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उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2019: छोटी सरकार को अपने पैरों पर खड़ा करने की दरकार
Wed, 02 Oct 2019 11:45 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 02 Oct 2019 11:45 AM IST
सार
- ग्राम पंचायतें केंद्र और राज्य से मिल रहे अनुदान के ही भरोसे
- अधिनियम में पंचायतों को कर संग्रह का अधिकार, नहीं हो रहा प्रयोग
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मतदान (सांकेतिक तस्वीर)
विस्तार
पंचायतों को केंद्र और राज्य सरकार से धनराशि तो समय से जारी की जाती रही लेकिन पंचायतों को अपने आर्थिक आधार को मजबूत करने देने के लिए खास काम नहीं हुआ। चौथे राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट में भी यह बात खुलकर सामने आई। अब नई पंचायतों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ेगा।
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प्रदेश सरकार की ओर से नए पंचायतीराज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों को अपना कर संग्रह बढ़ाने के लिए कई तरह के अधिकार दिए गए। अधिनियम में व्यवस्था की गई कि पंचायतें अपने पंचायत क्षेत्र में विवाह समारोह स्थल के लिए शुल्क वसूल सकें गी। इसके साथ ही स्वच्छता सहित अन्य सुविधाओं के विकास के लिए भी पंचायतों को कर संग्रह का अधिकार दिया गया। पंचायतों को दिया गया यह अधिकार फिलहाल अधिनियम तक ही सीमित होकर रह गया है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश की अधिकतर पंचायतों ने अपने कर संग्रह को बढ़ाने के लिए खास काम नहीं किया। पंचायताें को केंद्र के साथ ही राज्य के स्तर से भी अनुदान दिया जा रहा है। वित्त आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर ग्राम पंचायतें विभिन्न तरह के निर्माण कार्य और अपना खर्च उठाने के लिए अनुदानों पर ही निर्भर हैं। यही हाल क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों का भी है।
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इतना होने पर निर्माण में अधिकतर खर्च ग्राम पंचायतों की ओर से ही किया जा रहा है। सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस की ओर से किए गए अध्ययन में सामने आया कि 26 ग्राम पंचायतों में कुल व्यय का 83 प्रतिशत ग्राम पंचायत, 15 प्रतिशत क्षेत्र पंचायत और करीब दो प्रतिशत खर्च जिला पंचायतों की ओर से किया गया। इसमें से 41 प्रतिशत खर्च सीसी मार्गों के निर्माण में, 20 प्रतिशत खर्च सिंचाई और पेयजल के लिए टैंकों के निर्माण, 25 प्रतिशत का उपयोग प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण, 25 प्रतिशत अन्य निर्माण कार्य, आठ प्रतिशत नालियों के निर्माण में किया गया।
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सटीक जानकारी की भी कमी
2021 तक के लिए लागू वित्त आयोग की रिपोर्ट में पंचायतों की आडिट प्रणाली पर भी सवाल उठाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर पंचायतों का ऑडिट लेखा परीक्षा की ओर से नहीं हो पाया। कहा गया कि लेखा परीक्षा विभाग में स्टाफ की कमी के कारण यह हुआ है। कुल मिलाकर ऑडिट न होने से पंचायतों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठे।
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