उत्तराखंड: जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रत्यक्ष चुनाव के पक्ष में सरकार, लेकिन ये है बड़ी अड़चन
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राज्य सरकार जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत प्रमुख के प्रत्यक्ष चुनाव कराने के पक्ष में है। हालांकि इस राह में पंचायतीराज एक्ट के 73 वें संविधान संशोधन में की गई व्यवस्था सबसे बड़ी अड़चन बन रही है। इसमें इन दोनों चुनावों में जनता की सीधी भागीदारी को प्रतिबंधित किया गया है।
यह व्यवस्था दी गई है कि चुने हुए जनप्रतिनिधि ही अध्यक्ष और प्रमुखों का चुनाव करेंगे। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पर्यटन विभाग के एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि इस संबंध में सरकार अपनी राय से भारत सरकार को अवगत कराएगी। उन्होंने कहा कि पंचायतों में एक अच्छी व्यवस्था के लिए प्रत्यक्ष चुनाव को सरकार जरूरी मानती है।
प्रत्यक्ष चुनाव के संबंध में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का यह बयान उस समय आया है, जबकि पंचायत चुनाव को लेकर सरकारी मशीनरी तैयारियों में जुटी हुई है। सरकार ने हाईकोर्ट में यह भरोसा दिलाया है कि वह 30 नवंबर, 2019 तक त्रिस्तरीय पंचायत के सभी फार्मेट में चुनाव करा देगी।
राज्य निर्वाचन आयोग के स्तर पर भेजे प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम पर भी सरकार को अभी निर्णय लेना है। इस बीच, पिछले कई दिनों से जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के सीधे चुनाव पर बहस सी शुरू हुई है।
इस संबंध में हाईकोर्ट में भी एक रिट दायर की गई है। एक वरिष्ठ अफसर के मुताबिक करीब ढाई वर्ष पहले भारत सरकार ने राज्यों से इस संबंध में रायशुमारी की पहल भी की थी। माना जा रहा है कि प्रत्यक्ष चुनाव की वजह से खरीद फरोख्त की शिकायतें और भ्रष्टाचार बढ़ने की जो बातें सामने आती रही हैं, उस पर गंभीरता से मनन किया जा रहा है।
सरकार जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के सीधे चुनाव की पक्षधर है, हालांकि 73 वें संविधान संशोधन में पंचायतीराज व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ही चुनाव की व्यवस्था दी है। हम भारत सरकार को प्रत्यक्ष चुनाव के संबंध में अपनी राय से अवगत कराएंगे।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, सीएम, उत्तराखंड