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उत्तराखंड़: यहां तो पैदल चलना भी सुरक्षित नहीं, दो साल में हो चुकी 273 पैदल यात्रियों की मौत

Tue, 21 Jan 2020 03:30 AM IST
अलका त्यागी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 21 Jan 2020 03:30 AM IST
सार

  • सड़क पर पैदल चलने वालों की मौतों के मामले में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में दूसरे स्थान पर
  • पहले स्थान पर हिमाचल, दो साल में मारे गए 353 पैदल यात्री 

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Uttarakhand on 2nd places in india For killed people during walking on roads
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड की सड़कें पैदल चलने वालों के लिए भी बेहद खतरनाक हैं। दो साल में प्रदेश के नेशनल हाईवे व स्टेट हाईवे पर 273 पैदल यात्री अपनी जान गंवा चुके हैं। हिमालयी राज्यों में हिमाचल के बाद उत्तराखंड में पैदल यात्रियों की मौत का ये आंकड़ा सबसे बड़ा है। हिमाचल में दो सालों के दौरान 353 पैदल यात्री सड़क पर चलते समय हादसे का शिकार हुए। 

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पैदल यात्रियों की सड़कों पर मौत का ये आंकड़ा इसलिए भी ज्यादा प्रमाणिक है कि क्योंकि सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में दिया है। चिंता वाली बात यह है कि देश और प्रदेश की सड़कें पैदल चलने वालों के लिए घातक बनती जा रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2015 में 13894 पैदल यात्री मारे गए थे।
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वर्ष 2018 में मौत का यह आंकड़ा बढ़कर 22656 पहुंच गया है।  उत्तराखंड में वर्ष 2015 में सड़कों पर 106 पैदल यात्री मारे गए थे। वर्ष 2018 में ये संख्या बढ़कर 146 पहुंच गई है। यानी प्रदेश में भी आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है। प्रदेश में पिछले 19 वर्षों में सड़कों की लंबाई तो बढ़ी, लेकिन उस गति से सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य नहीं हो पाया।  

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पैदल यात्रियों की मौत का आंकड़ा

राज्य                2017            2018
उत्तराखंड            127            146
हिमाचल            171            182    
जम्मू कश्मीर        62            103
मेघालय                46            25
मिजोरम                18            09
सिक्किम                10            03
त्रिपुरा                    57            68    
अरुणाचल प्रदेश    03                08    
नागालैंड                05                07
मणिपुर                    15                21
(स्रोत: लोस में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी)
 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर इन चीफ एचके उप्रेती कहते हैं कि पैदल यात्री का सड़क पर पहला अधिकार है। लेकिन सुरक्षा के इंतजाम न होने से सड़कें असुरक्षित हैं। उनका कहना है कि जिन सड़कों के किनारों पर फुटपाथ होते हैं, उन पर अतिक्रमण होता है, जिससे पैदल यात्री सड़कों का इस्तेमाल करते हैं। कायदे से सड़कें पैदल यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार होनी चाहिए।

लेकिन वास्तविकता में ये उन पर दौड़ने वाले वाहनों के हिसाब से बनती हैं। पहाड़ में जगह की कमी के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर ही चलना होता है। प्रदेश की सड़कों पर फुट ओवर ब्रिज भी नहीं हैं। सीमित संसाधनों में इन्हें नहीं बनाया जा रहा है। परिवहन के कानून को सख्ती से लागू कराकर भी हादसों को रोका जा सकता है।

सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए रोड सेफ्टी ऑडिट हो रहा है। पहले चरण में 1200 किमी सड़कों का ऑडिट प्रस्तावित है। इस पर कार्य आरंभ हो चुका है। हमारी यह पूरी कोशिश है कि मार्ग उन पर चलने वाले वाहनों के लिए ही नहीं, पैदल चलने वालों के लिए भी सुरक्षित होने चाहिए। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ऑडिट हो रहा है।
- हरिओम शर्मा, प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग

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