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उत्तराखंड : मनरेगा के तहत अब पांच हजार चाल-खाल, नौलों-धारों में वापस लाया जाएगा पानी
Sat, 12 Sep 2020 11:29 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 12 Sep 2020 11:29 AM IST
सार
- मनरेगा के तहत होगा काम, योजना का प्रस्ताव तैयार
- स्थानीय स्तर पर बनेगी कमेटियां, हर घर नल योजना को फायदा
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मनरेगा
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
मनरेगा के तहत अब प्रदेश में पांच हजार से ज्यादा जल स्रोतों के पुनर्जीवन किया जाएगा। पुनर्जीवित किए गए जल स्रोतों की कम से कम दो साल तक निगरानी भी होगी। इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
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प्रदेश में हर घर नल योजना भी शुरू की जा चुकी है। मुसीबत यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण जल स्रोत सूख रहे हैं या उनमें पानी कम हो रहा है। ऐसे में पेयजल योजनाओं पर भी संकट है। मनरेगा के तहत वैसे भी जल संवर्द्धन का काम किया जाता है लेकिन इसकी निगरानी नहीं होती।
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अब मनरेगा के तहत चाल-खाल, नौले, धारे आदि को पुनर्जीवित करने का काम किया जाएगा। मनरेगा के तहत ऐसे पांच हजार जल स्रोत चिह्नित भी किए जा चुके हैं। इनमें निर्माण, श्रम आदि का भुगतान मनरेगा से होगा। शासन स्तर पर कुछ ही दिनों में इसके विस्तृत दिशा निर्देेश भी जारी हो सकते हैं। मनरेगा के नोडल अधिकारी मोहम्मद असलम के मुताबिक एसओपी तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है।
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हर योजना के लिए बनेगी स्थानीय कमेटी
योजना की खास बात यह है कि इसमें हर योजना के लिए स्थानीय स्तर पर कमेटी बनेगी। यह कमेटी स्रोत के पुनर्जीवन का खाका तैयार करेगी और कम से कम दो साल तक स्रोत की लगातार निगरानी करेगी। स्रोत का हर तीन माह में परीक्षण किया जाएगा और देखा जाएगा कि जल प्रवाह इसमें बढ़ रहा है या कम हो रहा है। जल स्रोत के पुनर्जीवन के लिए चाल खाल बनाने से लेकर पौध रोपण तक का काम होगा।
करीब 12 हजार जल स्रोत सूख चुके हैं प्रदेश में
स्टेट ऑफ इनवायरमेंट रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में करीब 12 हजार जल स्रोत सूख चुके हैं। हैस्को ने बार्क मुंबई की मदद से 16 जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का काम किया था।
मनरेगा में एक लाख से प्रवासियों को मिला काम
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 450 करोड़ से अधिक पैसा झोंकने वाली मनरेगा योजना से 11 सितंबर तक करीब सात लाख श्रमिक जुड़ चुके हैं। करीब एक लाख आठ हजार प्रवासियों को इसमेेें काम दिया जा चुका है। इसमें 55 हजार अलग-अलग काम पूरे प्रदेश में किए जा रहे हैं।
कोसी को देखते हुए बनी योजना
अधिकारियों के मुताबिक मनरेगा से कोसी पुनर्जीवन योजना के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया और जल स्रोतों को सुधारा गया। इसके हाल में सामने आए परिणाम को देखते हुए ही अन्य जल स्रोतों के लिए यह योजना बनाई गई है। इसका फायदा यह भी है कि पुनर्जीवन के काम में स्थानीय स्तर पर सहयोग भी मिल जाता है।