{"_id":"61b83c0712668329b228d7b1","slug":"uttarakhand-news-two-pwd-engineers-suspended-for-working-on-fake-bank-guarantee","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड: फर्जी बैंक गारंटी पर काम देने वाले पीडब्ल्यूडी के दो इंजीनियर सस्पेंड, वित्तीय अनियमितता का भी आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड: फर्जी बैंक गारंटी पर काम देने वाले पीडब्ल्यूडी के दो इंजीनियर सस्पेंड, वित्तीय अनियमितता का भी आरोप
Tue, 14 Dec 2021 12:10 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 14 Dec 2021 12:10 PM IST
सार
वित्तीय अनियमितता और बिना सत्यापन काम कराने के आरोप में सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर(एसई) रणजीत सिंह और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर(एक्सीईएन) ओम पाल सिंह हो तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आईएसबीटी से अजबपुर रेलवे क्रॉसिंग तक सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। चौड़ीकरण में काम करने वाली फर्म ने फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर काम हासिल किया। वित्तीय अनियमितता और बिना सत्यापन काम कराने के आरोप में सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर(एसई) रणजीत सिंह और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर(एक्सीईएन) ओम पाल सिंह हो तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
विज्ञापन
अनुमानित लागत से 23.66 प्रतिशत कम 25 करोड़ 90 लाख रुपये में टेंडर डाला
दरअसल, चौड़ीकरण के इस काम के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय से इसी साल 25 फरवरी को 42 करोड़ 55 लाख 84 हजार रुपये स्वीकृत हुए। इससे आईएसबीटी से अजबपुर रेलवे क्रॉसिंग तक चौड़ीकरण का काम होना था। विभाग ने इसके लिए 26 मार्च को टेंडर निकाले। 11 मई को टेंडर खुले तो दिल्ली की मैसर्स राकेश कुमार एंड कंपनी ने अनुमानित लागत से 23.66 प्रतिशत कम 25 करोड़ 90 लाख रुपये में टेंडर डाला।
विज्ञापन
सबसे कम होने के नाते इस कंपनी को ही काम दे दिया गया। इसके बाद कंपनी को तीन जुलाई को लैटर ऑफ एक्सेप्टेंस(स्वीकृति पत्र) पीडब्ल्यूडी की ओर से दे दिया गया। इसके लिए सात अगस्त को कंपनी ने मुंबई के बैंक की 77 लाख 70 हजार बैंक गारंटी का प्रमाण जमा कराया। पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर डोईवाला को यह बैंक गारंटी दी गई। बैंक गारंटी की पुष्टि किए बिना ही नौ अगस्त को फर्म को कार्य प्रारंभ होने और पूर्ण होने की तिथि से अवगत करा दिया गया।
विज्ञापन
इस बीच तत्कालीन दोनों इंजीनियरों एसई रणजीत सिंह और ईई ओम पाल सिंह का तबादला हो गया। उनकी जगह इन पदों पर आए दूसरे इंजीनियरों ने जब बैंक गारंटी के परीक्षण की रिपोर्ट देखी तो वह नदारद थी। जांच करने पर पता चला कि यह बैंक गांरटी गलत है। इसकी सूचना आला अधिकारियों को दी गई तो उन्होंने इसकी प्राथमिक जांच कराई।
जांच में यह स्पष्ट हो गया कि फर्म ने फर्जी बैंक गारंटी जमा कराई है। इसी जांच के आधार पर शासन ने बैंक गारंटी परीक्षण में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता के आरोप में एसई रणजीत सिंह और ईई ओम पाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।