उत्तराखंड पर एक और 'आपदा', नहीं रहा पर्यटन राज्य
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बीते साल की आपदा के असर ने उत्तराखंड को सैलानियों के पसंदीदा राज्य की टॉप टेन सूची से बाहर कर दिया है। राज्य गठन के बाद ऐसा पहली बार हुआ है।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ओर से जारी ताजी सूची में उत्तराखंड की जगह छत्तीसगढ़ ने ले ली है। नक्सल प्रभावित इस राज्य का गठन उत्तराखंड के साथ ही हुआ था।
पर्यटन उद्योग पर नजर रखने वालों की मानें तो उत्तराखंड की कमजोर पर्यटन नीति राज्य के पिछड़ने की बड़ी वजह है, जिसके चलते तीर्थाटन से इतर टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित नहीं हो पाए।
तिरुपति की वजह से आंध्र प्रदेश टॉप पर
पर्यटन मंत्रालय की ओर से जारी देश के सर्वाधिक पर्यटक आकर्षित करने वाले टॉप दस राज्यों की ताजी सूची में सैलानियों की पसंद के लिहाज से तिरुपति की वजह से आंध्र प्रदेश टॉप पर है जबकि उत्तराखंड टॉप टेन से पहली बार बाहर हो गया है।
पहली बार उसकी जगह छत्तीसगढ़ शामिल हो गया है। चारधाम और अन्य धार्मिक स्थल उत्तराखंड के सर्वाधिक पसंदीदा पर्यटन स्थल रहे हैं।
लेकिन बीते वर्ष जून माह में केदारघाटी में आई आपदा में लगभग चार हजार लोगों की (लापता समेत) मौत ने प्रदेश के पर्यटन कारोबार का कचूमर निकाल दिया है।
इस साल चारों धामों में अपेक्षाकृत 10 फीसदी तीर्थ यात्री भी नहीं पहुंचे। आपदा में ध्वस्त सड़कों के पुनर्निर्माण में देरी ने भी काफी असर डाला है।
हालांकि राज्य सरकार पर्यटन बाजार में उत्तराखंड की छवि सुधारने के लिए प्रयास कर रही है। 27 सितंबर 2014 को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर निवेशकों की अंतरराष्ट्रीय बैठक बुलाई गई है।
विकल्प तलाश रही है उत्तराखंड सरकार
सरकार ने अभी हाल ही में कुछ नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने की बात की है ताकि उत्तराखंड के पुराने पर्यटन स्थलों में बढ़ रही भीड़ को नियंत्रित करने के अलावा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
प्रदेश में धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के लिए सरकार चाहती है कि चार धाम यात्रा पूरे साल हो।
मुख्यमंत्री हरीश रावत का तर्क है कि जब भगवान बदरी विशाल ठंड के महीनों में जोशीमठ और केदारनाथ ऊखीमठ में आ जाते हैं तो वहां तक यात्रा जारी रखी जा सकती है।
हालांकि अभी इस सोच को पूरा होने में तमाम धार्मिक व व्यावहारिक दिक्कतें आएंगी।
कमजोर आधारभूत ढांचा
राज्य में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सड़क, रेल और हवाई यातायात का कमजोर नेटवर्क है। 14 बरस में देहरादून के अलावा कोई नया हवाई अड्डा विकसित नहीं हुआ। राज्य बनने के बाद रेल ट्रैक में कोई विस्तार नहीं हुआ है।
आवागमन के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर पर्यटकों को खस्ताहाल और लंबे खतरनाक रास्तों का इस्तेमाल कर पर्यटक स्थल तक पहुंचना पड़ता है। पर्यटन के लिए बने जीएमवीएन और केएमवीएन की पर्यटकों के ठहरने के लिए कमजोर ढांचागत सुविधा है।
हम पर्यटन के लिहाज से उत्तराखंड को शीर्षस्थ राज्य बनाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। आपदा ने राज्य को काफी नुकसान पहुंचाया जिसमें पर्यटन सेक्टर भी शामिल है। राज्य सरकार ऐसा रोड मैप तैयार कर रही है जिससे वर्ष 2016 तक उत्तराखंड टाप फाइव पर्यटन राज्यों में शामिल हो सके।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड