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एवरेस्ट पर्वत पर चढ़ेगी उत्तराखंड की बहादुर बेटी नूतन
विनय बहुगुणा / अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Mon, 28 Dec 2015 01:28 PM IST
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पर्वतारोहियों की सफल कहानियों से प्रेरित होकर उत्तराखंड की बेटी ने पर्वतारोहण में अपना करिअर बनाने का फैसला किया।
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रुद्रप्रयाग में अगस्त्यमुनि ब्लॉक के गुनाऊं गांव की 20 वर्षीय नूतन वशिष्ठ ने भी पर्वतारोहण में अपना करिअर बनाने का फैसला किया। मार्च 2016 में माउंट एवरेस्ट आरोहण के लिए आर्मी की ओर से चयनित एनसीसी के नौ कैडेट में नूतन भी शामिल है।
अगस्त्यमुनि ब्लॉक के गुनाऊं गांव निवासी और सेना में कार्यरत गिरीश चंद्र वशिष्ठ और सुशीला वशिष्ठ की बेटी नूतन ने जनपद ही नहीं वरन गढ़वाल और उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। बीकानेर (राजस्थान) से एमकॉम की पढ़ाई कर रही इस छात्रा ने कक्षा दो तक गांव की स्कूल में पढ़ाई की।
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सेना में तैनात पिता की अलग-अलग राज्यों में पोस्टिंग होने के कारण उसने उड़ीसा, पंजाब और मध्य प्रदेश में भी पढ़ाई की। अभी वह बीकानेर से उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही है। हाईस्कूल के बाद नूतन की रुचि पर्वतारोहण के प्रति बढ़ गई थी। एनसीसी होने से वह स्कूल स्तर से रॉक क्लाइंबिंग के शिविरों में बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग करने लगी। इस दौरान माता-पिता के सहयोग से उसने हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान दार्जिलिंग से पर्वतारोहण का बेसिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
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टॉप 10 में बनाई जगह
दो वर्ष पूर्व आर्मी की ओर से 100 एनसीसी कैडेटों के पर्वतारोही दल में नूतन को भी शामिल कर लिया गया। अपनी मेहनत के दम पर उसने पहले टॉप 40 और फिर टॉप 10 में अपनी जगह बनाई। वर्ष 2014 में नूतन ने गंगोत्री के समीप रुद्रगेरा पर्वत को फतह कर तिरंगा फहराया।
इस वर्ष सिक्किम में माउंटरिनाक, हिमाचल प्रदेश में माउंट देव टिब्बा और उत्तराखंड में माउंट त्रिशूल पर तिरंगा फहराते हुए देवभूमि उत्तराखंड का मान बढ़ाया। नूतन की मां सुशीला बताती हैं कि नूतन ने टेलीविजन और किताबों के जरिए पर्वतारोहण के बारे में जाना, पढ़ा और समझा। नूतन कहती हैं कि माता-पिता और ट्रेनर्स के सहयोग ने उनका हौसला बढ़ाया है।