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उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल आने वाले पर्यटकों को हॉर्टि-टूरिज्म कराएगा प्रकृति के बीच आधुनिकता का अहसास 

Thu, 25 Mar 2021 02:03 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी
अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 25 Mar 2021 02:03 PM IST
सार

  • दयारा बुग्याल के पड़ाव रैथल गांव में बनेगा जिले का पहला हॉर्टि-टूरिज्म सेंटर
  • एक करोड़ की लागत से सेब, अखरोट की नर्सरी व पैक हाऊस का होगा निर्माण

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uttarakhand news : Tourists coming to Dayara Bugyal will see horti tourism
रैथल गांव में जिले का पहला हॉर्टि-टूरिज्म सेंटर तैयार करने की योजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दयारा बुग्याल की सैर पर आने वाले पर्यटक अब हॉर्टि-टूरिज्म (उद्यान पर्यटन ) से प्रकृति के बीच आधुनिकता का अहसास भी कर पायेंगे। इसके लिए उद्यान विभाग ने दयारा बुग्याल के प्रमुख पड़ाव रैथल गांव में जिले का पहला हॉर्टि-टूरिज्म सेंटर तैयार करने की योजना बनाई है। जिसमें 1.11 करोड़ रुपए की लागत से सेब व अखरोट की नर्सरी के साथ फलों की ग्रेडिंग व पैकेजिंग के लिए पैक हाऊस का निर्माण भी किया जाएगा।

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जिला मुख्यालय से करीब 42 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रैथल गांव में उद्यान विभाग का फार्म है। 30 हेक्टेयर के इस फार्म में से 5 हेक्टेयर भूमि जड़ी बूटी शोध केंद्र को दी गई है। इस भूमि में से एक से डेढ़ हेक्टेयर पर उद्यान विभाग और पर्यटन को जोड़कर हॉर्टि-टूरिज्म सेंटर विकसित करने की योजना है।
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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नाबार्ड से मिले 93 लाख रुपए से सेंटर में फलों की ग्रेडिंग व पैकिंग के लिए पैक हाऊस का निर्माण होगा। एक अन्य मद से सेब व अखरोट की पारंपरिक व आधुनिक प्रजाति व किस्मों को सहेजने के लिए के लिए इनकी नर्सरी तैयार की जायेगी।
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इसके अलावा सेंटर में 805 मीटर का खूबसूरत ट्रैक होगा। जिसके दोनों ओर सजावटी पौधे पर्यटकों का स्वागत करेंगे। सेंटर में सोलर लाइटें व व्यू प्वाइंंट भी होंगे। जहां से पर्यटक गंगा घाटी के विहंगम नजारों को निहार सकेंगे। विभाग की योजना रंग लाई तो इससे रैथल में होम स्टे संचालकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

नर्सरी की कमी होगी दूर

निचला व उपला टकनौर क्षेत्र में सेब नर्सरी की कमी है। रैथल में सेब की नर्सरी तैयार होती है तो इससे स्थानीय सेब बागवानों को भी लाभ मिलेगा। यहां जलवायु व मिट्टी में अंतर के चलते बाहर से लाई सेब की पौध के न पनपने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ता है।

क्या है पैक हाऊस

सब्जी और फलों की वॉसिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए पैक हाऊस का निर्माण किया जाता है। जिसमें यह सभी कार्य आधुनिक मशीनों से होते हैं। सब्जी व फलों को कोल्ड स्टोरेज में भी रखा जा सकता है। साथ ही सीधे कंपनियों के पास भेजा जाता है। गंगा घाटी में पैक हाऊस बनने से काश्तकारों को सीधा लाभ मिलेगा।

पैक हाऊस निर्माण के लिए मंडी समिति से एमओयू हो चुका है। अप्रैल से पैक हाऊस का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। सेंटर में शामिल नर्सरी, ट्रैक आदि कार्यों को भी साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- रजनीश सिंह, जिला उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी
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