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उत्तराखंड: जंगल में बेसुध मिली नवजात हिरनी को बेटी की तरह पाला, दिल पर पत्थर रख 17 माह बाद किया विदा

Sun, 22 Aug 2021 01:20 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal जयवीर मनराल, अमर उजाला, नारायणबगड़
जयवीर मनराल, अमर उजाला, नारायणबगड़ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 22 Aug 2021 01:20 AM IST
सार

बात 4 मार्च 2020 की है। उमा देवी जंगल में घास लेने गईं थी। वहां उन्हें हिरन का नवजात बच्चा नजर आया। उन्हें लगा कि उसकी मां आसपास ही होगी, इसीलिए वे उसे वहीं छोड़ घर चली आईं। लेकिन, दूसरे दिन उमा जंगल गई, तो हिरन का बच्चा वहीं बेसुध पड़ा हुआ था।

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uttarakhand news: unconscious newborn deer found in forest, this couple brought up her like a daughter
गांव में हर किसी की आंख नम थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शनिवार की सुबह उत्तराखंड के नारायणबगड़ के केवर गांव में हर किसी की आंख नम थी। कारण था जूली की विदाई। दर्शनलाल और उनकी पत्नी उमा देवी ने इस हिरनी को बेटी की तरह पाला था। लेकिन, उन्होंने जूली की भलाई के लिए दिल पर पत्थर रख उसे अपने से दूर करने का फैसला किया।

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विदाई की बेला आई तो उमा ने जूली को गले लगाया और बड़े दुलार से उसे विदा किया। यह मंजर देख वहां मौजूद हर शख्स की आंख नम थी। जूली अब देहरादून के चिड़ियाघर में धमाचौकड़ी मचाएगी।
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बात 4 मार्च 2020 की है। उमा देवी जंगल में घास लेने गईं थी। वहां उन्हें हिरन का नवजात बच्चा नजर आया। उन्हें लगा कि उसकी मां आसपास ही होगी, इसीलिए वे उसे वहीं छोड़ घर चली आईं। लेकिन, दूसरे दिन उमा जंगल गई, तो हिरन का बच्चा वहीं बेसुध पड़ा हुआ था। उमा को समझने में देर नहीं लगी कि उसकी मां के साथ जरूर कोई अनहोनी हो गई है।
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उमा ने तुरंत बच्चे को उठाया और घर ले आईं। उमा और उनके पति दर्शनलाल ने उसे अपने बच्चे की तरह अपनाया। बड़े प्यार से उसका नाम जूली रखा। जूली को भी मानो माता-पिता मिल गए थे। वह उन्हीं के साथ खाना खाती और सोती। धीरे-धीरे जूली पूरे गांव की लाडली बन गई थी।

दंपती को पुरस्कृत करने की मांग

जूली 17 महीने की हुई तो उमा और दर्शनलाल को चिंता सताने लगी कि कोई उसे नुकसान न पहुंचा दे। उन्होंने लोगों से राय मशविरा किया तो तय हुआ कि जूली को अब उसकी दुनिया में भेज देना ही उचित है। यह फैसला करना दोनों के लिए बहुत कठिन था, लेकिन उन्होंने जूली की भलाई में अपनी भावनाओं को आड़े नहीं आने दिया।

उमा और दर्शनलाल को पता था कि जूली अब जंगल में नहीं रह पाएगी। इसीलिए दोनों बद्रीनाथ वन विभाग के रेंज कार्यालय नारायणबगड़ पहुंचे और जूली के लिए सुरक्षित आसरा मांगा। बद्रीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि देहरादून जू यानी मालसी डियर पार्क में जूली को रखने की अनुमति मिल गई है।

डीएफओ ने बताया कि जूली को विभाग के विशेष वाहन से शनिवार को रेंजर भगवान सिंह परमार व वन दरोगा बलबीर लाल सोनी की देखरेख में देहरादून भेजा गया। संवाद

जूली की परवरिश अपने बच्चे की तरह करने के लिए उमा और दर्शनलाल काफी चर्चा में हैं। लोगों ने उनके इस कार्य की सराहना की है। क्षेत्र के दलीप सिंह नेगी, बीरेंद्र सिंह नेगी, देवेंद्र पाल सिंह परिहार, दरवान सिंह गुसाईं, डॉ भूपेंद्र सिंह मेहरा, जयपाल सिंह बुटोला, पूर्व कनिष्ठ उप प्रमुख मनवीर सिंह रावत आदि ने वन विभाग से दंपती को पुरस्कृत करने की मांग की।

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