निकाय चुनाव: सरकार और निर्वाचन आयोग में ठनी, फिर आगे खिसक सकती है चुनाव की तिथि
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राज्य चुनाव आयोग और प्रदेश सरकार के बीच छिड़ी रार से यह संकेत काफी हद तक साफ हो गए हैं कि प्रदेश में निकाय चुनाव अब निर्धारित समय पर नहीं होंगे। सरकार और आयोग की बातें संकेत कर रही हैं कि निकाय चुनाव मई अंतिम सप्ताह या जून प्रथम सप्ताह तक खिंच सकते हैं।
बुधवार को एक पत्रकार वार्ता के दौरान शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक जो शहरी विकास मंत्री भी हैं, ने जब यह कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश पर 23 निकायों के सीमा विस्तार की अधिसूचना जारी होने के बावजूद वार्डों के परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया में समय लगेगा तो साफ हो गया कि निर्धारित समय पर चुनाव नहीं हो पाएंगे।
कौशिक के मुताबिक, नगर निगमों के वार्डों के परिसीमन की अधिसूचना पर आपत्ति के लिए सात दिन चाहिए। नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए कम से कम 15 दिन लगेंगे। इसके अलावा अंतिम अधिसूचना जारी करने के लिए तीन-चार दिन और लगेंगे।
न आरक्षण न परिसीमन, समय पर चुनाव कैसे होंगे
उन्होंने कहा कि ये सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आयोग को सूचना भेजी जा सकेगी। स्पष्ट है कि सरकार के स्तर पर ही परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया में 20 से 25 दिन और लगेंगे जिससे निर्धारित समय पर चुनाव संभव नहीं हो पाएंगे। इस हिसाब से चुनाव मई माह के अंतिम सप्ताह या जून माह के पहले हफ्ते में संभव है।
न आरक्षण न परिसीमन, समय पर चुनाव कैसे होंगे
राज्य चुनाव आयुक्त सुबर्द्धन ने कहना है कि आयोग बार-बार इस बात पर जोर देता रहा कि निकायों का जो सीमा विस्तार व उच्चीकरण हुआ,उससे चुनाव समय पर नहीं हो पाएंगे। लेकिन शासन की ओर से आश्वस्त किया जा रहा था कि वह सब कुछ समय पर करके दे देगा और समय पर चुनाव होंगे।
आज स्थिति यह है कि प्रदेश में न तो परिसीमन का काम पूरा हुआ न आरक्षण का। अभी तक ये दोनों काम शासन स्तर पर पूरे नहीं हैं। ऐसे हालातों में चुनाव समय पर कराना संभव नहीं है।