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उत्तराखंड : सरकार पहाड़ पर पांच जख्मों के इलाज के लिए एयर एंबुलेंस की दरकार

Sun, 13 Jun 2021 03:13 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 13 Jun 2021 03:13 PM IST
सार

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एयर एंबुलेंस की जरूरत की सबसे पहली वजह सड़क हादसे हैं।

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uttarakhand news : uttarakhand needs air ambulance
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एयर एंबुलेंस के मामले में प्रदेश सरकार का रुख उदासीन बना हुआ है। जबकि राज्य के पर्वतीय जिलों में एयर एंबुलेंस की सबसे ज्यादा जरूरत है। पहाड़ पर पांच ऐसे जख्म हैं, जिनके इलाज के लिए एयर एंबुलेंस की दरकार है।

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1. सड़क दुर्घटनाएं : हर साल 951 लोगों की मौत
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एयर एंबुलेंस की जरूरत की सबसे पहली वजह सड़क हादसे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हर साल औसतन 951 लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं। प्रति दुर्घटनाओं में 64 लोगों की मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक हैं कि 100 किमी के फासले पर एक ट्रामा सेंटर होना चाहिए ताकि दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को तत्काल इलाज देकर उनकी जिंदगी बचाई जा सके। लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रामा सेंटर तो छोड़िये अस्पतालों के खराब हालात हैं।
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2. मातृ मृत्यु
उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में महिलाएं रक्त अल्पता की शिकार हैं। पोषक तत्वों के अभाव और कठोर परिश्रम के कारण उनमें रक्तस्राव की समस्या होती है। कई बार इलाज में देरी के कारण उनकी मौत भी हो जाती है। नीति आयोग की हाल ही में जारी एसडीजी इंडेक्स में उत्तराखंड प्रति लाख महिलाओं पर 99 की मौत हो जाती है। जबकि आदर्श मानक प्रति लाख पर 70 मौतों का है।
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3. ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक
पहाड़ में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में इलाज की सुविधाएं ना के बराबर है। ऐसे मामलों में इलाज की तत्काल जरूरत होती है। लोगों के पास देहरादून, हल्द्वानी या रुद्रपुर स्थित अस्पतालों में इलाज कराने के सिवाय कोई चारा नहीं है।

चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लोगों की मौत

4. चारधाम यात्रा के दौरान मौतें
राज्य में पर्यटन और तीर्थांटन पर हर साल लाखों लोग आते हैं। चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लोगों की मौत होती है। 2017 में 112, 2018 में 106, 2019 में 91 लोगों की मौत यात्रा के दौरान हुई। 

5. आपदा और बादल फटने की घटनाएं
उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं को नहीं रोका जा सकता। लेकिन इनसे होने वाली जनहानि को रोकने के उपाय जरूर किए जा सकते हैं। आपदा और बादल फटने की घटनाओं में लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। समय पर इलाज मिलने की दशा में कई जिंदगियों को बचाना संभव है।

एक ही इलाज: सुविधाएं या एंबुलेंस
पहाड़ के जनमानस के जीवन में शूल की तरह चुभने वाले ये पांच जख्मों का एक ही इलाज है कि या तो सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को शहरी क्षेत्रों की तरह मजबूत बनाए या फिर रोगियों और दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को तत्काल हायर सेंटर में इलाज कराने के लिए एयर एंबुलेंस की सेवा को शुरू करे।

सरकार के संज्ञान में एयर एंबुलेंस का मामला लाया गया है। इस बारे में उच्च स्तर पर चर्चा हो रही है। जल्द कोई न कोई समाधान निकाला जाएगा।- शत्रुघ्न सिंह, मुख्य सलाहकार, मुख्यमंत्री

उत्तराखंड को कम से कम दो एडवांस कार्डिक लाइफ सपोर्ट एयर एंबुलेंस की जरूरत है। आपदा ग्रसित प्रदेशों के लिए यह जरूरी है। एयर एंबुलेंस को आयुष्मान सेवा से जोड़ना भी आवश्यक है ताकि समाज के सभी वर्ग इस सुविधा का लाभ ले सकें।- अनूप नौटियाल, समाज सेवी व प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा के पूर्व स्टेट हैड

राज्य सरकार एयर एंबुलेंस का संचालन अपने खर्च से कर सकती है। तीन माह के तीन एयर एंबुलेंस का खर्च पांच करोड़ अनुमानित है। राज्य सरकार सीएसआर फंड से यह राशि जुटा सकती है। मैंने यह सुझाव प्रमुख सलाहकार मुख्यमंत्री को दिया है।- रविंद्र जुगरान, पूर्व राज्य आंदोलनकारी

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