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Dehradun News: ग्रीन क्रेडिट के तहत पारिस्थितिकी पुनरुद्धार का कार्य जारी
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Iएफआरआई में ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम पर हितधारकों के लिए आयोजित कार्यशाला में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की महानिदेशक कंचनदेवी ने कहा कि ग्रीन क्रेडिट के तहत 12 राज्यों में कार्य शुरू कर दिया गया है। इसमें पारिस्थितिकी पुनरुद्धार (इको रेस्टोरेशन) के तहत 4391 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत किए गए पर्यावरणीय संकल्पों को धरातल पर प्रभावी, मापनीय और टिकाऊ परिणामों में बदलना ही मुख्य उद्देश्य है, इस कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों से लोग पहुंचे हैं, उनके अनुभव और विचार भविष्य की ठोस कार्ययोजना को आकार देने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। सभी सुझावों का आईसीएफआरई द्वारा बारीकी से परीक्षण किया जाएगा, ताकि उन पर जरूरी कदम उठाए जा सकें। इसका मकसद ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के क्रियान्वयन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाना है, जिससे पारिस्थितिकी और पर्यावरण पुनरुद्धार के लक्ष्य तय समय में हासिल किए जा सकें।
महानिरीक्षक वन आर. रघु प्रसाद ने कहा कि ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम का लक्ष्य है, उसको सभी के सहयोग से प्राप्त किया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से सभी हितधारकों को ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम की जानकारी साझा करना है, जिससे सभी का सहयोग मिल सके।
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तकनीकी सत्रों में ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के विवरण, इसके विनियामक ढांचे, कार्यक्रम के तहत खराब हो चुकी वन भूमि पर किए गए वनीकरण के उपयोग से क्षतिपूरक वनीकरण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी साझा की गई। वक्ताओं ने बताया कि कैसे संस्थान प्रोग्राम में सहभागिता कर सकते हैं। ज्ञात हो कि ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत आठ पर्यावरणीय गतिविधियों के माध्यम से ग्रीन क्रेडिट सृजित करने की परिकल्पना की गई है। इनमें वृक्षारोपण, जल प्रबंधन, सतत कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, मैंग्रोव पुनर्स्थापन, इकोमार्क लेबल का विकास, सतत भवन एवं अवसंरचना तथा वायु प्रदूषण में कमी लाना शामिल है।I
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उन्होंने कहा कि ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत किए गए पर्यावरणीय संकल्पों को धरातल पर प्रभावी, मापनीय और टिकाऊ परिणामों में बदलना ही मुख्य उद्देश्य है, इस कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों से लोग पहुंचे हैं, उनके अनुभव और विचार भविष्य की ठोस कार्ययोजना को आकार देने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। सभी सुझावों का आईसीएफआरई द्वारा बारीकी से परीक्षण किया जाएगा, ताकि उन पर जरूरी कदम उठाए जा सकें। इसका मकसद ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के क्रियान्वयन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाना है, जिससे पारिस्थितिकी और पर्यावरण पुनरुद्धार के लक्ष्य तय समय में हासिल किए जा सकें।
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महानिरीक्षक वन आर. रघु प्रसाद ने कहा कि ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम का लक्ष्य है, उसको सभी के सहयोग से प्राप्त किया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से सभी हितधारकों को ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम की जानकारी साझा करना है, जिससे सभी का सहयोग मिल सके।
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तकनीकी सत्रों में ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के विवरण, इसके विनियामक ढांचे, कार्यक्रम के तहत खराब हो चुकी वन भूमि पर किए गए वनीकरण के उपयोग से क्षतिपूरक वनीकरण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी साझा की गई। वक्ताओं ने बताया कि कैसे संस्थान प्रोग्राम में सहभागिता कर सकते हैं। ज्ञात हो कि ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत आठ पर्यावरणीय गतिविधियों के माध्यम से ग्रीन क्रेडिट सृजित करने की परिकल्पना की गई है। इनमें वृक्षारोपण, जल प्रबंधन, सतत कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, मैंग्रोव पुनर्स्थापन, इकोमार्क लेबल का विकास, सतत भवन एवं अवसंरचना तथा वायु प्रदूषण में कमी लाना शामिल है।I