 2000 हो गया। इसी तरह से हेड कांस्टेबल का 2000 से 2400 हो गया। कांस्टेबल बाद के ग्रेड-पे के हिसाब से जनवरी 2016 से एरियर की मांग कर रहे हैं।

कोर्ट में समानता और बाहर एरियर की लड़ाई
रिवाइज ग्रेड पे के आधार पर जनवरी 2006 से एरियर देने के नाम पर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। सरकार कहती है कि दर्जन भर विभाग ऐसे हैं कि जिन्हें रिवाइज ग्रेड पे के आधार पर सेटलमेंट की डेट से ही लाभ मिला।

लेकिन वहीं सचिवालय, राजस्व, अधीनस्थ न्यायालय, शिक्षा विभाग, विपणन व संस्कृत शिक्षा समेत नौ विभागों के कर्मचारियों को रिवाइज ग्रेड-पे के आधार पर जनवरी 2006 से लाभ देने के शासनादेश हाईकोर्ट में पहले ही लगे हैं। एकाध कर्मचारी संगठन को तो 2014 में 2006 से लाभ दिया गया।

दरअसल, सरकार ने भी चेहरे देखकर लाभ देने वाली जो नीति अख्तियार की, उससे भी अब परेशानी खड़ी हो रही है। उधर, उच्च न्यायालय में जो मामला विचाराधीन है, उसमें छठवें वेतनमान का लाभ दिए जाने का मुख्य मुद्दा है। जबकि छठवां वेतनमान दिया जा चुका है और सरकार अपना शपथपत्र भी दाखिल कर चुकी है।

हाई कोर्ट में जो मामला है वो संविधान के अनुच्छेद 14 का है जिसमें समानता के अधिकार नहीं मिलने का मुद्दा है। इस रिट में 488 पुलिसकर्मी याची हैं। शासन ने पुलिसकर्मियों के साथ एक और खेल किया, जब दिसंबर 2012 में रिवाइज ग्रेड-पे का शासनादेश जारी किया तो उसमें लाभ देने की काल्पनिक व वास्तविक तारीख वही 12 दिसंबर 2012 दी गई।

यदि इसमें काल्पनिक तारीख जनवरी 2006 भी दी होती तो भविष्य में या फिर सातवां वेतन मान लागू होने के बाद पुलिसकर्मियों को ज्यादा लाभ मिलता। लेकिन छोटी-छोटी तकनीकी उलझनों ने इस समस्या को बड़ा बना दिया और अनुशासित फोर्स अनुशासनहीनता कर गुजरी।

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