फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Nikay Chunav Fierce competition for tickets between enthusiastic youth and experienced contenders

Uttarakhand: निकाय चुनाव...जोशीले युवाओं और अनुभवी दावेदारों में टिकट के लिए छिड़ा है घमासान

Mon, 23 Dec 2024 01:04 PM IST
रेनू सकलानी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 23 Dec 2024 01:04 PM IST
सार

Uttarakhand Nikay Chunav: जनप्रतिनिधित्व की पाठशाला में दाखिला लेने के लिए जवान पौध बेताब है। निकाय चुनाव में टिकट के लिए दोनों ही दलों में जवान और अनुभवी नेताओं में खींचतान है।

विज्ञापन
Uttarakhand Nikay Chunav Fierce competition for tickets between enthusiastic youth and experienced contenders
भाजपा और कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जनप्रतिनिधित्व की पाठशाला माने जाने वाले निकायों के चुनाव में टिकट की दावेदारी को लेकर जोशीले युवाओं और अनुभवी नेताओं में घमासान छिड़ गया है। प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस में युवा और अनुभवी दावेदार एक-दूसरे के आमने-सामने हैं और टिकट के लिए दावेदारी के पक्ष में अपने-अपने तर्क गढ़ रहे हैं।

विज्ञापन


इन विरोधाभासी तर्कों ने राजनीतिक दलों के पर्यवेक्षकों और नेतृत्व को खासी मुश्किल में डाल दिया है। प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा में टिकट के दावेदार मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री संगठन के अलावा क्षेत्रीय सांसद और विधायक के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के दावेदार प्रदेश अध्यक्ष के साथ पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ नेताओं के पास अपनी फरियादें सुना रहे हैं।

विज्ञापन

दोनों ही दलों में बड़ी संख्या में युवाओं ने टिकट की दावेदारी की है। इनमें महिलाएं व पुरुष दोनों शामिल हैं। दावेदारी के पक्ष में युवाओं के तर्क एक जैसे ही हैं। उनका मानना है कि सांसद और विधायक का टिकट युवाओं के बजाय दलों में लंबे समय से स्थापित नेताओं को इस तर्क के साथ दिया जाता है कि वे अनुभवी हैं। ऐसे में युवाओं के पास जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए निकाय चुनाव ही एक अवसर है। यहां भी अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता मिलेगी तो युवाओं को मौका कब मिलेगा?

विज्ञापन
विज्ञापन

उम्मीदवारों का चयन आसान नहीं
इसके विपरीत अनुभवी दावेदारों के अपने पक्ष में अलग तर्क हैं। उनका कहना है कि युवाओं के पास चुनाव लड़ने के आगे कई अवसर हैं। लेकिन उम्र अधिक होने की वजह से उनके पास चुनाव लड़ने के अवसर बेहद सीमित हैं। दलों में लंबे समय तक सक्रिय रह कर जनता से जुड़ने का अनुभव उनके पास युवाओं से अधिक है। इसलिए टिकट की उनकी दावेदारी युवाओं से ज्यादा मजबूत बनती है।

रायशुमारी से नामों का पैनल तैयार करने वाले भाजपा के पर्यवेक्षक हो या कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य सभी के सामने टिकट के दावेदारों के ये कॉमन तर्क सामने आए हैं। ऐसे में उम्मीदवारों का चयन उनके लिए आसान नहीं है। इसलिए आखिरी मुहर लगाने के लिए जनता के बीच सर्वे कराने की तरकीब खोज ली गई है।

टिकट के लिए युवा, बुजुर्ग, पुरुष, महिला सभी दावेदारी करते हैं। लेकिन टिकट का आधार क्षेत्र में छवि, अनुभव, जीतने की संभावना और पार्टी कार्यकर्ताओं की सहमति होती है। उम्र मायने नहीं रखती। -आदित्य कोठारी, प्रदेश महामंत्री, भाजपा

ये भी पढ़ें...Uttarakhand Nikay Chunav: निकायों की आपत्तियों का निपटारा, इस सप्ताह प्रदेश में लागू हो सकती है आचार संहिता

टिकट देते समय हम यह देखेंगे कि दावेदार ने कितनी सक्रियता से योगदान दिया। सिर्फ युवाओं या सयाने नेताओं को टिकट देंगे, ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम उन युवाओं, महिलाओं, अनुभवी नेताओं को उम्मीदवार बनाएंगे जिनकी क्षेत्र में अच्छी छवि है। -करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed