तैयारी: कोटद्वार-नजीबाबाद के बीच अब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन
रेलवे ट्रेक के विद्युतीकरण के बाद अब रेलवे ने इस ब्रांच लाइन पर नया रेल ट्रेक बिछाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो जल्द ही कोटद्वार-नजीबाबाद ब्रांच लाइन पर ट्रेन 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। बीते अप्रैल माह में उत्तर रेलवे की ओर से कोटद्वार-नजीबाबाद रेल लाइन पर विद्युतीकरण का काम पूरा किया गया, जिसके बाद से कोटद्वार-दिल्ली के बीच चलने वाली चेयरकार सिद्धबली जनशताब्दी एक्सप्रेस को भी इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित किया जाने लगा है।
इससे पहले तक इस रूट पर नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच डीजल इंजन से ट्रेन संचालित की जाती रही। विद्युतीकरण के बाद अब रेलवे ने वर्षों पुराने ट्रेक के स्थान पर नया रेल ट्रेक बिछाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे ट्रेनों की गति में इजाफा होगा और समय भी बचेगा।
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रेल अधिकारियों का कहना है कि रेलपथ विभाग ने प्रथम चरण में आठ किलोमीटर रेल ट्रेक बदलने के लिए अनुमति प्राप्त कर ली है। नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच की दूरी 24 किलोमीटर है। करीब तीन दशक पूर्व डाली गई 52 केजी क्षमता की रेल लाइन की मियाद लगभग पूरी होने के बाद रेलवे ने नई रेल लाइन बिछाने का फैसला लिया है।
स्टेशन अधीक्षक मनोज रावत ने बताया कि सीनियर सेक्शन इंजीनियर धर्मेंश कुमार के निर्देशन में रेल लाइन बदलने का अभियान जल्द शुरू किया जाएगा। नया रेल ट्रेक 60 केजी क्षमता का बिछाया जाएगा, जिस पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें आसानी से आवागमन कर सकेंगी।
वर्ष 1885 में बना था कोटद्वार रेलवे स्टेशन
कोटद्वार में अंग्रेजों के जमाने में वर्ष 1885 में रेलवे स्टेशन बना था। आजादी से काफी पहले से कोटद्वार में रेलवे की सेवाएं भी शुरू गईं। कांग्रेस की मनमोहन सरकार में इस रूट पर डबल ट्रेक बिछाने की घोषणाएं कीं, जो धरातल पर नहीं उतर सकी। दो साल से इस ट्रेक पर विद्युतीकरण की कवायद चल रही थी, जो वर्ष 2021 के अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में धरातल पर उतर सकी।
पूर्व की सरकारों ने कोटद्वार को मॉडल रेलवे स्टेशन तो घोषित किया, लेकिन आज तक नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच न तो डबल लेन ट्रेक बिछ पाया, न ही रेल सेवाओं में ही इजाफा हो सका।
नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच के 24 किमी लंबे ट्रेक का विद्युतीकरण न होने से यहां चलने वाली पैसेंजर ट्रेन के साथ ही गढ़वाल एक्सप्रेस और मसूरी के कोच भी डीजल इंजन से जुड़कर कोटद्वार आते जाते रहे हैं। रेलवे ट्रेक के विद्युतीकरण के बाद रेल यात्रियों और विभिन्न संगठनों की ओर से अब गढ़वाल और मसूरी एक्सप्रेस के साथ ही नजीबाबाद तक लोकल पैसेंजर ट्रेन शुरू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।