एक्सक्लूसिव: गंगोत्री से केदारनाथ धाम का फासला घटाने को उठा पहला कदम
- भटवाड़ी से बूढ़ाकेदार तक मार्ग बनाने के लिए सर्वेक्षण की मंजूरी
- प्रारंभिक सर्वे के लिए बजटीय स्वीकृति का शासनादेश जारी
- दावा- त्रियुगी नारायण तक मार्ग बना तो घट जाएगी 144 किलोमीटर की दूरी
विस्तार
सड़क कनेक्टिविटी और पुलों के निर्माण की उत्तराखंड सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल एक और महत्वाकांक्षी मोटर मार्ग के निर्माण की दिशा में पहला कदम उठ गया है। सरकार गंगोत्री से बूढ़ाकेदार और केदारनाथ का नया रोड नेटवर्क तैयार करने की संभावना तलाश रही है।
भटवाड़ी से बूढ़ाकेदार तक 45.50 किमी मार्ग बनाने के लिए सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी गई है। पहले चरण की इस प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृति के तहत मार्ग के सर्वे के लिए 6.56 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। सचिव लोनिवि आरके सुधांशु के निर्देश पर इसका शासनादेश जारी कर दिया गया है।
कुछ महीनों पूर्व जब मुख्यमंत्री बूढ़ाकेदार गए थे, तब स्थानीय लोगों ने सदियों पुराने इस पैदल चार धाम मार्ग को मोटर मार्ग में बदलने की मांग की थी। मार्ग निर्माण का यह मामला ‘अमर उजाला’ के एक कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के सामने भी उठा था। पिछले करीब एक दशक से इस मोटर मार्ग को बनाने की संभावना को लेकर शासन स्तर पर भी कसरत चल रही थी।
210 किमी ही रह जाएगी दूरी
अब मुख्यमंत्री के आदेश पर मार्ग के पहले चरण के लिए सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी गई है। टिहरी निवासी आरपी उनियाल इस मार्ग को बनाए जाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से लगातार पत्राचार कर रहे हैं।
उनियाल के मुताबिक, बूढ़ाकेदार तक मोटर मार्ग बनने के बाद तीर्थाटन का नया सर्किट तैयार होगा। इससे आगे घुत्तू वाया पावली कांठी से त्रियुगीनारायण तक दूसरे चरण के मोटर मार्ग निर्माण से यह सोनप्रयाग से जुड़ जाएगा।
इस तरह यह चारधाम मार्ग से कनेक्ट हो जाएगा। उनियाल का दावा है कि अभी गंगोत्री से केदारनाथ जाने के लिए करीब 354 किमी का सफर तय करना पड़ता है, लेकिन प्रस्तावित मोटर मार्ग के बनने से यह दूरी करीब 210 किमी ही रह जाएगी। इस तरह करीब 144 किमी दूरी कम हो जाएगी।
यह योजना लंबे समय से प्रस्तावित है। शासन ने पहले चरण के प्रारंभिक सर्वे का आदेश जारी कर दिया है। सर्वे के बाद मोटर मार्ग की डीपीआर तैयार की जाएगी।
- हरिओम शर्मा, विभागाध्यक्ष, लोनिवि