उत्तराखंड की बेटी सबसे आगे, दुनिया की सबसे लंबी उड़ान की कमान
17 घंटे में 14 हजार पांच सौ किलोमीटर का सफर तय कर नया रिकॉर्ड कायम किया।
कमांडर क्षमता वाजपेयी मूलत पिथौरागढ़ जिले के चंडाक गांव की हैं।
उनके नाना अपने समय में टिहरी के जाने-माने वकील थे।
क्षमता को भारत की तीसरी और उत्तराखंड की पहली महिला कमांडर होने का गौरव भी हासिल है।
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उत्तराखंड मूल की क्षमता ने किया कमांड
नई दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को तक विमान को कमांड करने वाली कमांडर क्षमता वाजपेयी मूलत पिथौरागढ़ जिले के चंडाक गांव की हैं। उनके नाना वीरेंद्र दत्त सकलानी अपने समय में टिहरी के जाने-माने वकील थे। 1968 में दिल्ली में जन्मी क्षमता की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा लेडी इरविन स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने रायबरेली की इंदिरा गांधी उड़ान एकेड़मी से फ्लाइंग का कोर्स किया। 1996 में वह बतौर पायलट एयर इंडिया में शामिल हुई।क्षमता को भारत की तीसरी और उत्तराखंड की पहली महिला कमांडर होने का गौरव भी हासिल है। उनका विवाह लखनऊ के कैप्टन सुशील वाजपेयी से हुआ।
ऑल वूमेन फ्लाइट में सब कुछ महिलाओं के हाथ
क्षमता के 20 वर्षीय पुत्र मेहुल भी हाल में ही स्पाइस जेट में बतौर कैप्टन शामिल हुए हैं। उनके जीजा अल्मोड़ा के कारोबारी भारत पांडे ने बताया कि 2004 में पहली बार सिंगापुर गई ऑल वूमन फ्लाइट में क्षमता बतौर पायलट शामिल थी।
दुनिया की सबसे लंबी ऑल वूमन फ्लाइट में सब कुछ महिलाओं के हाथ था। कॉकपिट से लेकर केबिन क्रू चेक इन स्टाफ, चिकित्सक, कस्टमर केयर स्टाफ, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और संचालन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं ने ही संभाली।
गढ़वाल केंद्रीय विवि के जंतु विज्ञान विभाग में कार्यरत क्षमता के रिश्तेदार डॉ परमेश लखेड़ा ने बताया कि विमान को क्षमता वाजपेयी और शुभांगी सिंह ने कमांड किया। राम्य कीर्ति गुप्ता और अमृत नामधारी फर्स्ट अफसर थीं।