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ऐसे ही रहा तो अभी भागेंगे कई और 'भूरा'

Sun, 21 Dec 2014 02:27 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 21 Dec 2014 02:27 AM IST
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uttarakhand police condition.

एके 47 धारी सिपाहियों के दस्ते को पीछे धकेलते हुए कुख्यात बदमाश भूरा भाग गया। ये कोई अनहोनी नहीं। सिस्टम ने ही हमारे सिपाहियों को ऐसा बना दिया है कि कभी भी कोई भूरा ऐसा दुस्साहस कर सकता है।

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विशेषज्ञ कहते हैं कि पुलिस कर्मियों के ‘रणछोड़’ रवैये और हथियारों के न चल पाने जैसी किरकिरी दोबारा न हो, इसके लिए विभागीय कार्यप्रणाली को नए सिरे से चुस्त-दुरुस्त करना ही पड़ेगा।
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मुख्यमंत्री तक की नींद उड़ाने वाली यह घटना बीते 14 साल में अपराध व कानून व्यवस्था के मद्देनजर सूबे की मित्र पुलिस के लिए आईना है। यहां की पुलिस ने कभी भी संगठित अपराध को केंद्र बिन्दु बनाकर जवानों को उसी हिसाब से तेज-तैयार करने की जहमत नहीं उठाई।
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पुलिस वालों को प्रशिक्षण के दौरान जाबांजी के गुर नहीं सिखाए जाते। प्रशिक्षण बस शारीरिक अभ्यास, कुछ पढ़ाई लिखाई और साफ सफाई भर का काम रह गया। विशेष सतर्कता बरतने की ट्रेनिंग देने का चलन भी खत्म हो गया। नियमित फायरिंग की कवायद इसीलिए कराई जाती है ताकि कैदी के भागने या मुठभेड़ के समय ये विद्या काम आए। लेकिन इसका भी बुरा हाल है।

एसटीएफ के भी बुरे हैं हाल

uttarakhand police condition.

नए हालात केअनुसार एसटीएफ ने भी अपने को नहीं ढाला। राज्य गठन के बाद से ही अपराध जगत में एक भी बड़ी कामयाबी एसटीएफ के खाते में नहीं है। पड़ोसी राज्यों से कोई समन्वय कभी नहीं दिखा। इस समय भी एसटीएफ के पास पूर्णकालिक एसपी नहीं है।

पहले कुख्यात कै दियों को बाहर ले जाने से पहले साथ जाने वाले पुलिस कर्मियों को निर्देशित करने का चलन था। इसमें गंतव्य जिले की पुलिस को सूचना, थाना दाखिला व अन्य सावधानियां तय होती थीं। इसे अब खत्म ही कर दिया गया है। अगर यह गंभीरता दिखाई गई होती तो 40 मुकदमों वाले बदमाश भूरा को टैम्पो से नहीं ले जाया जाता।

लापता हैं ‘गुलदार’
आतंकी गतिविधियों से निबटने के लिए पांच साल पहले राज्य में ‘गुलदार’ नामक पुलिस बल का गठन किया गया। इसके 120 पुलिसकर्मियों ने आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में विशेष प्रशिक्षण लिया। देहरादून, हरिद्वार व ऊधमसिंहनगर में इकाइयां स्थापित हुईं। अब यह बल कहां और किस हाल में है, किसी को खबर नहीं।

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