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बारिश में बीमारियों का खतरा: मानसून में सेहत का रखें ख्याल, जरा सी चूक पहुंचा सकती है अस्पताल 

Thu, 29 Jul 2021 03:21 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजीव कुमार, अमर उजाला, ऋषिकेश
राजीव कुमार, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 29 Jul 2021 03:21 PM IST
सार

वातावरण में नमी के चलते बैक्टरिया और वायरस भी बढ़ जाते हैं। सांस के जरिए बैक्टरियां और वायरस श्वास नली में प्रवेश करते हैं। जिससे सामान्य जुकाम, फ्लू, ब्रोंकाइटिज जैसी बीमारी पैदा होती हैं।

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uttarakhand news: take care of health in monsoon, a slight mistake can lead to hospital
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

मानसून सीजन बीमारियों का सीजन कहलाता है। बरसात कई बीमारियों को भी साथ लेकर आती है। एसपीएस राजकीय अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुरेश कोठियाल का कहना है कि मानसून सीजन में खानपान को लेकर सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।

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बारिश में दूषित पानी और खाने के सेवन से व्यक्ति दस्त, हैजा, टाइफाइड, फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ सकता है। वातावरण में नमी के चलते बैक्टरिया और वायरस भी बढ़ जाते हैं। सांस के जरिए बैक्टरिया और वायरस श्वास नली में प्रवेश करते हैं। जिससे सामान्य जुकाम, फ्लू, ब्रोंकाइटिज जैसी बीमारी पैदा होती हैं।
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डॉ. सुरेश कोठियाल बताते है कि बरसात में जलभराव से मच्छरों के पनपने के चलते डेंगू और मलेरिया के मामले भी तेजी के साथ बढ़ते हैं। बारिश का मौसम शुरू होते ही आंख आने की बीमारी (कंजक्टिवाइटिस) के सबसे अधिक मामले प्रकाश में आते हैं।
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बरसात में पिस्सू से होने वाले स्क्रब टायफस के मामले भी अब बढ़ रहे हैं। ऐसे में केवल जागरुकता और सावधानी से ही स्वयं और अपने आसपास के लोगों को इन बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है।

डेंगू के लक्षण

- तेज बुखार सिर दर्द, मांसपेशियों, हड्डियों, जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी लगना, आंखों के पीछे दर्द, ग्रंथियों में सूजन, त्वचा पर लाल चकत्ते होना।

मलेरिया के लक्षण
- उल्टी आना, बुखार आना, जी मिचला, सांस फूलना, भूख में कमी होना, सिरदर्द होना, सर्दी -जुखाम होना, ठंडी लगना, डेंगू मलेरिया से बचाव ।

बचाव के उपाय
- घर के अंदर और आस-पड़ोस में पानी जमा न होने दें, पानी के सभी बर्तन को खुला न रखें, किचन और वाशरूम को सूखा रखें, कूलर का पानी सुबह और शाम बदलते रहें, खिड़कियों और दरवाजों में जाली लगवाएं, शरीर पर मच्छर को दूर रखने वाली क्रीम लगाएं, शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।

कंजक्टिवाइटिस के लक्षण
-आंखों में लाली, पानी आना, स्राव, धुंधला दिखाई देना, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना।

बचाव के उपाय
- फ्लू से बचने के लिए साफ हाथों से ही आंखों को साफ करना चाहिए, आंखों को दिन में तीन से चार बार पानी से धोना चाहिए, आंखे में सूजन, दर्द औंर लाली बढ़ने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।

डायरिया के लक्षण
- पेट में दर्द, ऐंठन, सूजन, निर्जलीकरण, बुखार, मल में खून, उल्टी।

बचाव के उपाय
- खुले भोजन और पानी का सेवन न करें, खाने-पीने के सामानों को ढक कर रखें, फ्रिज में रखे हुए पदार्थ बाहर निकाल कर तुरंत न खाएं, अंगूठों व अंगुलियों के नाखून का साफ रखे, पहले से रखा पानी न पीएं।

स्क्रब टायफस के लक्षण 
-बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द, आंख में संक्रमण, त्वचा पर चकत्ते होना और लिफ नोड्स में सूजन आना है। यह इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है। 

बचाव के उपाय
-स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए खुले में टहलते वक्त पैरों में जूते पहनें, अपने पालतू पशुओं को साफ रखें, पार्क या पेड़ पौधों के बीच जाने से पहले पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, तीन चार दिनों से अधिक बुखार रहने पर तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराएं। 

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