उत्तराखंड: जुड़वा बहनों का PCS में कमाल
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उत्तराखंड में की दो जुड़वा बहनों ने पीसीएस में कमाल कर दिखाया है। जी हां, हल्द्वानी आरटीओ ऑफिस में तैनात परिवहन कर अधिकारी युक्ता मिश्रा और उनकी जुड़वा बहन मुक्ता मिश्रा ने इतिहास रच दिया है। महिला वर्ग में मुक्ता ने प्रदेश में प्रथम तो युक्ता ने द्वितीय स्थान हासिल की है।
चमोली की रहने वाली जुड़वा बहनों ने शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश में अपने माता हेमा और पिता केडी मिश्रा का नाम रोशन कर दिया है। आरटीओ ऑफिस की महिला अधिकारी सीमा विश्वकर्मा ने पीसीएस में बाजी मारी है। पीसीएस का रिजल्ट शनिवार को आया तो परिवहन कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई।
इस कार्यालय की परिवहन कर अधिकारी चमोली निवासी युक्ता मिश्रा ने पीसीएस में सातवीं रैंक हासिल की। युक्ता की बहन मुक्ता ने भी चौथी रैंक हासिल कर महिला वर्ग में प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर लिया, जबकि युक्ता दूसरे स्थान पर रहीं। युक्ता ने बताया कि दोनों बहनें पढ़ाई में एक दूसरे को सपोर्ट करती थीं।
दोनों ने कहा कि उनके माता पिता, छोटे और बड़े भाइयों ने पढ़ाई में काफी सहयोग प्रदान किया। उन्होंने सफलता का श्रेय अपनी गाइड करुणा मिश्रा जोशी को दिया है।
युक्ता के साथ कार्यरत बागेश्वर निवासी परिवहन अधिकारी सीमा विश्वकर्मा ने पीसीएस में 19वीं रैंक हासिल की है। उसके भाई प्रकाश चंद्र अल्मोड़ा एडीएम के पद पर तैनात हैं। सीमा ने अपनी सफलता का श्रेय गाइड डाक्टर अजय प्रताप सिंह और परिवार के लोगों को दिया है।
वैभव का सपना हुआ पूरा
देहरादून के होनहार वैभव गुप्ता में पीसीएस परीक्षा में प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। वैभव इस वक्त बैंगलोर में इंकम टैक्स इंस्पेक्टर हैं। उनके लिए यह सफलता इसलिए भी अहम है क्योंकि वह तीन बार सिविल सर्विस के इंटरव्यू में शामिल होने के बावजूद सफल नहीं हो पाए।
वैभव का कहना है कि वह पीसीएस में जाकर भ्रष्टाचार खत्म करते हुए फाइलों की रफ्तार बढ़ाएंगे। इंजीनियर्स एन्क्लेव निवासी वैभव गुप्ता की 12वीं तक की पढ़ाई ओंकारानंद सरस्वती निलायम ऋषिकेश से हुई। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से पेपर टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की। इसके बाद दो साल तक इंफोसिस मैसूर में जॉब की।
वहां से एसएससी के मार्फत चयन हो गया और वह वर्ष 2012 में बैंगलोर में इंकम टैक्स इंस्पेक्टर बन गए। वैभव का कहना है कि उनकी पहले से ही यह ख्वाहिश रही है कि वह इंजीनियरिंग के सीमित दायरे के बजाए पब्लिक सेक्टर में जॉब करें। पीसीएस क्वालिफाई करना उनके लिए एक बेहतर रास्ता है।
छह घंटे की स्टडी काफी
यहां न केवल वह भ्रष्टाचार को खत्म करने का प्रयास करेंगे बल्कि फाइलों की सरकारी रफ्तार को भी बढ़ाएंगे। वैभव के पिता मदनमोहन गुप्ता यूपीसीएल में टेक्निशियन ग्रेड 2 अधिकारी हैं जबकि मां शशि गुप्ता गृहिणी हैं। उनके छोटे भाई अर्पित गुप्ता ने हाल ही में बीटेक किया है।
वैभव ने बताया कि आयोग की परीक्षा में किस्मत आजमाने के लिए विषयों के बेसिक्स क्लियर होने जरूरी हैं। अब तक विषयों का विकल्प होता था लेकिन नए पैटर्न में यह समाप्त कर दिया गया है। इसके बावजूद यह जरूरी है कि नए पैटर्न के भी सभी विषयों को भली भांति पढ़ा जाए। समाचार पत्र और खबरों से प्रतिदिन रूबरू हों।
अनुशासन भी जरूरी है। हां परीक्षा की तैयारी के लिए यह जरूरी नहीं कि आप दिन रात किताबों में घुसे रहें बल्कि प्रतिदिन पांच से छह घंटे की स्टडी भी सफलता की राह आसान बना सकती है। वैभव ने दून में वेदांत एकेडमी से कोचिंग प्राप्त की है।